नेपाल बाढ़: भारत ने भेजे 47.5 टन राहत सामग्री, बेली ब्रिज भी रवाना होंगे
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने नेपाल बाढ़ के मद्देनजर तत्काल राहत अभियान शुरू करते हुए 47.5 टन आपातकालीन सामग्री दो विमानों के ज़रिए काठमांडू भेजी है और बचाव कार्यों में सहायता के लिए बेली ब्रिज जुटाने की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 27 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी।
राहत सामग्री का विवरण
बुधवार रात करीब 8:30 बजे एक C-130J विमान ने 10 टन सामग्री के साथ उड़ान भरी, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएँ शामिल थीं। इसके बाद गुरुवार सुबह एक C-17 विमान 37.5 टन सामान लेकर रवाना हुआ — जिसमें 28.5 टन राहत सामग्री (टेंट, कंबल, जल-निकासी पंप, किचन सेट, जेनसेट), 8 टन दवाएँ और 1 टन खाद्य सामग्री थी।
जायसवाल ने कहा, 'कुल मिलाकर, हवाई मार्ग से दो बार की रवानगी में, भारत ने नेपाल के चल रहे बचाव और राहत कार्यों में सहायता के लिए 47.5 टन आपातकालीन आपूर्ति भेजी है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की सहायता पर विचार जारी है और बेली ब्रिज भी जुटाए जा रहे हैं।
कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन सक्रिय
विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में एक 24 घंटे का कंट्रोल रूम स्थापित किया है। जायसवाल के अनुसार, काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों ने भी 24/7 हेल्पलाइन सक्रिय की हैं। हेल्पलाइन नंबर मंत्रालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी किए जा रहे हैं। मंत्रालय उन राज्य सरकारों के भी संपर्क में है जहाँ से नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हैं, और गृह मंत्रालय के माध्यम से समन्वय किया जा रहा है।
तबाही का पैमाना
यह विनाशकारी बाढ़ चीन के तिब्बती क्षेत्र से उद्गम लेने वाली भोटे कोशी नदी में अचानक आई, जो सीमा पार नेपाल में घुसी और भारी तबाही मचाई। नेपाल पुलिस ने 27 अगस्त दोपहर पुष्टि की कि मृतकों की संख्या 270 तक पहुँच गई है और नदी के बहाव की दिशा में पड़ने वाले कई ज़िलों से शव बरामद किए जा रहे हैं।
ज़िलेवार आँकड़ों के अनुसार, सर्वाधिक 108 शव दक्षिणी मैदानी क्षेत्र के चितवन ज़िले से मिले। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 62, धाडिंग से 27 और रसुवा से 17 शव बरामद हुए।
बुनियादी ढाँचे को नुकसान और लापता लोग
नेपाली सरकार के अनुसार, बाढ़ से रिहायशी इलाके, पनबिजली परियोजनाएँ, कस्टम कार्यालय और बिजली का बुनियादी ढाँचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि 800 से अधिक लोगों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और नेपाल के बीच आपदा प्रबंधन सहयोग को लेकर द्विपक्षीय प्रतिबद्धताएँ पहले से मज़बूत हो रही हैं। आने वाले दिनों में बेली ब्रिज की तैनाती और अतिरिक्त राहत सामग्री की खेप नेपाल की पुनर्वास प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।