महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल, जनगणना से पहले परिसीमन की मांग
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करना है।
- विपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं।
- कई सांसदों ने इस बिल पर जनगणना और परिसीमन की आवश्यकता की बात की है।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण बिल और प्रस्तावित परिसीमन पर संसद में सियासी विवाद बढ़ गया है। जहां सरकार इसे ऐतिहासिक कदम मानती है, वहीं विपक्ष ने इसके समय, प्रक्रिया और प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने महिला आरक्षण कानून पर कहा, "सरकार की मंशा पर सवाल उठता है, क्योंकि जब यह बिल पास हुआ था, तब कहा गया था कि पहले जनगणना होगी और फिर परिसीमन होगा। लेकिन अब पहले चरण को नजरअंदाज किया जा रहा है। हमारी मांग है कि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण मिले।"
उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन पर कहा, "छोटे राज्यों का वर्चस्व घटेगा, जो उनकी भूमिका को प्रभावित करेगा।"
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उन्होंने कहा कि भाजपा ने संसद में महिलाओं से बात नहीं की और इस समय चुनाव चल रहे हैं। इससे यह स्पष्ट है कि जल्दबाजी क्यों है?
जेएमएम की सांसद महुआ मांझी ने कहा, "हम सभी विपक्षी दल इस बिल का समर्थन करते हैं, लेकिन समय को लेकर सवाल उठते हैं।"
सीपीआई (एम) की नेता वृंदा करात ने कहा, "महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से अलग करना चाहिए और यह मौजूदा जनगणना के आधार पर होना चाहिए।"