मॉनसून सत्र से पहले भाजपा सांसद मनोज तिग्गा की अपील — राष्ट्रीय हित पर विपक्ष राजनीति छोड़े
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद मनोज तिग्गा ने 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में संसद के आगामी मॉनसून सत्र की पूर्व संध्या पर विपक्षी दलों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय महत्व के विधेयकों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सरकार का साथ दें। तिग्गा ने परिसीमन विधेयक, पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण विवाद, पश्चिम मिदनापुर के यौन उत्पीड़न मामले और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 'शहीद दिवस' सहित कई मुद्दों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी।
मॉनसून सत्र और विधायी सहयोग
तिग्गा ने कहा कि केंद्र सरकार जो भी विधेयक संसद में प्रस्तुत करती है, उसका मूल उद्देश्य देश और आम जनता का हित होता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सदन में आने वाले विधेयकों को सभी सांसदों के सहयोग से पारित किया जाएगा। उनके अनुसार, संसद लोकतांत्रिक विमर्श का सर्वोच्च मंच है और देशहित के विधेयकों को व्यापक समर्थन मिलना ही लोकतंत्र की सच्ची भावना है।
परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने आरोप लगाया था कि भाजपा परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP — शरद पवार गुट) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) जैसे दलों का समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है। इस पर तिग्गा ने कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल देशहित में किसी विधेयक का समर्थन करता है, तो उसमें आपत्ति का कोई कारण नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी एक प्रभावशाली नेता बताया और कहा कि राष्ट्रीय हित को केंद्र में रखकर बनी सहमति का स्वागत होना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण विवाद
पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर तिग्गा ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने बिना उचित सर्वेक्षण के कुछ वर्गों को ओबीसी सूची में शामिल किया, जिससे पात्रता को लेकर विवाद खड़ा हुआ। उनका कहना था कि भविष्य में जो भी निर्णय हो, वह पूरी प्रक्रिया और आवश्यक विचार-विमर्श के आधार पर होना चाहिए ताकि वास्तविक पात्र लोगों को उनका हक मिल सके।
पश्चिम मिदनापुर यौन उत्पीड़न मामला
पश्चिम मिदनापुर में पहली कक्षा के एक छात्र के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना पर विपक्ष द्वारा सरकारी कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने के संदर्भ में तिग्गा ने स्पष्ट कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराधी का कोई धर्म या जाति नहीं होती और दोषी को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है।
TMC का 'शहीद दिवस' और अमित शाह से मुलाकात
21 जुलाई को मनाए जाने वाले तृणमूल कांग्रेस के 'शहीद दिवस' कार्यक्रम पर तिग्गा ने कहा कि पार्टी के आंतरिक मामलों पर निर्णय TMC को स्वयं करना है — भाजपा का इससे कोई सरोकार नहीं। वहीं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ शिवसेना सांसदों की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि शाह देश के गृह मंत्री हैं और किसी भी दल के जनप्रतिनिधि उनसे मिल सकते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में केंद्रीय मंत्रियों से मिलना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि मॉनसून सत्र से पहले इस तरह की बयानबाजी संसदीय रणनीति का हिस्सा मानी जाती है। आने वाले सत्र में परिसीमन विधेयक समेत कई अहम विधेयकों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की संभावना है।