विशेष संसद सत्र पर विपक्ष का पलटवार: 'राहुल, प्रियंका और अखिलेश के रहते सरकार नहीं होगी कामयाब'
सारांश
मुख्य बातें
संसद के विशेष सत्र की संभावनाओं पर 29 अगस्त को नई दिल्ली में विपक्षी नेताओं ने एकजुट होकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव से लेकर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ताओं तक — सभी ने सितंबर के मध्य में प्रस्तावित विशेष सत्र के एजेंडे पर गहरी आपत्ति जताई। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में लिए बिना एकतरफा कदम उठाना चाहती है।
पप्पू यादव की चेतावनी
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा, 'सरकार परेशान है। इसे देश के भविष्य से मतलब नहीं है। महंगाई चरम पर पहुँच चुकी है। यह महिलाओं को सबसे अधिक परेशान कर रही है। महिलाओं का सम्मान सरकार की संस्कृति में नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि जेन-जी से किए वादों पर सरकार पीछे हट गई और किसानों के साथ भी यही व्यवहार हुआ — एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) लागू करने की आज तक कोई कोशिश नहीं हुई।
यादव ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक तीन साल पहले संसद से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी भी पा चुका है, फिर भी सरकार इसे लागू करने के प्रति गंभीर नहीं है। उनके अनुसार, 'सरकार कंगना रनौत जैसी महिलाओं के लिए विधेयक लाना चाहती है — गाँव के किसान, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों की बेटियों-माताओं के लिए उनके बिल का कोई औचित्य नहीं है।'
परिसीमन के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि सरकार को पहले विपक्ष के साथ संवाद करना चाहिए, क्योंकि यह देश सिर्फ सत्तापक्ष का नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 'ईडी-सीबीआई का डर दिखाकर और साम-दाम-दंड-भेद अपनाकर' विधेयक पारित कराना चाहती है। यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'इस जन्म में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत पूरे विपक्ष के रहते हुए सरकार अपने मंसूबों में कभी सफल नहीं होगी।'
कांग्रेस की माँग — अभी और तुरंत लागू हो आरक्षण
झारखंड कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज राकेश सिन्हा ने सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण विधेयक संसद से पारित हो चुका है, तो सरकार कौन-सा नया विधेयक लाने की बात कर रही है। उन्होंने माँग की कि सभी 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए — 'आज से, इसी दिन से, इसी पल से।' सिन्हा ने यह भी कहा कि परिसीमन के ज़रिए सरकार मामलों को उलझाना चाहती है और इससे दक्षिण भारत के अलावा अन्य राज्यों को भी नुकसान होगा।
झामुमो का आरोप — आदिवासियों की पहचान मिटाने की साज़िश
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा आरक्षित सीटों की संख्या घटाकर उनकी पहचान मिटाने की है। उन्होंने कहा, 'पूरे भारत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) यही कर रही है। यह आदिवासियों को दोयम दर्जे का नागरिक समझती है।' पांडे ने कहा कि आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग के लोग इस मुद्दे पर एकजुट हैं।
कांग्रेस का अल्टीमेटम — सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने स्पष्ट किया कि बिना जाति जनगणना के परिसीमन विधेयक पारित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर BJP लोकतंत्र को कमज़ोर करने और तानाशाही लाने की कोशिश करती है, तो विपक्ष 'सड़कों से सदन और सदन से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक' इसका विरोध करेगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि विशेष सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव अपरिहार्य दिख रहा है।
आगे क्या होगा
सरकार ने अभी तक विशेष सत्र के एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह ऐसे समय में आया है जब परिसीमन, महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और जाति जनगणना — तीनों मुद्दे एक साथ राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो चुके हैं। विपक्षी एकता की यह प्रदर्शनी संकेत देती है कि विशेष सत्र, यदि बुलाया गया, तो संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह तीव्र विरोध का सामना करेगा।