10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी बोले — किसानों के बिना शिवकुमार की बैठक बेमानी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी बोले — किसानों के बिना शिवकुमार की बैठक बेमानी

सारांश

बिदादी टाउनशिप परियोजना पर शुरू हुई सार्वजनिक बहस की चुनौती अब बैठक की शर्तों पर अटक गई है। कुमारस्वामी का एक ही सवाल — अगर किसान मेज पर नहीं होंगे, तो चर्चा किस बात की? करीब 450 दिनों का किसान आंदोलन और सहमति के परस्पर विरोधी दावे इस विवाद को सिर्फ राजनीतिक नहीं, ज़मीनी लड़ाई बनाते हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 23 जून को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के 26 जून के बैठक निमंत्रण पर सवाल उठाए।
कुमारस्वामी ने माँग की कि बैठक 27 जून को बिदादी के प्रभावित क्षेत्र में हो और उसमें किसान व हितधारक शामिल हों।
सरकार का दावा है कि 80% किसानों ने परियोजना को सहमति दी, जबकि कुमारस्वामी के अनुसार 80-90% किसान सहमति से इनकार करते हैं।
किसान लगभग 450 दिनों से बिदादी टाउनशिप परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कुमारस्वामी की माँगों पर फिलहाल टिप्पणी करने से परहेज किया।

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंगलवार, 23 जून को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के चर्चा निमंत्रण को सिरे से खारिज नहीं किया, लेकिन साफ कहा कि प्रभावित किसानों और हितधारकों की अनुपस्थिति में किसी भी बैठक का कोई अर्थ नहीं है। बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर यह विवाद तब और गहरा गया जब दोनों नेताओं के बीच बैठक की तारीख, स्थान और प्रतिभागियों पर सहमति नहीं बन पाई।

विवाद की पृष्ठभूमि

बेंगलुरु के निकट प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना के खिलाफ किसान लगभग 450 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भूमि अधिग्रहण की सहमति को लेकर राज्य सरकार और किसानों के बीच परस्पर विरोधी दावे सामने आ रहे हैं। सोमवार, 22 जून को कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी थी, जिसे शिवकुमार ने स्वीकार करते हुए 26 जून को विधान सौधा में चर्चा का निमंत्रण दिया और कुमारस्वामी से पाँच सदस्यीय टीम के साथ आने को कहा।

कुमारस्वामी की मुख्य माँगें

कुमारस्वामी ने शिवकुमार के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बैठक 27 जून को परियोजना-प्रभावित क्षेत्र में आयोजित की जाए और उसमें स्थानीय किसानों व हितधारकों को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री ने मुझे पाँच लोगों की टीम के साथ आने को कहा, लेकिन मेरी केवल एक ही टीम है और वह है किसान।' केंद्रीय मंत्री ने इस आशय का पत्र भी मुख्यमंत्री को भेजा है।

26 जून को उपलब्धता के बारे में पूछे जाने पर कुमारस्वामी ने बताया कि उस दिन विभिन्न शहरों और गाँवों में उनके कई पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम हैं, इसलिए उन्होंने 27 जून की सुबह किसी भी सुविधाजनक समय पर बैठक बुलाने का अनुरोध किया है।

सहमति के आँकड़ों पर विवाद

कुमारस्वामी ने सरकारी दावों पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'सरकार दावा कर रही है कि 80 प्रतिशत किसानों ने परियोजना के लिए सहमति दे दी है, लेकिन 80 से 90 प्रतिशत किसान कह रहे हैं कि उन्होंने कोई सहमति नहीं दी। इस मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब परियोजना-प्रभावित किसान करीब डेढ़ साल से आंदोलन की राह पर हैं।

शिवकुमार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कुमारस्वामी की माँगों पर फिलहाल टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि वह इस विषय पर बाद में बात करेंगे। गौरतलब है कि शिवकुमार ने ही पहले सार्वजनिक बहस की चुनौती को स्वीकार कर विधान सौधा में बैठक का प्रस्ताव रखा था।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि यह निमंत्रण केवल औपचारिकता निभाने के लिए दिया गया है। उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि सिर्फ यह दिखाने के लिए निमंत्रण दिया गया है कि बैठक की पेशकश की गई है। असली सवाल यह है कि यदि प्रभावित लोग मौजूद नहीं होंगे तो चर्चा किस बात की होगी?' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब वे सत्ता में थे, तब कांग्रेस नेताओं ने इसी मुद्दे पर उनकी सरकार की आलोचना की थी। कुमारस्वामी ने कहा, 'यह सरकार राज्य के हितों के बजाय अपने हितों के लिए चलाई जा रही है।'

बिदादी टाउनशिप विवाद अब सीधे राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री शिवकुमार कुमारस्वामी के पत्र का क्या जवाब देते हैं और क्या किसानों को बैठक में शामिल किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि वे किसानों की माँगों को ठोस नीतिगत विकल्प में बदल पाते हैं या नहीं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है, वह यह है कि 450 दिन का यह आंदोलन महज एक परियोजना का विरोध नहीं — यह राज्य में भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी टाउनशिप परियोजना विवाद क्या है?
बेंगलुरु के निकट प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर किसान लगभग 450 दिनों से विरोध कर रहे हैं। विवाद का केंद्र यह है कि राज्य सरकार 80% किसानों की सहमति का दावा करती है, जबकि किसान इससे इनकार करते हैं।
कुमारस्वामी ने शिवकुमार की बैठक पर आपत्ति क्यों जताई?
कुमारस्वामी का कहना है कि विधान सौधा में केवल पाँच सदस्यीय टीम के साथ होने वाली बैठक में प्रभावित किसानों और हितधारकों की भागीदारी नहीं होगी, इसलिए ऐसी चर्चा का कोई अर्थ नहीं। उन्होंने बैठक 27 जून को बिदादी के प्रभावित क्षेत्र में आयोजित करने का अनुरोध किया है।
बैठक कब और कहाँ होने का प्रस्ताव है?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने 26 जून को विधान सौधा में बैठक का प्रस्ताव रखा है। कुमारस्वामी ने इसके बजाय 27 जून की सुबह परियोजना-प्रभावित क्षेत्र में बैठक बुलाने का अनुरोध किया है और इस आशय का पत्र मुख्यमंत्री को भेजा है।
सहमति के आँकड़ों पर दोनों पक्षों के दावे क्या हैं?
राज्य सरकार का दावा है कि 80% किसानों ने बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए सहमति दी है। इसके विपरीत, कुमारस्वामी का कहना है कि 80 से 90% किसान कह रहे हैं कि उन्होंने कोई सहमति नहीं दी। इन परस्पर विरोधी दावों के कारण भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
इस विवाद में कांग्रेस और जेडीएस का राजनीतिक रुख क्या है?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि जब वे सत्ता में थे, तब कांग्रेस ने इसी मुद्दे पर उनकी सरकार की आलोचना की थी, लेकिन अब उनका रुख बदल गया है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर राज्य के हितों की बजाय अपने हितों के लिए काम करने का आरोप लगाया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले