अमित शाह आज राज्यसभा में 'वंदे मातरम' अपमान निवारण विधेयक 2026 करेंगे पेश, तीन साल जेल का प्रावधान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार, 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश करने वाले हैं। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन में जान-बूझकर बाधा डालने या उसका अपमान करने को आपराधिक अपराध घोषित करना है। प्रस्तावित संशोधन के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन वर्ष के कारावास का प्रावधान रखा गया है।
विधेयक में क्या है
यह विधेयक 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' में संशोधन का प्रस्ताव करता है। वर्तमान में यह कानून राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान 'जन गण मन' के अपमान को दंडनीय मानता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद 'वंदे मातरम' को भी उसी कानूनी दायरे में शामिल किया जाएगा।
विधेयक के अनुसार, जो कोई भी व्यक्ति जान-बूझकर 'वंदे मातरम' के गायन में बाधा उत्पन्न करेगा, उसे रोकेगा या गा रहे समूह में व्यवधान पैदा करेगा, उस पर वही दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे जो अभी राष्ट्रगान से जुड़े अपराधों के लिए निर्धारित हैं — यानी तीन साल तक की जेल।
ऐतिहासिक संदर्भ
'वंदे मातरम' को दशकों से भारत का राष्ट्रीय गीत माना जाता रहा है, किंतु 1971 के कानून के अंतर्गत इसे अब तक वह वैधानिक सुरक्षा प्राप्त नहीं थी जो राष्ट्रगान को मिली हुई है। यह विधायी पहल उस अंतर को पाटने का प्रयास है। गौरतलब है कि यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के 9 जुलाई के उस परिपत्र के ठीक बाद उठाया गया है, जिसमें सभी राज्यों को निर्देश दिया गया था कि सरकारी कार्यक्रमों में 'जन गण मन' से पूर्व 'वंदे मातरम' बजाने के आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
संसदीय प्रक्रिया
विधेयक सोमवार को राज्यसभा के कार्यसूची में सम्मिलित है। यदि दोनों सदनों — राज्यसभा और लोकसभा — से इसे स्वीकृति मिल जाती है और राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त होती है, तो 'वंदे मातरम' का अपमान या उसमें बाधा डालना भारतीय विधि के अंतर्गत एक दंडनीय आपराधिक अपराध बन जाएगा।
आगे क्या होगा
विधेयक का भविष्य संसद में बहुमत और विपक्षी दलों के रुख पर निर्भर करेगा। मानसून सत्र के पहले ही दिन इस विधेयक को पेश किए जाने से यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाना चाहती है। दोनों सदनों की मंजूरी के बाद यह संशोधन राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समकक्ष कानूनी और वैधानिक दर्जा दिला देगा।