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बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी ने CM शिवकुमार को सार्वजनिक बहस की खुली चुनौती दी

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बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी ने CM शिवकुमार को सार्वजनिक बहस की खुली चुनौती दी

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने CM शिवकुमार को बिदादी टाउनशिप पर सार्वजनिक बहस की चुनौती दी — जहाँ किसान 450 दिनों से धरने पर हैं। साथ ही कानूनी कार्रवाई का ऐलान करते हुए उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस परियोजना का प्रस्ताव उनके अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में शुरू हुआ था।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 22 जून को CM डीके शिवकुमार को बिदादी टाउनशिप परियोजना पर सार्वजनिक बहस की चुनौती दी।
किसान और स्थानीय निवासी इस परियोजना के विरोध में पिछले 450 दिनों से धरने पर बैठे हैं।
कुमारस्वामी ने 2-3 दिनों के भीतर अदालत में याचिका दाखिल करने का ऐलान किया।
कुमारस्वामी ने माना कि टाउनशिप का प्रस्ताव उनके 2006 के मुख्यमंत्री कार्यकाल में शुरू हुआ, लेकिन यह प्रारंभिक चरण से आगे नहीं बढ़ा।
उन्होंने दावा किया कि खड़गे, सिद्धारमैया और शिवकुमार ने 2007 में विधानसभा में इस परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण का विरोध किया था।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार, 22 जून को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बिदादी टाउनशिप परियोजना पर सार्वजनिक बहस की खुली चुनौती दी। कुमारस्वामी ने दावा किया कि इस विवादास्पद परियोजना के विरोध में किसान पिछले 450 दिनों से धरने पर बैठे हैं।

बहस की चुनौती और आरोप

कुमारस्वामी ने कहा, 'डीके शिवकुमार इस बात पर सार्वजनिक बहस के लिए आएं कि क्या किसान इस परियोजना से सहमत हैं। जब भी वे तैयार हों, मैं उपलब्ध हूं।' उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना से जनता को कोई लाभ नहीं होगा और यह केवल शिवकुमार की व्यक्तिगत रुचि को पूरा करने का माध्यम है। यह आरोप शिवकुमार की ओर से अभी तक खंडित नहीं किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक लंबे समय से धरने पर हैं और वे स्वयं भी उस स्थल पर जाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तनाव बढ़ता जा रहा है।

कानूनी कार्रवाई का ऐलान

कुमारस्वामी ने घोषणा की कि उन्होंने बिदादी टाउनशिप परियोजना के विरुद्ध कानूनी लड़ाई के लिए एक विशेष कानूनी टीम का गठन किया है। उन्होंने कहा, 'अगले दो-तीन दिनों के भीतर हम सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे।' यह कदम परियोजना को लेकर राजनीतिक संघर्ष को एक नया आयाम देता है।

परियोजना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कुमारस्वामी ने स्वीकार किया कि बेंगलुरु एकीकृत टाउनशिप का प्रस्ताव उनके अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में शुरू हुआ था। उनके अनुसार, 23 सितंबर 2006 को इस विषय पर पहली बैठक हुई, 18 अक्टूबर 2006 को पाँच एकीकृत टाउनशिप परियोजनाओं के लिए अधिसूचना जारी की गई और 28 नवंबर 2006 को एक दस्तावेजीकरण समिति का गठन हुआ।

हालांकि, उनका कहना है कि ये परियोजनाएं प्रारंभिक चरण से आगे कभी नहीं बढ़ीं। उन्होंने कहा, 'मैंने पाँच टाउनशिप परियोजनाओं को प्रारंभिक स्वीकृति दी थी, लेकिन यह भी तय किया गया था कि आगे की मंजूरी मिलने तक प्रस्तावित क्षेत्रों में कोई विकास कार्य नहीं होगा।' बाद में कनकपुरा तालुक के कई गांवों को इस प्रस्तावित योजना के अंतर्गत लाया गया था।

