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परिसीमन बिल पर विपक्ष से पहले बात करे सरकार: कांग्रेस सांसद तारिक अनवर का केंद्र पर हमला

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परिसीमन बिल पर विपक्ष से पहले बात करे सरकार: कांग्रेस सांसद तारिक अनवर का केंद्र पर हमला

सारांश

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने परिसीमन बिल को 'अलोकतांत्रिक' करार देते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला। खड़गे के पीएम मोदी को लिखे पत्र के बाद अनवर ने साफ कहा — बिल लाने से पहले विपक्ष से बात करे सरकार, वरना INDIA गठबंधन मिलकर करेगा विरोध।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परिसीमन बिल पर पत्र लिखा।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने माँग की कि बिल लाने से पहले सरकार विपक्षी दलों से अनिवार्य रूप से बातचीत करे।
अनवर ने आरोप लगाया कि असम और जम्मू-कश्मीर के परिसीमन की तर्ज पर यह बिल केंद्र को 20 वर्षों तक राजनीतिक नियंत्रण देगा।
पश्चिम बंगाल SIR मामले में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का स्वागत करते हुए अनवर ने कहा कि चुनाव आयोग को नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं।
जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के वादे पर सरकार से जवाब माँगा।
INDIA गठबंधन के एकजुट होकर परिसीमन बिल का विरोध करने का संकेत।

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने 17 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि परिसीमन विधेयक लाने से पहले सरकार को विपक्षी दलों के साथ अनिवार्य रूप से विचार-विमर्श करना चाहिए। यह प्रतिक्रिया कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र के बाद आई, जिसमें परिसीमन बिल को देश की चुनावी व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।

परिसीमन बिल पर कांग्रेस का रुख

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने स्पष्ट किया कि खड़गे ने इस विधेयक को अत्यंत संवेदनशील मुद्दा करार दिया है। उन्होंने कहा, 'अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन खड़गे जी ने कहा है कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है और देश की पूरी चुनावी व्यवस्था से जुड़ा है। ऐसे में अगर सरकार यह बिल लाना चाहती है, तो उसे पहले विपक्ष, विपक्षी नेताओं और राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करनी चाहिए।'

अनवर ने लोकतांत्रिक परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि जब भी कोई बड़ा संशोधन या महत्वपूर्ण विधेयक लाया जाता है, तो सरकार का दायित्व है कि वह विपक्ष को विश्वास में ले। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में यह परंपरा बरकरार रखी गई थी, किंतु मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से इसका लगातार उल्लंघन हो रहा है।

असम और जम्मू-कश्मीर परिसीमन पर गंभीर सवाल

अनवर ने असम और जम्मू-कश्मीर में हुए परिसीमन का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि इस विधेयक के माध्यम से केंद्र सरकार आने वाले 20 वर्षों तक देश की राजनीतिक व्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। उन्होंने INDIA गठबंधन के एकजुट विरोध का भरोसा दिलाते हुए कहा, 'हमारी पूरी कोशिश यही होगी कि इंडी गठबंधन बना रहे। हमें उम्मीद है कि हमारे साथ जुड़ी सभी पार्टियाँ कम से कम इस मुद्दे पर हमारे साथ खड़ी होंगी और हम सब मिलकर इसका विरोध करेंगे। सरकार का यह रवैया अलोकतांत्रिक है।'

पश्चिम बंगाल SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत

पश्चिम बंगाल के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का अनवर ने स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है, क्योंकि इसने एक तरह से SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग की दलील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग के पास नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है। यही सच्चाई है और संवैधानिक ढाँचा भी यही कहता है।'

जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग

जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के सवाल पर अनवर ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'जब अनुच्छेद 370 हटाया गया और जम्मू-कश्मीर से पूर्ण राज्य का दर्जा छीन लिया गया, तो प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और पूरी सरकार ने वादा किया था कि जल्द ही पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा।' उन्होंने आरोप लगाया कि इतने वर्ष बीत जाने के बावजूद इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और कश्मीर की जनता के अधिकारों को छीनने की कोशिश जारी है।

कोलकाता एयरपोर्ट मस्जिद विवाद पर प्रतिक्रिया

कोलकाता एयरपोर्ट के पास मस्जिद विवाद पर अनवर ने कहा कि भारत आस्था का देश है और यहाँ हर नागरिक किसी न किसी धर्म से जुड़ा है। उनके अनुसार, यदि मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना है, तो संबंधित समुदाय को विश्वास में लेना आवश्यक है। आने वाले दिनों में परिसीमन विधेयक पर संसद और सड़क — दोनों स्तरों पर विपक्ष की रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का दीर्घकालिक चुनावी प्रभाव एक वास्तविक संवैधानिक प्रश्न है। मोदी सरकार पर बिना विपक्ष की सहमति के बड़े विधायी कदम उठाने के आरोप नए नहीं हैं — लेकिन जब मुद्दा देश की चुनावी संरचना से जुड़ा हो, तो परामर्श की अनदेखी लोकतांत्रिक वैधता पर सवाल खड़े करती है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिसीमन बिल क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
परिसीमन बिल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण से संबंधित प्रस्तावित विधेयक है, जो सीधे देश की चुनावी संरचना को प्रभावित करता है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार बिना उनसे परामर्श किए यह बिल लाना चाहती है, जो लोकतांत्रिक परंपरा के विरुद्ध है।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने पीएम मोदी को पत्र क्यों लिखा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने परिसीमन बिल को देश की पूरी चुनावी व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। उनकी माँग है कि इस विधेयक पर विपक्षी दलों और नेताओं के साथ पहले विस्तृत चर्चा की जाए।
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा कब मिलेगा?
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर के अनुसार, अनुच्छेद 370 हटाते समय प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और सरकार ने जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था, लेकिन कई वर्ष बीतने के बावजूद अभी तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
पश्चिम बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने SIR प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने इस फैसले को स्वागत योग्य बताया और कहा कि यह संवैधानिक ढाँचे के अनुरूप है।
INDIA गठबंधन परिसीमन बिल पर क्या रणनीति अपनाएगा?
तारिक अनवर ने संकेत दिया कि INDIA गठबंधन की सभी सहयोगी पार्टियाँ परिसीमन बिल के विरोध में एकजुट होंगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन को बनाए रखना प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर सामूहिक विरोध की रणनीति बनाई जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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