खड़गे का PM मोदी को पत्र: परिसीमन संशोधन विधेयक पर मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आगामी मानसून सत्र में संसद के पटल पर रखे जाने से पूर्व सरकार के परिसीमन संबंधी संशोधित विधेयकों पर विचार-विमर्श के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब मीडिया रिपोर्टों में संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र सरकार संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 का संशोधित रूप मानसून सत्र में पुनः प्रस्तुत करने की तैयारी में है।
पत्र की पृष्ठभूमि और पुराने अनुरोध
खड़गे ने अपने पत्र में स्मरण दिलाया कि मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री को कई बार पत्र लिखकर परिसीमन प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक का अनुरोध किया था। उनके अनुसार, वे सभी अनुरोध स्वीकार नहीं किए गए। खड़गे ने लिखा, 'दुर्भाग्यवश, मेरे अनुरोधों को स्वीकार नहीं किया गया।'
अप्रैल में विधेयक की विफलता
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 संवैधानिक रूप से अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा। इसी के साथ परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 भी अपेक्षित समर्थन न मिलने के कारण पारित नहीं हो सके। खड़गे का तर्क है कि सर्वदलीय सहमति के बिना इस प्रकार के संवैधानिक विधेयकों को आगे बढ़ाने का प्रयास इसी परिणाम की ओर ले जाता है।
विधेयक का उद्देश्य और महत्त्व
प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं — लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाना, लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि करना, और 1976 के बाद पहली बार राज्यों के बीच संसदीय सीटों का पुनर्वितरण करने वाले राष्ट्रव्यापी परिसीमन अभ्यास की नींव रखना। गौरतलब है कि यह पाँच दशकों में पहला ऐसा व्यापक परिसीमन होगा, जो देश के राजनीतिक मानचित्र को बुनियादी रूप से बदल सकता है।
खड़गे की मांग और विपक्ष का रुख
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और सभी राजनीतिक दलों को संशोधित प्रस्तावों का विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। यह पत्र कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश द्वारा साझा किया गया और कांग्रेस पार्टी ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी पोस्ट किया।
आगे क्या होगा
मानसून सत्र में यदि सरकार संशोधित विधेयक पुनः पेश करती है, तो उसे फिर से दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी — एक ऐसी बाधा जो अप्रैल में पार नहीं की जा सकी। विपक्ष की एकजुटता और सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या बल पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। सर्वदलीय बैठक की मांग को स्वीकार या अस्वीकार करने का सरकार का निर्णय संसद में इस विधेयक की राजनीतिक दिशा तय करेगा।