कांग्रेस नेताओं पर पलटवार

कुमारस्वामी ने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और स्वयं शिवकुमार ने 2007 में विधानसभा में हुई चर्चाओं के दौरान इस परियोजना के तहत बेंगलुरु के आसपास बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का विरोध किया था। गौरतलब है कि यह वही नेता हैं जो अब इस परियोजना को आगे बढ़ाने की स्थिति में हैं।

2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी के दावों पर कटाक्ष करते हुए कुमारस्वामी ने कहा, 'पहले वे जेल जाने के लिए तैयार रहें। पहले बेंगलुरु को सही रास्ते पर लाएं।' यह टिप्पणी राज्य में दोनों पक्षों के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी को दर्शाती है।

आगे क्या होगा

कुमारस्वामी की कानूनी टीम आने वाले दिनों में अदालत में याचिका दाखिल करने की तैयारी में है। इस मामले में शिवकुमार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर किसान संगठनों का आंदोलन और न्यायालय की कार्यवाही मिलकर इस विवाद को कर्नाटक की राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बनाने की दिशा में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन साथ ही यह स्वीकार करने पर मजबूर हैं कि विवादित परियोजना की नींव उन्होंने खुद रखी थी। यह अंतर्विरोध उनकी आलोचना की धार को कमज़ोर करता है। असली सवाल यह है कि 2006 में शुरू हुई और दशकों से अटकी इस परियोजना को अब अचानक राजनीतिक केंद्र में क्यों लाया जा रहा है — क्या यह किसानों की पीड़ा के प्रति वास्तविक चिंता है, या 2028 के चुनाव की पूर्वपीठिका? 450 दिनों से जारी धरने पर बैठे किसानों को जवाब चाहिए, न कि सत्ता के दो ध्रुवों के बीच का राजनीतिक खेल।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी टाउनशिप परियोजना क्या है और इसका विवाद क्यों है?
बिदादी टाउनशिप परियोजना बेंगलुरु के पास प्रस्तावित एक एकीकृत टाउनशिप विकास योजना है, जिसमें कनकपुरा तालुक के कई गांवों की भूमि शामिल है। इस परियोजना का किसान और स्थानीय निवासी विरोध कर रहे हैं और पिछले 450 दिनों से धरने पर हैं।
कुमारस्वामी ने शिवकुमार को बहस की चुनौती क्यों दी?
कुमारस्वामी का आरोप है कि बिदादी टाउनशिप परियोजना से जनता को कोई लाभ नहीं होगा और यह शिवकुमार की निजी रुचि को पूरा करने का माध्यम है। उन्होंने मांग की कि शिवकुमार सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करें कि किसान इस परियोजना के पक्ष में हैं या नहीं।
क्या कुमारस्वामी का इस परियोजना से कोई पुराना संबंध है?
हाँ, कुमारस्वामी ने स्वयं स्वीकार किया कि यह प्रस्ताव उनके 2006 के मुख्यमंत्री कार्यकाल में शुरू हुआ था। उनके अनुसार 23 सितंबर 2006 को बैठक हुई, 18 अक्टूबर 2006 को अधिसूचना जारी हुई, लेकिन परियोजना प्रारंभिक चरण से आगे नहीं बढ़ी।
कुमारस्वामी किस कानूनी कार्रवाई की बात कर रहे हैं?
उन्होंने घोषणा की है कि उन्होंने एक विशेष कानूनी टीम गठित की है और अगले दो-तीन दिनों के भीतर सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ अदालत में याचिका दाखिल की जाएगी।
कांग्रेस नेताओं का इस परियोजना पर पहले क्या रुख था?
कुमारस्वामी के अनुसार, मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने 2007 में विधानसभा में हुई चर्चाओं के दौरान इस परियोजना के तहत बेंगलुरु के आसपास बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का विरोध किया था।
राष्ट्र प्रेस
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