29 अगस्त 2026
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विशेष संसद सत्र पर विपक्ष का पलटवार: 'राहुल, प्रियंका और अखिलेश के रहते सरकार नहीं होगी कामयाब'

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विशेष संसद सत्र पर विपक्ष का पलटवार: 'राहुल, प्रियंका और अखिलेश के रहते सरकार नहीं होगी कामयाब'

सारांश

सितंबर में संसद के विशेष सत्र की अटकलों ने विपक्ष को एकजुट कर दिया है। पप्पू यादव से लेकर कांग्रेस और झामुमो तक — सभी ने परिसीमन और महिला आरक्षण पर सरकार को घेरा। विपक्ष का साफ संदेश है: बिना जाति जनगणना और विपक्षी संवाद के कोई विधेयक पारित नहीं होगा।

मुख्य बातें

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि राहुल गांधी , प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत पूरे विपक्ष के रहते सरकार अपने मंसूबों में सफल नहीं होगी।
झारखंड कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज राकेश सिन्हा ने माँग की कि सभी 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल 33% महिला आरक्षण लागू किया जाए।
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन के ज़रिए आदिवासियों की आरक्षित सीटें घटाना चाहती है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चेतावनी दी — बिना जाति जनगणना के परिसीमन विधेयक नहीं चलेगा; विरोध सड़क से सर्वोच्च न्यायालय तक होगा।
महिला आरक्षण विधेयक पहले ही संसद से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी पा चुका है, फिर भी क्रियान्वयन अटका है।

संसद के विशेष सत्र की संभावनाओं पर 29 अगस्त को नई दिल्ली में विपक्षी नेताओं ने एकजुट होकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव से लेकर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ताओं तक — सभी ने सितंबर के मध्य में प्रस्तावित विशेष सत्र के एजेंडे पर गहरी आपत्ति जताई। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में लिए बिना एकतरफा कदम उठाना चाहती है।

पप्पू यादव की चेतावनी

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा, 'सरकार परेशान है। इसे देश के भविष्य से मतलब नहीं है। महंगाई चरम पर पहुँच चुकी है। यह महिलाओं को सबसे अधिक परेशान कर रही है। महिलाओं का सम्मान सरकार की संस्कृति में नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि जेन-जी से किए वादों पर सरकार पीछे हट गई और किसानों के साथ भी यही व्यवहार हुआ — एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) लागू करने की आज तक कोई कोशिश नहीं हुई।

यादव ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक तीन साल पहले संसद से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी भी पा चुका है, फिर भी सरकार इसे लागू करने के प्रति गंभीर नहीं है। उनके अनुसार, 'सरकार कंगना रनौत जैसी महिलाओं के लिए विधेयक लाना चाहती है — गाँव के किसान, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों की बेटियों-माताओं के लिए उनके बिल का कोई औचित्य नहीं है।'

परिसीमन के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि सरकार को पहले विपक्ष के साथ संवाद करना चाहिए, क्योंकि यह देश सिर्फ सत्तापक्ष का नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 'ईडी-सीबीआई का डर दिखाकर और साम-दाम-दंड-भेद अपनाकर' विधेयक पारित कराना चाहती है। यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'इस जन्म में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत पूरे विपक्ष के रहते हुए सरकार अपने मंसूबों में कभी सफल नहीं होगी।'

कांग्रेस की माँग — अभी और तुरंत लागू हो आरक्षण

झारखंड कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज राकेश सिन्हा ने सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण विधेयक संसद से पारित हो चुका है, तो सरकार कौन-सा नया विधेयक लाने की बात कर रही है। उन्होंने माँग की कि सभी 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए — 'आज से, इसी दिन से, इसी पल से।' सिन्हा ने यह भी कहा कि परिसीमन के ज़रिए सरकार मामलों को उलझाना चाहती है और इससे दक्षिण भारत के अलावा अन्य राज्यों को भी नुकसान होगा।

