बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी ने CM शिवकुमार को सार्वजनिक बहस की खुली चुनौती दी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार, 22 जून को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बिदादी टाउनशिप परियोजना पर सार्वजनिक बहस की खुली चुनौती दी। कुमारस्वामी ने दावा किया कि इस विवादास्पद परियोजना के विरोध में किसान पिछले 450 दिनों से धरने पर बैठे हैं।
बहस की चुनौती और आरोप
कुमारस्वामी ने कहा, 'डीके शिवकुमार इस बात पर सार्वजनिक बहस के लिए आएं कि क्या किसान इस परियोजना से सहमत हैं। जब भी वे तैयार हों, मैं उपलब्ध हूं।' उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना से जनता को कोई लाभ नहीं होगा और यह केवल शिवकुमार की व्यक्तिगत रुचि को पूरा करने का माध्यम है। यह आरोप शिवकुमार की ओर से अभी तक खंडित नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक लंबे समय से धरने पर हैं और वे स्वयं भी उस स्थल पर जाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तनाव बढ़ता जा रहा है।
कानूनी कार्रवाई का ऐलान
कुमारस्वामी ने घोषणा की कि उन्होंने बिदादी टाउनशिप परियोजना के विरुद्ध कानूनी लड़ाई के लिए एक विशेष कानूनी टीम का गठन किया है। उन्होंने कहा, 'अगले दो-तीन दिनों के भीतर हम सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे।' यह कदम परियोजना को लेकर राजनीतिक संघर्ष को एक नया आयाम देता है।
परियोजना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कुमारस्वामी ने स्वीकार किया कि बेंगलुरु एकीकृत टाउनशिप का प्रस्ताव उनके अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में शुरू हुआ था। उनके अनुसार, 23 सितंबर 2006 को इस विषय पर पहली बैठक हुई, 18 अक्टूबर 2006 को पाँच एकीकृत टाउनशिप परियोजनाओं के लिए अधिसूचना जारी की गई और 28 नवंबर 2006 को एक दस्तावेजीकरण समिति का गठन हुआ।
हालांकि, उनका कहना है कि ये परियोजनाएं प्रारंभिक चरण से आगे कभी नहीं बढ़ीं। उन्होंने कहा, 'मैंने पाँच टाउनशिप परियोजनाओं को प्रारंभिक स्वीकृति दी थी, लेकिन यह भी तय किया गया था कि आगे की मंजूरी मिलने तक प्रस्तावित क्षेत्रों में कोई विकास कार्य नहीं होगा।' बाद में कनकपुरा तालुक के कई गांवों को इस प्रस्तावित योजना के अंतर्गत लाया गया था।
कांग्रेस नेताओं पर पलटवार
कुमारस्वामी ने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और स्वयं शिवकुमार ने 2007 में विधानसभा में हुई चर्चाओं के दौरान इस परियोजना के तहत बेंगलुरु के आसपास बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का विरोध किया था। गौरतलब है कि यह वही नेता हैं जो अब इस परियोजना को आगे बढ़ाने की स्थिति में हैं।
2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी के दावों पर कटाक्ष करते हुए कुमारस्वामी ने कहा, 'पहले वे जेल जाने के लिए तैयार रहें। पहले बेंगलुरु को सही रास्ते पर लाएं।' यह टिप्पणी राज्य में दोनों पक्षों के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी को दर्शाती है।
आगे क्या होगा
कुमारस्वामी की कानूनी टीम आने वाले दिनों में अदालत में याचिका दाखिल करने की तैयारी में है। इस मामले में शिवकुमार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर किसान संगठनों का आंदोलन और न्यायालय की कार्यवाही मिलकर इस विवाद को कर्नाटक की राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बनाने की दिशा में हैं।