नेपाल बाढ़ पर जयशंकर की आपात बैठक: काठमांडू-बीजिंग राजदूत शामिल, भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 अगस्त 2026 को नेपाल में भोटेकोसी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के मद्देनज़र एक उच्चस्तरीय आपात समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय (MEA) की टीम और काठमांडू तथा बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूत शामिल हुए। बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में क्या हुआ
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद सभी भारतीयों की स्थिति जानने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेज़ी से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय इस संकट में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और परियोजना अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। साथ ही नेपाल सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
बाढ़ कैसे आई: घटनाक्रम
26 अगस्त को नेपाल के तीन जिलों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचाई। रिपोर्टों के अनुसार, यह आपदा तब आई जब भोटेकोसी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया और फिर अचानक टूट गया। इससे सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के निकट रसुवागढ़ी क्षेत्र का तिमुरे गाँव बाढ़ की चपेट में आया।
उल्लेखनीय है कि बाढ़ से पहले इलाके में कोई बारिश नहीं हुई थी, जिससे स्थानीय लोगों को इस आपदा का कोई पूर्वाभास नहीं था। बाढ़ आने के समय अधिकांश लोग अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे, जिससे हालात और गंभीर हो गए।
भारत की राहत सहायता
नेपाल के इस संकट में भारत ने तत्काल मानवीय सहायता का अभियान शुरू किया। बुधवार को 10 टन राहत सामग्री की पहली खेप भेजी गई। गुरुवार को 37.5 टन की दूसरी और बड़ी खेप रवाना की गई, जिससे कुल सहायता 47.5 टन हो गई।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने राहत सामग्री औपचारिक रूप से नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपी। इस सहायता में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए अत्यावश्यक राहत सामग्री शामिल है।
आम जनता और भारतीय नागरिकों पर असर
यह आपदा ऐसे समय में आई है जब नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, श्रमिक और परियोजना कर्मी मौजूद हैं। विदेश मंत्रालय इन सभी की स्थिति का आकलन करने में जुटा है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र भारत-नेपाल-चीन के बीच एक संवेदनशील त्रिकोणीय सीमा पर स्थित है, जिससे बचाव अभियान की जटिलता और बढ़ जाती है।
आगे क्या होगा
विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि राहत अभियान जारी रहेगा और ज़रूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता भेजी जाएगी। भारत के अलावा अन्य देश भी नेपाल को सहयोग दे रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में संचार और सड़क संपर्क बहाल करना फ़िलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता बताई जा रही है।