सरकार एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं की भागीदारी को समाप्त करने की कोशिश कर रही है: पप्पू यादव
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।
- सरकार पर पप्पू यादव और प्रमोद तिवारी ने तीखा हमला किया।
- सामाजिक न्याय के मुद्दे पर उठाए गए सवाल।
- महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा आवश्यक है।
- राजीव गांधी का योगदान महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव और कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने सरकार पर तीखा आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतंत्र और संविधान की विजय बताते हुए महिला आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाए।
सांसद पप्पू यादव ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा, "कांग्रेस और सभी विपक्षी दलों ने देश के लोकतंत्र की रक्षा की है। संविधान की सुरक्षा की है। गरीब, सामान्य वर्ग की महिलाओं और एससी, एसटी, ओबीसी महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित किया है। ये लोग इसे हमेशा के लिए समाप्त करना चाहते थे। विपक्ष ने उनकी राजनीतिक स्वतंत्रता की रक्षा की।"
उन्होंने आगे कहा, "इन लोगों ने कितना नाटक किया है? 2023 में सभी दलों ने महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा की। महिलाओं को वोट देने का अधिकार किसने दिया? सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए किन्होंने प्रयास किए? महिलाओं के लिए स्कॉलरशिप, पेंशन, इंदिरा आवास, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन किसने उपलब्ध कराई? मनरेगा, स्वास्थ्य का अधिकार, और भोजन का अधिकार किसने दिया? पंचायती राज में महिला सशक्तीकरण को लागू किसने किया? कानून किसने लाया? आज पंचायती राज व्यवस्था में अधिकतर महिलाएं किसके कारण हैं? राजीव गांधी के कारण। महिलाओं की प्रगति में इनका योगदान क्या है?"
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने राष्ट्र प्रेस से कहा, "मैं स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आपकी पार्टी धोखा दे रही है। महिला आरक्षण के नाम पर आप भारत के संविधान और संघीय ढांचे को समाप्त कर रहे हैं। जनता को भी इसके बारे में जानकारी हो रही है, इसलिए अब इनके बहकावे में कोई नहीं आने वाला है।"
उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन पर कहा, "प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि 50 प्रतिशत सीटें बढ़ जाएंगी। मैं चुनौती देता हूं कि अपने विधेयक में वह लाइन दिखाएं जिसमें लिखा है कि हर विधानसभा की 50 प्रतिशत सीटें बढ़ेंगी। सभी दलों ने आपको लिखित में अनुरोध किया था कि तमिलनाडु और बंगाल में चुनाव चल रहे हैं। इस बैठक को 10 दिन बाद बुलाएं। प्रमोद तिवारी ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा का सत्र आपने क्यों बुलाया, सिर्फ चुनावी स्टंट के लिए, क्योंकि हम तो 2023 में ही महिला आरक्षण विधेयक को समर्थन दे चुके हैं।