वंदे मातरम अनिवार्य करने पर वारिस पठान का सवाल: 'नहीं पढ़ा तो फांसी देंगे या गोली मारेंगे?'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रवक्ता वारिस पठान ने मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को 'वंदे मातरम' के पाठ को अनिवार्य बनाने के किसी भी विधायी प्रयास का कड़ा विरोध किया। पठान ने कहा कि मुसलमान राष्ट्रगान का सम्मान करते हैं, परंतु वंदे मातरम की कुछ पंक्तियों का उच्चारण इस्लामी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध है, और ऐसे में जबरन पाठ थोपना असंवैधानिक होगा।
विधेयक की पृष्ठभूमि
यह विवाद राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के 24 जुलाई को राज्यसभा में पेश किए जाने के बाद उभरा है। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को वही कानूनी और वैधानिक संरक्षण प्रदान करना है, जो वर्तमान में राष्ट्रगान 'जन गण मन' को प्राप्त है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय पूर्व में यह स्थापित कर चुका है कि राष्ट्रगान अनिवार्य है, जबकि राष्ट्रगीत का पाठ अनिवार्य नहीं है।
पठान का तर्क: धर्म बनाम देशभक्ति
पठान ने कहा, 'मैंने हमेशा कहा है कि हम वंदे मातरम का सम्मान करते हैं। हम उसका आदर करते हैं, लेकिन वंदे मातरम में कुछ ऐसी पंक्तियाँ हैं जिनका पाठ करना किसी मुसलमान के लिए वर्जित है। यदि उन पंक्तियों का उच्चारण किया जाए, तो इस्लामी मान्यता के अनुसार यह शिर्क हो जाता है। हम अल्लाह के सिवा किसी की पूजा नहीं करते, न ही कभी करेंगे। हम ऐसा करने के बजाय मरना पसंद करेंगे।' उन्होंने इसे अनुच्छेद 25 के तहत संवैधानिक अधिकार बताया, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी मान्यता दी है।
अनिवार्य पाठ न करने वालों के विरुद्ध संभावित कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पठान ने कहा, 'मैं अपने देश का सम्मान करता हूँ, लेकिन अगर मैं वंदे मातरम का पाठ नहीं करूँगा, तो आप क्या करेंगे? मुझे फांसी देंगे? गोली मार देंगे? भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पास लोगों को धमकाने के अलावा और कोई काम नहीं है।'
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अंतर
AIMIM नेता ने राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के बीच स्पष्ट विभाजन रेखा खींची। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रगान और वंदे मातरम में अंतर है। हम राष्ट्रगान 'जन गण मन' को पूरे मन से गाते हैं और उसका सम्मान करते हैं। हम तिरंगे को सलाम करते हैं। अगर आप हम पर कुछ थोपते हैं, तो यह असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ होगा।'
मुस्लिम समुदाय पर देशद्रोह का आरोप: पठान की आपत्ति
पठान ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगीत की कुछ पंक्तियों के पाठ से इनकार करने पर मुसलमानों को अक्सर देशद्रोही करार दिया जाता है, जो उनके अनुसार सरासर गलत है। उन्होंने कहा, 'हमारे लोगों ने इस देश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान की है। क्या आप RSS की बात नहीं करेंगे? BJP के कितने नेता वंदे मातरम को टेलीप्रॉम्टर से पढ़े बिना याद कर सकते हैं।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े कानूनी संरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि विधेयक का दायरा और क्रियान्वयन तंत्र अभी स्पष्ट नहीं है, जो इसे विवादास्पद बनाता है।
आगे की स्थिति
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 अभी संसद में विचाराधीन है। विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और संभावित संसदीय बहस आने वाले दिनों में इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।