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नेपाल बाढ़ राहत: भारत ने भेजी 37.5 टन सामग्री की दूसरी खेप, जयशंकर बोले — हर संभव मदद जारी रहेगी

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नेपाल बाढ़ राहत: भारत ने भेजी 37.5 टन सामग्री की दूसरी खेप, जयशंकर बोले — हर संभव मदद जारी रहेगी

सारांश

भोटेकोसी नदी में हिमस्खलन से उपजी अचानक बाढ़ ने नेपाल के कई जिलों में तबाही मचाई — 162 शव बरामद। भारत ने 48 घंटों में दो उड़ानों से कुल 47.5 टन से अधिक राहत सामग्री भेजकर 'पड़ोसी-प्रथम' नीति को अमल में दिखाया।

मुख्य बातें

भारत ने गुरुवार को नेपाल के लिए 37.5 टन HADR सामग्री, दवाइयाँ और खाद्य पैकेट की दूसरी खेप रवाना की।
बुधवार को भेजी गई 10 टन पहली खेप को राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपा।
दो दिनों में भारत की कुल राहत सहायता 47.5 टन से अधिक हो गई।
पुलिस के अनुसार गुरुवार सुबह तक 162 शव नदी तटों से बरामद किए जा चुके थे।
बाढ़ का कारण भोटेकोसी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का हिमस्खलन से अवरुद्ध होना था — इलाके में बारिश नहीं थी।
प्रभावित जिलों में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं और दोनों नवलपरासी शामिल हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार, 28 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि नेपाल में भोटेकोसी नदी में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद भारत ने राहत सामग्री की दूसरी बड़ी खेप रवाना कर दी है, जिसमें 37.5 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सामग्री, दवाइयाँ और खाद्य पैकेट शामिल हैं। इससे एक दिन पहले बुधवार को भी भारत ने 10 टन सहायता सामग्री की पहली खेप नेपाल भेजी थी, जिससे दो दिनों में कुल 47.5 टन से अधिक राहत सामग्री पड़ोसी देश पहुँच चुकी है।

क्या है पूरा घटनाक्रम

भोटेकोसी नदी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया, जिसके बाद अचानक भीषण बाढ़ आ गई। सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के निकट रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे गाँव इस आपदा की चपेट में आया। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय इलाके में बारिश नहीं हो रही थी, इसलिए स्थानीय लोगों को आपदा का कोई पूर्वाभास नहीं था और वे अपनी दिनचर्या में लगे हुए थे।

गुरुवार सुबह तक पुलिस के अनुसार 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे। ये शव भोटेकोशी और त्रिशूल नदी प्रणालियों के निचले इलाकों में फैले कई जिलों — रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी (पूर्व) और नवलपरासी (पश्चिम) — के नदी तटों से मिले।

भारत की राहत कार्रवाई

जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजने का अभियान जारी है। दूसरी उड़ान भी नेपाल के लिए रवाना हो चुकी है, जिसमें 37.5 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री, दवाइयाँ और खाद्य पैकेट भेजे गए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत, नेपाल के अधिकारियों के साथ निरंतर और घनिष्ठ संपर्क में है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी एक्स पर पोस्ट कर पुष्टि की कि दूसरी उड़ान रवाना हो चुकी है और भारत इस कठिन घड़ी में नेपाल के साथ दृढ़ता से खड़ा है।

पहली खेप बुधवार को नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को औपचारिक रूप से सौंपी थी। इस सहायता में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक राहत सामग्री शामिल थी।

आम जनता पर असर

यह बाढ़ इसलिए और भी अधिक विनाशकारी रही क्योंकि इसका कोई पूर्व संकेत नहीं था — न बारिश, न अलर्ट। हिमस्खलन से नदी का प्रवाह रुका और अचानक पानी का विशाल दबाव नीचे की ओर बह चला। रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जैसे पर्वतीय जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए, जहाँ बुनियादी ढाँचा, घर और खेत सब कुछ तबाह हो गया।

आगे क्या होगा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, राहत और बचाव कार्यों में हर संभव सहयोग जारी रखा जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-नेपाल संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की कोशिशें चल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की त्वरित आपदा प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच 'पड़ोसी-प्रथम' नीति को व्यावहारिक धरातल पर मज़बूती देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर बयानों में अधिक और ज़मीन पर कम दिखती है। गौरतलब है कि भोटेकोसी की यह तबाही बिना किसी मौसमी चेतावनी के आई, जो हिमालयी हिमस्खलन-बाढ़ (GLOF) के बढ़ते खतरे और दोनों देशों के बीच साझा पूर्व-चेतावनी तंत्र की कमी को उजागर करती है। असली सवाल यह है कि क्या यह तत्काल राहत एक दीर्घकालिक आपदा-प्रबंधन साझेदारी में बदलेगी, या अगली आपदा आने तक फिर वही ढाक के तीन पात रहेंगे।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल में भोटेकोसी नदी में बाढ़ क्यों आई?
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, भोटेकोसी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया, जिससे पानी का विशाल दबाव एकाएक नीचे की ओर बह निकला। उस समय इलाके में बारिश नहीं हो रही थी, इसलिए लोगों को कोई पूर्व चेतावनी नहीं मिली।
भारत ने नेपाल बाढ़ राहत में अब तक कितनी सहायता भेजी है?
भारत ने दो दिनों में दो उड़ानों के ज़रिये कुल 47.5 टन से अधिक सहायता भेजी है — बुधवार को 10 टन और गुरुवार को 37.5 टन HADR सामग्री, दवाइयाँ और खाद्य पैकेट। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि राहत अभियान जारी रहेगा।
नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
पुलिस के अनुसार गुरुवार सुबह तक 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे। ये शव भोटेकोशी और त्रिशूल नदी प्रणालियों के किनारे रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं और दोनों नवलपरासी जिलों से मिले।
भारत की राहत सामग्री नेपाल को किसने सौंपी?
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बुधवार को पहली 10 टन खेप औपचारिक रूप से नेपाल के संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपी। दूसरी खेप की पुष्टि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने की।
नेपाल बाढ़ से कौन-से जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं?
रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी (पूर्व) और नवलपरासी (पश्चिम) — ये आठ जिले सबसे अधिक प्रभावित बताए गए हैं। सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र का तिमुरे गाँव इस आपदा की चपेट में आया था।
राष्ट्र प्रेस
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