संजना सांघी ने संयुक्त राष्ट्र में उठाई युवाओं की आवाज़, बोलीं — 'हकदार सुविधाएं नहीं मिल रहीं'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री संजना सांघी ने 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक आधिकारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर भारत के युवाओं की आवाज़ वैश्विक मंच पर बुलंद की। उन्होंने युवा सशक्तीकरण, शिक्षा और जमीनी स्तर पर विकास के मुद्दों पर दुनियाभर के प्रतिनिधियों के सामने अपना पक्ष रखा। संजना को संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रमुख युवा महिला आवाज़ों में से एक के रूप में प्रतिनिधित्व के लिए चुना गया था।
युवाओं को लेकर मूल सवाल
संजना ने मंच से पूछा कि क्या आज की पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए वे संसाधन और अवसर मिल रहे हैं जिनकी वे वास्तव में हकदार हैं। उन्होंने कहा, 'मैं पिछले करीब 12 साल से युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम करती आ रही हूँ। जब मैं टीनएजर थी, तब मुझे खुद महसूस हुआ था कि शिक्षा किस तरह मेरी ज़िंदगी बदल सकती है। उस समय मुझे यह बताने के लिए किसी का इंतज़ार नहीं करना पड़ा कि मुझे नेतृत्व करना चाहिए या शिक्षा ही बदलाव का रास्ता है — मैंने खुद इसे महसूस किया और उसी सोच के साथ आगे बढ़ी।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, इसलिए यह सवाल और भी ज़रूरी हो जाता है कि आने वाली पीढ़ियों को किस तरह तैयार किया जा रहा है।
सैन्य खर्च बनाम शिक्षा पर तर्क
अपने संबोधन में संजना ने वैश्विक सैन्य खर्च के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण बिंदु उठाया। उन्होंने कहा, 'जब खबरों में बड़े सैन्य खर्च के आँकड़े दिखाई देते हैं, तो मैं सोचती हूँ कि अगर उस रकम का छोटा-सा हिस्सा भी शिक्षा और जमीनी विकास पर लगाया जाए तो काफी बदलाव लाया जा सकता है।' उनके अनुसार ऐसे संसाधनों से प्राथमिक स्कूल, बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ, वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर और आर्ट सेंटर बनाए जा सकते हैं, जिससे समाज की बुनियादी समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुलझाने में मदद मिल सकती है।
भरोसे की कमी — एक अहम मुद्दा
संजना ने युवाओं और व्यवस्था के बीच भरोसे की खाई को भी उतना ही गंभीर मुद्दा बताया जितना संसाधनों की कमी को। उन्होंने कहा, 'असली समस्या सिर्फ संसाधनों की नहीं, बल्कि भरोसे की भी है। युवा सिर्फ ऐसी नीतियों के लाभार्थी बनकर नहीं रहना चाहते, जिनका फैसला ऐसे लोग करें जो उन फैसलों के दीर्घकालिक असर का सामना खुद नहीं करेंगे। युवाओं को फैसले लेने और बदलाव की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए।'
सामूहिक प्रयास की अपील
संजना ने अपने भाषण का समापन एक स्पष्ट अपील के साथ किया। उन्होंने कहा, 'मेरा सपना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी ज़रूरतों से जुड़ी समस्याओं को सामूहिक प्रयास के ज़रिए जल्द से जल्द हल किया जाए। मैं नहीं चाहती कि हालात ऐसे बनें कि युवाओं को अपनी बात रखने के लिए सड़कों पर उतरना पड़े — बदलाव की शुरुआत समाज के भीतर मिलकर काम करने से हो सकती है।' कार्यक्रम में उन्होंने दुनियाभर के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रभावशाली हस्तियों के साथ युवा भागीदारी, नए सामाजिक कार्य-मॉडल और सतत विकास लक्ष्यों पर चर्चा की।
यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में युवा प्रतिनिधित्व और SDG प्रगति पर वैश्विक बहस तेज़ हो रही है। संजना की यह उपस्थिति भारत की युवा नेतृत्व क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करती है।