नेपाल बाढ़ राहत: भारत ने भेजी 37.5 टन सामग्री की दूसरी खेप, जयशंकर बोले — हर संभव मदद जारी रहेगी
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार, 28 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि नेपाल में भोटेकोसी नदी में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद भारत ने राहत सामग्री की दूसरी बड़ी खेप रवाना कर दी है, जिसमें 37.5 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सामग्री, दवाइयाँ और खाद्य पैकेट शामिल हैं। इससे एक दिन पहले बुधवार को भी भारत ने 10 टन सहायता सामग्री की पहली खेप नेपाल भेजी थी, जिससे दो दिनों में कुल 47.5 टन से अधिक राहत सामग्री पड़ोसी देश पहुँच चुकी है।
क्या है पूरा घटनाक्रम
भोटेकोसी नदी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया, जिसके बाद अचानक भीषण बाढ़ आ गई। सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के निकट रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे गाँव इस आपदा की चपेट में आया। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय इलाके में बारिश नहीं हो रही थी, इसलिए स्थानीय लोगों को आपदा का कोई पूर्वाभास नहीं था और वे अपनी दिनचर्या में लगे हुए थे।
गुरुवार सुबह तक पुलिस के अनुसार 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे। ये शव भोटेकोशी और त्रिशूल नदी प्रणालियों के निचले इलाकों में फैले कई जिलों — रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी (पूर्व) और नवलपरासी (पश्चिम) — के नदी तटों से मिले।
भारत की राहत कार्रवाई
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजने का अभियान जारी है। दूसरी उड़ान भी नेपाल के लिए रवाना हो चुकी है, जिसमें 37.5 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री, दवाइयाँ और खाद्य पैकेट भेजे गए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत, नेपाल के अधिकारियों के साथ निरंतर और घनिष्ठ संपर्क में है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी एक्स पर पोस्ट कर पुष्टि की कि दूसरी उड़ान रवाना हो चुकी है और भारत इस कठिन घड़ी में नेपाल के साथ दृढ़ता से खड़ा है।
पहली खेप बुधवार को नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को औपचारिक रूप से सौंपी थी। इस सहायता में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक राहत सामग्री शामिल थी।
आम जनता पर असर
यह बाढ़ इसलिए और भी अधिक विनाशकारी रही क्योंकि इसका कोई पूर्व संकेत नहीं था — न बारिश, न अलर्ट। हिमस्खलन से नदी का प्रवाह रुका और अचानक पानी का विशाल दबाव नीचे की ओर बह चला। रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जैसे पर्वतीय जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए, जहाँ बुनियादी ढाँचा, घर और खेत सब कुछ तबाह हो गया।
आगे क्या होगा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, राहत और बचाव कार्यों में हर संभव सहयोग जारी रखा जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-नेपाल संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की कोशिशें चल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की त्वरित आपदा प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच 'पड़ोसी-प्रथम' नीति को व्यावहारिक धरातल पर मज़बूती देती है।