17 जुलाई 2026
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वंदे मातरम बिल को सर्वसम्मति से पारित करें, राष्ट्र सम्मान से ऊपर नहीं राजनीति: शिवशरणप्पा वाली

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वंदे मातरम बिल को सर्वसम्मति से पारित करें, राष्ट्र सम्मान से ऊपर नहीं राजनीति: शिवशरणप्पा वाली

सारांश

वंदे मातरम बिल सिर्फ एक विधेयक नहीं — यह राष्ट्रीय स्वाभिमान की परीक्षा है। सरदार वल्लभभाई पटेल प्रतिष्ठान के अध्यक्ष शिवशरणप्पा वाली ने सभी दलों से पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर 20 जुलाई से शुरू संसद सत्र में इसे सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की है।

मुख्य बातें

सरदार वल्लभभाई पटेल प्रतिष्ठान के अध्यक्ष शिवशरणप्पा वाली ने 17 जुलाई 2026 को बीदर से 'वंदे मातरम बिल' को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की।
प्रस्तावित विधेयक 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र में लाया जा सकता है, जो राष्ट्रगीत के अपमान पर दंडात्मक प्रावधान करेगा।
वाली ने कांग्रेस, BJP, JDS, समाजवादी पार्टी सहित सभी दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन देने का आग्रह किया।
कांग्रेस से विशेष अपेक्षा — वाली के अनुसार एक प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी की जिम्मेदारी अधिक है।
वाली ने कहा कि विरोध करने वाले दलों का नाम इतिहास में दर्ज होगा, लेकिन विधेयक फिर भी पारित होगा।

सरदार वल्लभभाई पटेल प्रतिष्ठान के अध्यक्ष शिवशरणप्पा वाली ने 17 जुलाई 2026 को बीदर में संसद के आगामी सत्र में प्रस्तावित 'वंदे मातरम बिल' को सभी राजनीतिक दलों द्वारा सर्वसम्मति से पारित किए जाने की जोरदार अपील की। उनका कहना है कि यह विधेयक किसी एक पार्टी, जाति या पंथ का मुद्दा नहीं, बल्कि समूचे राष्ट्र के सम्मान और स्वाभिमान का प्रश्न है।

विधेयक की पृष्ठभूमि और प्रस्तावित प्रावधान

वाली ने बताया कि 'वंदे मातरम' स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों की प्रेरणाशक्ति रहा है और इसी उद्घोष के साथ स्वतंत्रता सेनानियों ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी। उनके अनुसार, आज़ादी के बाद से इस राष्ट्रगीत के सम्मान में धीरे-धीरे कमी आई और इसके अपमान तथा इसमें बाधा डालने की घटनाएँ सामने आती रहीं, परंतु इस दिशा में कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संसद के 20 जुलाई से शुरू होने वाले सत्र में एक विशेष विधेयक लाया जा सकता है, जो 'वंदे मातरम' के मान-सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करे और इसका अपमान करने अथवा इसमें बाधा डालने वालों के विरुद्ध दंडात्मक प्रावधान करे। वाली ने इस संभावित पहल का स्वागत करते हुए इसे पूरे देश के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।

दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील

वाली ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक को किसी भी राजनीतिक दल के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) हो, भारतीय जनता पार्टी (BJP) हो, जनता दल (सेक्युलर) (JDS) हो, समाजवादी पार्टी हो या कोई अन्य दल — 'वंदे मातरम' किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का गीत है।

उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे सिर ऊँचा करके इसका सम्मान करें और संसद में इस विधेयक को एकमत से पारित करें। वाली ने यह भी कहा कि यदि इस विधेयक का विरोध किया जाता है, तो इतिहास में यह दर्ज हो जाएगा कि किन नेताओं और किन राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया।

कांग्रेस से विशेष अपेक्षा

शिवशरणप्पा वाली ने विशेष रूप से कांग्रेस का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की एक प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते उसकी जिम्मेदारी अधिक है। उनका मानना है कि यदि कांग्रेस और उसके नेता इस विधेयक का समर्थन करते हैं, तो यह राष्ट्रीय एकता का सकारात्मक संदेश होगा और इतिहास में भी इसे याद रखा जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति और चुनाव के लिए कई अवसर होते हैं, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के प्रश्न पर दलगत राजनीति नहीं होनी चाहिए।

केंद्र सरकार को धन्यवाद, सर्वदलीय श्रेय की उम्मीद

वाली ने केंद्र सरकार को इस तरह का विधेयक लाने की घोषणा के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इस पहल का श्रेय सभी दलों को मिलना चाहिए, बशर्ते वे राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए इसका समर्थन करें। उन्होंने दावा किया कि यदि कुछ लोग विरोध भी करते हैं, तब भी विधेयक पारित हो जाएगा, लेकिन उसका राजनीतिक और सार्वजनिक संदेश अलग होगा।

यह विधेयक ऐसे समय में प्रस्तावित है जब राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर देश में व्यापक बहस चल रही है। संसद सत्र 20 जुलाई से शुरू होने के साथ ही इस प्रस्तावित कानून की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संसद सत्र से ठीक पहले उठाना राजनीतिक समय-चयन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। असली सवाल यह है कि क्या यह विधेयक केवल प्रतीकात्मक रहेगा या इसमें स्पष्ट, न्यायसंगत और दुरुपयोग-रोधी प्रावधान होंगे — क्योंकि 'अपमान' की परिभाषा जितनी व्यापक होगी, उतना ही इसके दुरुपयोग का जोखिम बढ़ेगा। कांग्रेस पर विशेष दबाव बनाने की रणनीति यह भी संकेत देती है कि विधेयक को राष्ट्रवादी एजेंडे के रूप में फ्रेम किया जा रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि अभी तक विधेयक का मसौदा सार्वजनिक नहीं हुआ है — बिना मसौदे के समर्थन या विरोध दोनों ही अधूरे हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम बिल क्या है?
वंदे मातरम बिल एक प्रस्तावित विशेष विधेयक है जो राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के सम्मान की रक्षा करेगा और इसका अपमान करने या इसमें बाधा डालने वालों के विरुद्ध दंडात्मक प्रावधान करेगा। यह विधेयक 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले संसद सत्र में लाया जा सकता है।
शिवशरणप्पा वाली कौन हैं और उन्होंने यह अपील क्यों की?
शिवशरणप्पा वाली सरदार वल्लभभाई पटेल प्रतिष्ठान के अध्यक्ष हैं। उन्होंने 17 जुलाई 2026 को बीदर में यह अपील इसलिए की क्योंकि वे चाहते हैं कि सभी राजनीतिक दल दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करें।
इस विधेयक पर कांग्रेस का क्या रुख है?
अभी तक कांग्रेस ने इस विधेयक पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। शिवशरणप्पा वाली ने विशेष रूप से कांग्रेस से अपील की है कि एक प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते उसकी जिम्मेदारी अधिक है और उसे इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए।
वंदे मातरम बिल संसद में कब पेश होगा?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह विधेयक 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले संसद सत्र में पेश किया जा सकता है। हालाँकि अभी तक इसका आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक नहीं हुआ है।
क्या वंदे मातरम के अपमान पर पहले से कोई कानून है?
वर्तमान में 'वंदे मातरम' के अपमान के लिए कोई विशेष दंडात्मक कानून नहीं है। शिवशरणप्पा वाली के अनुसार, आज़ादी के बाद से इस राष्ट्रगीत के सम्मान में कमी आई और अपमान की घटनाएँ होती रहीं, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कानूनी कदम नहीं उठाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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