27 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

टी-72 और टी-90 टैंक सीमा पर लोहे की दीवार: राजनाथ सिंह ने जबलपुर में ₹472 करोड़ परियोजना का शिलान्यास किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
टी-72 और टी-90 टैंक सीमा पर लोहे की दीवार: राजनाथ सिंह ने जबलपुर में ₹472 करोड़ परियोजना का शिलान्यास किया

सारांश

राजनाथ सिंह ने जबलपुर में ₹472 करोड़ की टैंक नवीनीकरण परियोजना का शिलान्यास कर स्पष्ट किया — टैंक की भूमिका खत्म नहीं, बदल रही है। ड्रोन युग में भी टी-72 और टी-90 सीमा की रक्षा की धुरी हैं। साथ ही रक्षा उत्पादन ₹46,000 करोड़ से ₹1.77 लाख करोड़ तक पहुँचने का आँकड़ा आत्मनिर्भरता की असली तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 अगस्त 2026 को जबलपुर में ₹472 करोड़ की टैंक नवीनीकरण परियोजना का शिलान्यास किया।
परियोजना पूरी होने पर देश की वार्षिक टैंक नवीनीकरण क्षमता बढ़कर 230 टैंक प्रतिवर्ष हो जाएगी — HVF अवाडी की 150 और वाहन कारखाना जबलपुर की 80 क्षमता मिलकर।
भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 के ₹46,000 करोड़ से बढ़कर ₹1 लाख 77 हज़ार करोड़ से अधिक हो गया है।
रक्षा निर्यात ₹1,000 करोड़ से कम से बढ़कर रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ पर पहुँचा।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 3,073 हेक्टेयर भूमि पर ₹16,960 करोड़ से अधिक का रक्षा विनिर्माण निवेश प्रस्तावित।
राजनाथ सिंह ने टैंक, ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के एकीकृत उपयोग पर बल दिया — किसी एक को दूसरे का विकल्प नहीं माना।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 अगस्त 2026 को जबलपुर में ₹472 करोड़ की टैंक नवीनीकरण परियोजना का शिलान्यास करते हुए स्पष्ट किया कि जमीनी युद्ध में टी-72 और टी-90 टैंकों की भूमिका न केवल प्रासंगिक है, बल्कि अपरिहार्य भी है। उन्होंने कहा कि ये टैंक भारत की सीमाओं पर 'लोहे की दीवार' बनकर खड़े हैं और देश की रक्षा नीति की रीढ़ हैं।

परियोजना का विवरण और क्षमता विस्तार

राजनाथ सिंह ने बताया कि इस परियोजना के पूरा होने पर वाहन कारखाना जबलपुर में प्रतिवर्ष 80 टैंकों के नवीनीकरण की अतिरिक्त क्षमता तैयार होगी। इसे भारी वाहन कारखाना (HVF) अवाडी की 150 टैंकों की मौजूदा क्षमता के साथ जोड़ने पर देश की कुल वार्षिक नवीनीकरण क्षमता 230 टैंक प्रतिवर्ष हो जाएगी। रक्षा मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 40 वर्षों में HVF ने भारतीय सेना को लगभग 4,400 टैंकों की आपूर्ति की है।

आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र: आँकड़े जो बोलते हैं

राजनाथ सिंह ने घरेलू रक्षा उत्पादन में आई उल्लेखनीय वृद्धि का हवाला दिया। उनके अनुसार, 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र ₹46,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1 लाख 77 हज़ार करोड़ से अधिक हो चुका है। इसी तरह, रक्षा निर्यात ₹1,000 करोड़ से कम से बढ़कर रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ तक पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब भारत को एक विनिर्माण शक्ति, प्रौद्योगिकी साझेदार और विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में देख रही है।

