नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या 626 पहुँची, आईओएम ने पुनर्वास सहायता का आश्वासन दिया
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के चार दिन बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 626 हो गई है, जबकि लगभग 2,500 लोग अभी भी लापता हैं। संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने इस भीषण त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राहत और पुनर्वास कार्यों में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने शनिवार सुबह 10 बजे तक के आँकड़े जारी किए।
आईओएम की प्रतिक्रिया और सहायता का दायरा
जिनेवा स्थित आईओएम मुख्यालय से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, 'आईओएम दोनों देशों — तिब्बत और नेपाल — की जरूरतों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार राहत और पुनर्वास कार्यों में मदद के लिए पूरी तरह तैयार है। नेपाल में, आईओएम सरकारी एजेंसियों और मानवीय सहायता देने वाले सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।' संगठन ने यह भी बताया कि जरूरी सेवाओं तक पहुँच बाधित होने से मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता उत्पन्न हो गई है।
आईओएम के अनुसार, पिछली आपदाओं में उसने अस्थायी आश्रय, गैर-खाद्य सामग्री, कैंप प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएँ, डेटा प्रबंधन, शुरुआती पुनर्वास और आजीविका पुनर्निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान की है। इस बार भी इन्हीं क्षेत्रों में काम करने की तैयारी है।
तबाही का विस्तार और मौजूदा स्थिति
बाढ़ ने नेपाल में व्यापक तबाही मचाई है। 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और करीब 2,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत एजेंसियों के अनुसार, दूरदराज के इलाकों में संपर्क टूटने के कारण वास्तविक संख्या और अधिक हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून का मौसम अपने चरम पर है और बचाव अभियान चलाना अत्यंत कठिन हो गया है।
भारत की सहायता
इस विकट परिस्थिति में भारत ने तेज़ी से मदद का हाथ बढ़ाया है। अब तक 57.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। शुक्रवार रात 10 टन राहत सामग्री की एक और खेप काठमांडू पहुँची। इसके साथ ही 11 सदस्यीय चिकित्सकों और पैरामेडिक्स की एक विशेष टीम भी नेपाल रवाना की गई है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र सहित दुनिया के कई देशों ने नेपाल के साथ एकजुटता जताई है। गौरतलब है कि नेपाल भौगोलिक दृष्टि से आपदा-संवेदनशील देश है, जहाँ हर मानसून में बड़े पैमाने पर बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ होती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी नदियों के किनारे बसी आबादी के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास और आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे की सख्त जरूरत है।
आगे की राह
बचाव और राहत अभियान जारी है, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियाँ इसमें बाधा डाल रही हैं। आईओएम और अन्य अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियाँ नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए प्रभावित परिवारों तक राहत पहुँचाने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में लापता लोगों की तलाश और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित रहेगा।