झामुमो का आरोप — आदिवासियों की पहचान मिटाने की साज़िश

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा आरक्षित सीटों की संख्या घटाकर उनकी पहचान मिटाने की है। उन्होंने कहा, 'पूरे भारत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) यही कर रही है। यह आदिवासियों को दोयम दर्जे का नागरिक समझती है।' पांडे ने कहा कि आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग के लोग इस मुद्दे पर एकजुट हैं।

कांग्रेस का अल्टीमेटम — सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने स्पष्ट किया कि बिना जाति जनगणना के परिसीमन विधेयक पारित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर BJP लोकतंत्र को कमज़ोर करने और तानाशाही लाने की कोशिश करती है, तो विपक्ष 'सड़कों से सदन और सदन से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक' इसका विरोध करेगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि विशेष सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव अपरिहार्य दिख रहा है।

आगे क्या होगा

सरकार ने अभी तक विशेष सत्र के एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह ऐसे समय में आया है जब परिसीमन, महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और जाति जनगणना — तीनों मुद्दे एक साथ राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो चुके हैं। विपक्षी एकता की यह प्रदर्शनी संकेत देती है कि विशेष सत्र, यदि बुलाया गया, तो संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह तीव्र विरोध का सामना करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सड़क पर उतरने की ताकत में बदलेगी या महज़ बयानबाज़ी बनकर रह जाएगी। परिसीमन और महिला आरक्षण — दोनों मुद्दों पर विपक्ष की माँगें जायज़ हैं, लेकिन उसकी अपनी आंतरिक एकता की परीक्षा तब होगी जब सत्र में मतदान की नौबत आएगी। गौरतलब है कि महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष ने खुद सहमति दी थी, अब उसके क्रियान्वयन की माँग करना नैतिक रूप से सही है — लेकिन जाति जनगणना की शर्त जोड़ना इसे राजनीतिक सौदेबाज़ी का हिस्सा बना देता है। सरकार को भी यह समझना होगा कि बिना व्यापक संवाद के लाए गए विधेयक संसद में नहीं, अदालतों में उलझेंगे।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संसद का विशेष सत्र सितंबर में क्यों बुलाया जा सकता है?
कथित तौर पर सरकार सितंबर के मध्य में एक विशेष संसद सत्र बुलाने पर विचार कर रही है, जिसमें परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक लाए जा सकते हैं। हालाँकि सरकार ने अभी तक एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पप्पू यादव ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ईडी-सीबीआई का डर दिखाकर और साम-दाम-दंड-भेद अपनाकर विधेयक पारित कराना चाहती है। उन्होंने महंगाई, एमएसपी न लागू होने और महिलाओं के प्रति सरकार की उदासीनता को भी मुद्दा बनाया।
महिला आरक्षण विधेयक पहले से पारित है, तो विवाद क्यों है?
महिला आरक्षण विधेयक संसद से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी पा चुका है, लेकिन इसका क्रियान्वयन परिसीमन से जोड़ा गया है। विपक्ष की माँग है कि बिना परिसीमन की प्रतीक्षा किए सभी 543 सीटों पर तत्काल 33% आरक्षण लागू किया जाए।
परिसीमन पर विपक्ष की क्या आपत्ति है?
विपक्ष का कहना है कि बिना जाति जनगणना के परिसीमन से आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की आरक्षित सीटें घट सकती हैं। झामुमो और कांग्रेस दोनों ने आरोप लगाया है कि इससे दक्षिण भारत सहित कई राज्यों को नुकसान होगा।
कांग्रेस ने विशेष सत्र में क्या रणनीति अपनाने की बात कही है?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा है कि पार्टी 'सड़कों से सदन और सदन से सर्वोच्च न्यायालय तक' विरोध करेगी। पार्टी ने स्पष्ट किया कि जाति जनगणना के बिना परिसीमन विधेयक पारित नहीं होने दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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