टैंक बनाम ड्रोन: एकीकृत युद्ध दृष्टिकोण

रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध की जटिलताओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत की रक्षा नीति किसी एक प्लेटफॉर्म को दूसरे का विकल्प नहीं मानती। उन्होंने कहा, 'हमें ड्रोन भी चाहिए, मिसाइल भी चाहिए, तोपखाना भी चाहिए, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध भी चाहिए, ऊर्जा हथियार भी चाहिए और आधुनिकीकरण किए गए टैंक भी चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर यूक्रेन संघर्ष के बाद टैंकों की प्रासंगिकता पर बहस तेज़ हुई है। राजनाथ सिंह ने इस बहस को सिरे से खारिज करते हुए एकीकृत और बहु-आयामी युद्ध क्षमता पर बल दिया।

मध्यप्रदेश में रक्षा विनिर्माण का नया केंद्र

इस परियोजना का महत्व केवल सैन्य क्षमता तक सीमित नहीं है। राजनाथ सिंह ने बताया कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 3,073 हेक्टेयर भूमि पर रक्षा विनिर्माण की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं और ₹16,960 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों के किसानों, मज़दूरों, युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए रोज़गार और समृद्धि के नए द्वार खोलेगी। गौरतलब है कि यह प्रयास मध्यप्रदेश को भारत के अगले प्रमुख रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

युवाओं और स्थानीय प्रतिभा को अवसर

रक्षा मंत्री ने इस परियोजना में स्थानीय तकनीकी कार्यबल और युवाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं में कौशल की कोई कमी नहीं है — आवश्यकता केवल सही अवसर, प्रौद्योगिकी और पारिस्थितिकी तंत्र देने की है। आने वाले समय में जबलपुर की यह सुविधा देश की एकीकृत रक्षा तैयारी को और मज़बूत करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली कसौटी यह है कि नवीनीकृत टैंक आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन-सक्षम दुश्मन के सामने कितने प्रभावी साबित होते हैं। ग्वालियर-चंबल में ₹16,960 करोड़ का प्रस्तावित निवेश मध्यप्रदेश के लिए महत्वाकांक्षी है, लेकिन रक्षा औद्योगिक गलियारों का इतिहास बताता है कि घोषणा और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर चौड़ी होती है — इस पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जबलपुर में टैंक नवीनीकरण परियोजना क्या है?
यह ₹472 करोड़ की परियोजना है जिसका शिलान्यास 27 अगस्त 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। इसके तहत वाहन कारखाना जबलपुर में प्रतिवर्ष 80 टैंकों के नवीनीकरण की अतिरिक्त क्षमता स्थापित की जाएगी।
इस परियोजना के पूरा होने पर भारत की कुल टैंक नवीनीकरण क्षमता कितनी होगी?
परियोजना पूरी होने पर HVF अवाडी की 150 और वाहन कारखाना जबलपुर की 80 क्षमता मिलकर देश की कुल वार्षिक टैंक नवीनीकरण क्षमता 230 टैंक प्रतिवर्ष हो जाएगी। इससे सेना को समय पर और पर्याप्त संख्या में नवीनीकृत टैंक मिल सकेंगे।
राजनाथ सिंह ने टी-72 और टी-90 टैंकों को क्यों ज़रूरी बताया?
राजनाथ सिंह ने कहा कि जमीनी युद्ध में टैंकों की भूमिका समाप्त नहीं हुई, बल्कि विकसित हो रही है। उनके अनुसार ये टैंक भारत की सीमाओं पर 'लोहे की दीवार' की तरह खड़े हैं और ड्रोन व मिसाइलों के साथ मिलकर एकीकृत युद्ध क्षमता का हिस्सा हैं।
भारत के रक्षा उत्पादन और निर्यात में कितनी वृद्धि हुई है?
2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन ₹46,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1 लाख 77 हज़ार करोड़ से अधिक हो गया है। रक्षा निर्यात ₹1,000 करोड़ से कम से बढ़कर रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ तक पहुँच गया है।
मध्यप्रदेश में रक्षा विनिर्माण के लिए क्या योजना है?
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 3,073 हेक्टेयर भूमि पर ₹16,960 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इसका लक्ष्य मध्यप्रदेश को भारत का अगला प्रमुख रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण केंद्र बनाना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले