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नेपाल बाढ़: भारत ने भेजे 47.5 टन राहत सामग्री, बेली ब्रिज भी रवाना होंगे

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नेपाल बाढ़: भारत ने भेजे 47.5 टन राहत सामग्री, बेली ब्रिज भी रवाना होंगे

सारांश

भोटे कोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में 270 लोगों की जान ली और 800 से अधिक लापता हैं। भारत ने 47.5 टन राहत सामग्री के साथ दो विमान भेजे और बेली ब्रिज जुटाने की घोषणा की — यह पड़ोसी संकट में भारत की 'पहले पड़ोसी' नीति की त्वरित परीक्षा है।

मुख्य बातें

भारत ने C-130J और C-17 विमानों से 47.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री काठमांडू भेजी।
विदेश मंत्रालय ने बचाव कार्यों के लिए बेली ब्रिज जुटाने की घोषणा की।
नेपाल पुलिस के अनुसार भोटे कोशी बाढ़ में मृतकों की संख्या 270 तक पहुँची; सर्वाधिक 108 शव चितवन से।
800 से अधिक लोगों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है।
MEA ने 24 घंटे का कंट्रोल रूम स्थापित किया; काठमांडू और बीजिंग दूतावासों में भी 24/7 हेल्पलाइन सक्रिय।
बाढ़ चीन के तिब्बती क्षेत्र से उद्गम लेकर सीमा पार नेपाल में दाखिल हुई।

भारत ने नेपाल बाढ़ के मद्देनजर तत्काल राहत अभियान शुरू करते हुए 47.5 टन आपातकालीन सामग्री दो विमानों के ज़रिए काठमांडू भेजी है और बचाव कार्यों में सहायता के लिए बेली ब्रिज जुटाने की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 27 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी।

राहत सामग्री का विवरण

बुधवार रात करीब 8:30 बजे एक C-130J विमान ने 10 टन सामग्री के साथ उड़ान भरी, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएँ शामिल थीं। इसके बाद गुरुवार सुबह एक C-17 विमान 37.5 टन सामान लेकर रवाना हुआ — जिसमें 28.5 टन राहत सामग्री (टेंट, कंबल, जल-निकासी पंप, किचन सेट, जेनसेट), 8 टन दवाएँ और 1 टन खाद्य सामग्री थी।

जायसवाल ने कहा, 'कुल मिलाकर, हवाई मार्ग से दो बार की रवानगी में, भारत ने नेपाल के चल रहे बचाव और राहत कार्यों में सहायता के लिए 47.5 टन आपातकालीन आपूर्ति भेजी है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की सहायता पर विचार जारी है और बेली ब्रिज भी जुटाए जा रहे हैं।

कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन सक्रिय

विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में एक 24 घंटे का कंट्रोल रूम स्थापित किया है। जायसवाल के अनुसार, काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों ने भी 24/7 हेल्पलाइन सक्रिय की हैं। हेल्पलाइन नंबर मंत्रालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी किए जा रहे हैं। मंत्रालय उन राज्य सरकारों के भी संपर्क में है जहाँ से नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हैं, और गृह मंत्रालय के माध्यम से समन्वय किया जा रहा है।

तबाही का पैमाना

यह विनाशकारी बाढ़ चीन के तिब्बती क्षेत्र से उद्गम लेने वाली भोटे कोशी नदी में अचानक आई, जो सीमा पार नेपाल में घुसी और भारी तबाही मचाई। नेपाल पुलिस ने 27 अगस्त दोपहर पुष्टि की कि मृतकों की संख्या 270 तक पहुँच गई है और नदी के बहाव की दिशा में पड़ने वाले कई ज़िलों से शव बरामद किए जा रहे हैं।

ज़िलेवार आँकड़ों के अनुसार, सर्वाधिक 108 शव दक्षिणी मैदानी क्षेत्र के चितवन ज़िले से मिले। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 62, धाडिंग से 27 और रसुवा से 17 शव बरामद हुए।

बुनियादी ढाँचे को नुकसान और लापता लोग

नेपाली सरकार के अनुसार, बाढ़ से रिहायशी इलाके, पनबिजली परियोजनाएँ, कस्टम कार्यालय और बिजली का बुनियादी ढाँचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि 800 से अधिक लोगों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और नेपाल के बीच आपदा प्रबंधन सहयोग को लेकर द्विपक्षीय प्रतिबद्धताएँ पहले से मज़बूत हो रही हैं। आने वाले दिनों में बेली ब्रिज की तैनाती और अतिरिक्त राहत सामग्री की खेप नेपाल की पुनर्वास प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती ज़मीन पर है। भोटे कोशी जैसी सीमापार नदियों पर आपदा प्रबंधन के लिए भारत-नेपाल-चीन के बीच कोई स्थायी त्रिपक्षीय तंत्र नहीं है — और यह बाढ़ उस रिक्तता को एक बार फिर उजागर करती है। 800 से अधिक लापता लोगों और ध्वस्त बुनियादी ढाँचे के बीच, बेली ब्रिज की समयबद्ध तैनाती और अतिरिक्त सहायता का वास्तविक क्रियान्वयन ही यह तय करेगा कि यह प्रतिक्रिया घोषणा से आगे जाती है या नहीं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने नेपाल बाढ़ में कितनी राहत सामग्री भेजी है?
भारत ने दो विमानों के ज़रिए कुल 47.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री काठमांडू भेजी है — जिसमें टेंट, कंबल, दवाएँ, जल-निकासी पंप और खाद्य सामग्री शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने 27 अगस्त को यह जानकारी दी।
नेपाल बाढ़ में कितने लोगों की मौत हुई है?
नेपाल पुलिस ने 27 अगस्त दोपहर पुष्टि की कि भोटे कोशी नदी की बाढ़ में मृतकों की संख्या 270 तक पहुँच गई है। इसके अलावा 800 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।
बेली ब्रिज क्या है और नेपाल में इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?
बेली ब्रिज एक पूर्व-निर्मित, जल्दी असेंबल होने वाला अस्थायी पुल है जिसे आपदा क्षेत्रों में टूटे पुलों के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। नेपाल में बाढ़ ने कई पुल और सड़क संपर्क नष्ट कर दिए हैं, जिससे बचाव दलों को दूरदराज़ के इलाकों तक पहुँचने में बेली ब्रिज की ज़रूरत है।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए भारत ने क्या इंतज़ाम किए हैं?
विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे का कंट्रोल रूम स्थापित किया है और उन राज्य सरकारों से संपर्क में है जहाँ से नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हैं। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों ने भी 24/7 हेल्पलाइन सक्रिय की हैं।
नेपाल में यह बाढ़ कहाँ से आई और कौन-से ज़िले सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए?
यह बाढ़ चीन के तिब्बती क्षेत्र से निकलने वाली भोटे कोशी नदी में अचानक आई और सीमा पार नेपाल में तबाही मचाई। सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में चितवन (108 मौतें), नवलपरासी ईस्ट (62), धाडिंग (27) और रसुवा (17) शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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