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वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा: राज्यसभा में हंगामे के बीच राष्ट्र गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026 पेश

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वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा: राज्यसभा में हंगामे के बीच राष्ट्र गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026 पेश

सारांश

वंदे मातरम को 'जन गण मन' जैसी कानूनी सुरक्षा देने वाला विधेयक राज्यसभा में पेश हुआ — लेकिन विपक्ष ने संवैधानिक वैधता पर सीधा सवाल उठाया। हंगामे के बाद सदन सोमवार तक स्थगित। यह विधेयक दशकों पुरानी बहस को कानूनी रूप देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 को गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने 25 जुलाई 2026 को राज्यसभा में पेश किया।
विधेयक के तहत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध घोषित किया जाएगा।
वंदे मातरम को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष वैधानिक दर्जा और सुरक्षा देने का प्रस्ताव है।
शिवदासन और CPI के संतोष कुमार पी.
ने विरोध नोटिस दिया।
विधेयक की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने कहा कि संसद सामान्य कानून से संवैधानिक घोषणा नहीं बदल सकती।
हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही 27 जुलाई 2026 तक स्थगित।

राज्यसभा में शुक्रवार, 25 जुलाई 2026 को भारी हंगामे के बीच राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया गया। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध घोषित करना है। विधेयक को सदन में विचार और पारित करने के लिए रखा गया है।

विधेयक में क्या है

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, वंदे मातरम को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष वैधानिक दर्जा और कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा सकती है और कानून के तहत दंड का प्रावधान होगा। यह पहली बार है जब वंदे मातरम को इस स्तर की विधायी सुरक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।

सदन में विरोध और हंगामा

विधेयक पेश होते ही सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया। उपसभापति ने बताया कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्यों — डॉ. जॉन ब्रिटास, ए. ए. रहीम, डॉ. वी. शिवदासन — तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सदस्य संतोष कुमार पी. की ओर से विरोध संबंधी नोटिस प्राप्त हुए हैं। सभापति ने इन सदस्यों को अपना पक्ष रखने की अनुमति दी। हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार, 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष के तर्क

विधेयक का विरोध करते हुए डॉ. जॉन ब्रिटास ने कहा कि संसद सामान्य कानून के ज़रिए किसी संवैधानिक घोषणा को दोबारा नहीं लिख सकती। उनका कहना था कि यह विधेयक पूरी तरह डॉ. राजेंद्र प्रसाद के एक वक्तव्य पर आधारित है, परंतु उसमें सबसे महत्वपूर्ण वाक्य और उसका संवैधानिक संदर्भ शामिल नहीं किया गया है।

ब्रिटास ने तर्क दिया कि वह वक्तव्य न तो संविधान का कोई प्रावधान था, न कोई प्रस्ताव और न ही संविधान सभा का निर्णय। उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने करीब तीन वर्षों के गहन विचार-विमर्श के बाद जानबूझकर राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को समान संवैधानिक दर्जा नहीं दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में कई विधेयकों पर तीखी बहस जारी है।

ब्रिटास ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के कानून से देशभक्ति और राष्ट्रवाद पैदा नहीं किया जा सकता, और उनके अनुसार सरकार इस विधेयक के माध्यम से समाज का ध्रुवीकरण करना चाहती है।

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि वंदे मातरम को 1950 में संविधान लागू होने के समय से राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है, लेकिन राष्ट्रगान 'जन गण मन' के विपरीत इसे अभी तक समान विधायी सुरक्षा नहीं मिली थी। यह विधेयक उसी अंतर को पाटने का प्रयास है, जिस पर दशकों से बहस होती रही है।

आगे क्या होगा

विधेयक अब 27 जुलाई को सदन की बैठक में पुनः विचार के लिए आएगा। इसे पारित होने के लिए राज्यसभा में बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसके बाद इसे लोकसभा में भी पेश किया जाएगा। विपक्षी दलों के विरोध को देखते हुए विधेयक का मार्ग आसान नहीं दिखता।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यायिक समीक्षा की दृष्टि से गंभीर है। दूसरी ओर, सरकार का पक्ष यह है कि वंदे मातरम को मिलने वाली सांस्कृतिक मान्यता को विधायी सुरक्षा का अभाव है — जो एक वास्तविक अंतर है। असली परीक्षा तब होगी जब यह विधेयक न्यायालय में चुनौती का सामना करेगा; तब तक यह राजनीतिक ध्रुवीकरण का औज़ार बनने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने के लिए लाया गया है। इसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष वैधानिक दर्जा और कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
यह विधेयक राज्यसभा में कब और किसने पेश किया?
गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने 25 जुलाई 2026 को राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया। विधेयक पेश करने के दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ और कार्यवाही 27 जुलाई तक स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध क्यों किया?
CPI(M) के डॉ. जॉन ब्रिटास ने तर्क दिया कि संसद सामान्य कानून के ज़रिए संवैधानिक घोषणा को नहीं बदल सकती। उनके अनुसार संविधान सभा ने जानबूझकर वंदे मातरम और जन गण मन को समान संवैधानिक दर्जा नहीं दिया था, इसलिए यह विधेयक संविधान निर्माताओं की मंशा के विरुद्ध है।
वंदे मातरम की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है?
वंदे मातरम को 1950 से राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है, लेकिन राष्ट्रगान 'जन गण मन' के विपरीत इसे अभी तक समान विधायी सुरक्षा नहीं मिली है। यही अंतर इस विधेयक का आधार है।
इस विधेयक पर आगे क्या होगा?
विधेयक 27 जुलाई 2026 को राज्यसभा की बैठक में पुनः विचार के लिए आएगा। पारित होने के बाद इसे लोकसभा में भी पेश करना होगा। विपक्ष के कड़े विरोध को देखते हुए इसका मार्ग चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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