15 जुलाई 2026
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बिदादी टाउनशिप: सीएम शिवकुमार का ऐलान — किसानों की जमीन जबरन नहीं ली जाएगी, विशेषज्ञ समिति बनेगी

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बिदादी टाउनशिप: सीएम शिवकुमार का ऐलान — किसानों की जमीन जबरन नहीं ली जाएगी, विशेषज्ञ समिति बनेगी

सारांश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने साफ किया — बिदादी टाउनशिप के लिए किसानों की जमीन जबरन नहीं ली जाएगी। 2006 से चली आ रही इस परियोजना पर विशेषज्ञ समिति बनेगी, किसानों की आपत्तियाँ सुनी जाएंगी और रिपोर्ट के बाद ही अंतिम फैसला होगा।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 15 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी।
सरकार अगले 2 से 3 महीनों में परियोजना के कानूनी पहलुओं की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करेगी।
परियोजना की शुरुआत 23 सितंबर 2006 को तत्कालीन सीएम एच.डी.
कुमारस्वामी के कार्यकाल में हुई थी; बाद में येदियुरप्पा सरकार ने भी इसे आगे बढ़ाया।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी सरकार ने कंपनी डीएलएफ से ₹400 करोड़ जमा लेकर आशय पत्र जारी किया था।
BJP और जनता दल (सेक्युलर) ने राज्य सरकार पर पर्याप्त परामर्श के बिना कृषि भूमि अधिग्रहण की कोशिश का आरोप लगाया है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 15 जुलाई 2026 को विधान सौधा में आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना (बीटीपी) के तहत किसी भी किसान की जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार अगले दो से तीन महीनों में परियोजना के कानूनी और अन्य पहलुओं की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करेगी।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट रुख

शिवकुमार ने कहा, 'मैं किसी जल्दबाजी में नहीं हूं। यह फैसला किसानों पर छोड़ता हूं। किसानों और मेरे बीच भरोसे का रिश्ता है।' उन्होंने आगे कहा कि समिति किसानों की आपत्तियाँ सुनेगी, कानूनी पहलुओं की जाँच करेगी और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार आगे का निर्णय लेगी। खुद को 'किसान का बेटा' बताते हुए उन्होंने कहा कि जो किसान अपनी जमीन देना चाहते हैं वे दे सकते हैं, लेकिन जो नहीं देना चाहते उन्हें किसी भी हालत में मजबूर नहीं किया जाएगा।

परियोजना का इतिहास और पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बिदादी टाउनशिप उनका 'ड्रीम प्रोजेक्ट' नहीं है और न ही इसकी शुरुआत उन्होंने की थी। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु के आसपास सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की मूल योजना 23 सितंबर 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के कार्यकाल में बनी थी। उस समय नंदगुडी, कसबा, रामनगर तालुक, बिदादी, सोलूर और सथानूर सहित पाँच सैटेलाइट टाउन विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। बाद में एच.डी. कुमारस्वामी और बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकारों ने भी बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीएमआरडीए) के माध्यम से इस परियोजना को आगे बढ़ाया और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत वैश्विक निविदाएँ भी आमंत्रित की थीं।

पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप

शिवकुमार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2006 में कुमारस्वामी सरकार ने प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र को 'रेड जोन' घोषित कर वहाँ जमीन के लेन-देन पर रोक लगाई थी और निजी कंपनी डीएलएफ से ₹400 करोड़ की जमा राशि लेकर उसे आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किया था। उन्होंने सवाल उठाया, 'आखिर यहाँ रियल एस्टेट का कारोबार किसने किया?' — इशारा स्पष्ट रूप से पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और उनके परिवार की ओर था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधी किसानों को गुमराह कर रहे हैं।

विपक्ष का विरोध

गौरतलब है कि बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर किसान संगठनों और विपक्षी दलों का विरोध जारी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) ने राज्य सरकार पर पर्याप्त परामर्श के बिना कृषि भूमि अधिग्रहण की कोशिश करने का आरोप लगाया है। हालाँकि, राज्य सरकार का कहना है कि किसानों और अन्य हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद ही इस परियोजना पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञ समिति के गठन के बाद किसानों की आपत्तियों और कानूनी पहलुओं की जाँच होगी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर सरकार अगला कदम उठाएगी। यह परियोजना ऐसे समय में विवादों के केंद्र में है जब कर्नाटक में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान आंदोलन तेज हो रहे हैं — और सरकार की अगली चुनौती यह साबित करना होगी कि सहमति-आधारित विकास महज एक वादा नहीं, बल्कि व्यवहार में भी लागू होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि नीतिगत बदलाव — परियोजना अभी भी जीवित है, बस समयसीमा खिंच गई है। असली सवाल यह है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद 'सहमति' को कैसे परिभाषित किया जाएगा — क्योंकि भूमि अधिग्रहण के इतिहास में 'स्वैच्छिक' और 'दबाव' के बीच की रेखा अक्सर धुंधली रही है। कुमारस्वामी पर डीएलएफ वाले आरोप राजनीतिक पलटवार हैं, लेकिन ये मूल सवाल को नहीं टालते: क्या बेंगलुरु के विस्तार की कीमत एक बार फिर किसान चुकाएगा? समिति का गठन तब तक महज एक विलंब-रणनीति लगेगी जब तक उसके जनादेश, समयसीमा और किसान प्रतिनिधित्व की शर्तें सार्वजनिक न हों।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी टाउनशिप परियोजना (बीटीपी) क्या है?
बिदादी टाउनशिप परियोजना बेंगलुरु के आसपास विकसित की जाने वाली एक प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप है, जिसकी योजना मूल रूप से 23 सितंबर 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के कार्यकाल में बनी थी। बीएमआरडीए के माध्यम से पीपीपी मॉडल पर इसे आगे बढ़ाया गया था और वैश्विक निविदाएँ भी आमंत्रित की गई थीं।
सीएम शिवकुमार ने किसानों को क्या आश्वासन दिया है?
सीएम डी.के. शिवकुमार ने 15 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि बिदादी टाउनशिप के लिए किसी भी किसान की जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी। जो किसान जमीन देना चाहते हैं वे दे सकते हैं, लेकिन जो नहीं देना चाहते उन पर कोई दबाव नहीं डाला जाएगा।
विशेषज्ञ समिति क्या काम करेगी और कब बनेगी?
सरकार अगले 2 से 3 महीनों में विशेषज्ञ समिति गठित करेगी। यह समिति किसानों की आपत्तियाँ सुनेगी, परियोजना के कानूनी पहलुओं की जाँच करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी — जिसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
BJP और जनता दल (सेक्युलर) ने इस परियोजना पर क्या आपत्ति जताई है?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) ने राज्य सरकार पर पर्याप्त परामर्श के बिना कृषि भूमि अधिग्रहण की कोशिश करने का आरोप लगाया है। किसान संगठन भी परियोजना के खिलाफ विरोध जारी रखे हुए हैं।
शिवकुमार ने कुमारस्वामी पर क्या आरोप लगाए?
सीएम शिवकुमार ने आरोप लगाया कि 2006 में कुमारस्वामी सरकार ने प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र को 'रेड जोन' घोषित कर जमीन लेन-देन पर रोक लगाई और निजी कंपनी डीएलएफ से ₹400 करोड़ की जमा राशि लेकर उसे आशय पत्र जारी किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इस क्षेत्र में रियल एस्टेट का कारोबार किसने किया।
राष्ट्र प्रेस
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