नेपाल बाढ़: एनविडिया CEO जेन्सेन हुआंग ने दिए ₹83 करोड़ (1 करोड़ डॉलर), राहत कोष 66 मिलियन डॉलर पार
सारांश
मुख्य बातें
एनविडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेन्सेन हुआंग ने नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹83 करोड़) का दान दिया है — यह राशि रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने एक वीडियो संदेश में इस योगदान की घोषणा करते हुए हुआंग का आभार जताया।
राहत कोष में कुल दान 66 मिलियन डॉलर पार
वाग्ले ने बताया कि हुआंग के इस दान के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में कुल संग्रह 10 अरब नेपाली रुपये (लगभग 6.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर) से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा, 'नेपाल सरकार की ओर से मैं जेन्सेन हुआंग का प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए एक करोड़ डॉलर का दान देने पर हार्दिक धन्यवाद करता हूँ।' वाग्ले ने यह भी कहा, 'परोपकार के किसी भी मानक से देखें तो यह एक बड़ा और प्रेरणादायक योगदान है। मुझे उम्मीद है कि इससे और लोग भी इस नेक काम में मदद के लिए आगे आएंगे।'
त्रासदी का पैमाना: 1,259 मौतें, 5,000 से अधिक लापता
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की ताज़ा स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा में आई इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक 1,259 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,053 लोग अब भी लापता हैं। यह आपदा पिछले सप्ताह आई थी और तब से राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
अंतरराष्ट्रीय सहायता: कौन दे रहा है कितना
नेपाल को कई देशों और बहुपक्षीय संस्थाओं से सहायता मिल रही है। भारत अब तक पाँच चरणों में 74 टन राहत एवं बचाव सामग्री भेज चुका है और विशेषज्ञ टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं — यह जानकारी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने गुरुवार शाम सोशल मीडिया पर साझा की।
चीन ने NPR 30 करोड़ और 50 टन राहत सामग्री दी है; नेपाल ने उससे 30 बेली ब्रिज उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया है। पाकिस्तान 86 टन राहत सामग्री दे रहा है, श्रीलंका ने 10 लाख डॉलर की सहायता का वादा किया है और बांग्लादेश राहत सामग्री भेजने की तैयारी में है।
पश्चिमी देशों में अमेरिका ने 5 लाख डॉलर, ऑस्ट्रेलिया ने 10 लाख डॉलर नकद सहायता और विशेषज्ञ-ड्रोन टीम भेजने का वादा किया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 83 टन राहत सामग्री पहले ही भेज चुका है और 1 करोड़ डॉलर तक की अतिरिक्त सहायता का आश्वासन दिया है। कतर ने 40 टन सामग्री दी है।
ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड स्टर्लिंग की घोषणा की है। यूरोपीय संघ के मानवीय सहायता विभाग (ECHO) ने 20 लाख यूरो, स्विट्जरलैंड ने 10 लाख डॉलर, डेनमार्क ने 35 लाख डेनिश क्रोनर, जर्मनी ने 20 लाख डॉलर, आयरलैंड ने 5 लाख यूरो, चेक गणराज्य ने 25 लाख चेक कोरुना और नॉर्वे ने 1.27 करोड़ नॉर्वेजियन क्रोनर की सहायता की घोषणा की है। फ्रांस ने 200 परिवारों के लिए आपातकालीन राहत सामग्री उपलब्ध कराई है; लक्जमबर्ग और लातविया ने भी सामग्री भेजी है।
बहुपक्षीय संस्थाओं की मदद
विश्व बैंक ने रियायती ऋण के रूप में 16.7 करोड़ डॉलर देने का वादा किया है। एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 50 लाख डॉलर का बजटीय सहयोग अनुदान और 1.5 लाख डॉलर की तकनीकी सहायता देने की घोषणा की है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून के कारण हर वर्ष बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ होती हैं, लेकिन इस बार की त्रासदी का पैमाना असाधारण रूप से बड़ा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की यह एकजुटता राहत अभियान को गति देगी, हालाँकि दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए और अधिक संसाधनों की आवश्यकता होगी।