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महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की रणनीति: अखिलेश यादव

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महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की रणनीति: अखिलेश यादव

सारांश

महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। अखिलेश यादव ने परिसीमन के पीछे की मंशा को लेकर सवाल उठाए। जानिए, इस राजनीतिक खेल का सच क्या है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
अखिलेश यादव ने परिसीमन को लेकर सवाल उठाए।
डिंपल यादव ने महिलाओं की सदन में उपस्थिति को महत्वपूर्ण बताया।
कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए।
परिसीमन का असर संवैधानिक ढांचे पर पड़ सकता है।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित विशेष सत्र में विपक्ष के नेताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखे प्रहार किए।

समाजवादी पार्टी के सांसद एवं अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, "भारतीय जनता पार्टी के निर्णयों को समझना बेहद कठिन है। जब उन्होंने कहा कि एसआईआर होगा और वोटरों के नाम हटाए जाने से रोका जाएगा, उस समय एसआईआर की आड़ में एनआरसी लागू किया जा रहा था। अब महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन किया जा रहा है।"

अखिलेश ने आगे कहा, "हम 'डबल-इंजन सरकार' के मॉडल के तहत उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन-डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात कर रहे हैं। फिर भी, नोएडा में न्यूनतम मजदूरी देश में सबसे कम में से एक है। इस समस्या को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? मजदूरों की मजदूरी क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है? इसे कौन रोक रहा है? इसका मतलब है कि आप कुछ विशेष लोगों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और केवल उन्हें लाभ पहुंचाना चाहते हैं।"

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, "हम जानते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि महिलाएं सदन में आकर बैठें। लेकिन हाथी के दांत दिखाने के कुछ और होते हैं और खाने के कुछ और। ठीक इसी तरह, सरकार कुछ और कर रही है, लेकिन दिखा कुछ और रही है।"

कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा, "मौजूदा भ्रम के माहौल में, ऐसा लगता है कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए काम कर रही है। अगर हम महिला आरक्षण बिल की बात करें, जैसा कि हमारी नेता प्रियंका गांधी ने सदन में स्पष्ट रूप से कहा था, अगर आपकी नीयत साफ है और आप वास्तव में इसे लागू करना चाहते हैं, तो आपके पास पूरी विपक्ष और कांग्रेस पार्टी का समर्थन है। आप मौजूदा 543 सीटों के भीतर एक-तिहाई आरक्षण लागू कर सकते हैं, तो फिर समस्या क्या है?"

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "परिसीमन देश की संवैधानिक संरचना और केंद्र तथा राज्यों के बीच संबंधों पर असर डालेगा। जिस तरह से परिसीमन को आगे बढ़ाया जा रहा है, इसका विकृत रूप कश्मीर और असम के मुद्दों में देखने को मिला है, यह गंभीर चिंताएं पैदा करता है। इसके बाद, जो भी वास्तव में भारत माता से प्रेम करता है, उसके लिए इस सरकार पर भरोसा करना मुश्किल हो जाएगा।"

प्रमोद तिवारी ने कहा, "हमारा कहना है कि 2023 में पारित अधिसूचना के अनुसार, मौजूदा लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को मंजूरी दी गई थी। हम चाहते थे कि इसे 2024 से लागू किया जाए, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। मौजूदा स्थिति के मद्देनजर, जब इसे पहले ही लागू किया जा चुका है, तो इसे फिर से क्यों लाया गया है?"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट होता है कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक उपकरण बन गया है, जो जनता की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का कार्य कर रहा है। विपक्ष ने सही समय पर मुद्दे को उठाया है, जो कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
महिला आरक्षण बिल का मुख्य उद्देश्य संसद और विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई सीटें आरक्षित करना है।
अखिलेश यादव का क्या आरोप है?
अखिलेश यादव का आरोप है कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन कर रही है।
क्या महिला आरक्षण से महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा?
यदि सही ढंग से लागू किया जाए, तो महिला आरक्षण से महिलाओं की स्थिति में सुधार हो सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है महिला आरक्षण?
महिला आरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महिलाओं को राजनीतिक निर्णय लेने में भागीदार बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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