वंदे मातरम बिल: अमित शाह आज राज्यसभा में पेश करेंगे, अपमान पर 3 साल की जेल का प्रावधान
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार, 19 जुलाई 2026 को राज्यसभा में वंदे मातरम बिल पेश करेंगे। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को वही कानूनी संरक्षण देना है जो अभी तक केवल राष्ट्रीय गान जन गण मन को प्राप्त है।
बिल में क्या है
प्रस्तावित विधेयक राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम में संशोधन करेगा। यदि यह बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाता है, तो वंदे मातरम का जानबूझकर अपमान करना, उसे गाने से रोकना या उसमें रुकावट डालना एक दंडनीय अपराध बन जाएगा।
प्रस्तावित दंड के अनुसार, दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं — ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रीय गान के अपमान पर अभी कानून में प्रावधान है।
मौजूदा कानून से क्या अंतर होगा
वर्तमान में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के तहत जन गण मन के गायन के दौरान खड़े रहना अनिवार्य है और उसमें रुकावट डालना दंडनीय है। वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता प्राप्त होने के बावजूद उसे यह कानूनी दर्जा नहीं दिया गया था।
प्रस्तावित संशोधन इस असमानता को समाप्त करेगा और वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के समकक्ष कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा।
गृह मंत्रालय का पूर्व निर्देश
यह विधायी कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के 9 जुलाई को जारी उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें सभी राज्यों को कहा गया था कि सरकारी कार्यक्रमों में जब भी जन गण मन गाया जाए, उससे पहले वंदे मातरम अवश्य बजाया जाए। यह निर्देश इस बिल की वैचारिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट करता है।
आगे क्या होगा
इस प्रस्तावित संशोधन पर संसद के चल रहे मानसून सत्र में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। बिल के राज्यसभा में पेश होने के बाद इसे लोकसभा से भी पारित कराना होगा, तभी यह कानून का रूप ले सकेगा।