यूनिसेफ का बड़ा बयान: भारत में लड़कियों की तरक्की का असर वैश्विक सीमाओं से परे
सारांश
मुख्य बातें
यूनिसेफ की डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हनान सुलेमान ने 13 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत में लड़कियों के सशक्तीकरण में हुई प्रगति का सकारात्मक प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि यह पूरी दुनिया को प्रभावित करता है। उन्होंने भारत की 25 करोड़ 30 लाख की किशोर आबादी — जो दुनिया में सबसे बड़ी है — का उल्लेख करते हुए इसे वैश्विक महत्व का विषय बताया।
भारत में लड़कियों की शिक्षा में सुधार
हनान सुलेमान ने कहा, 'पिछले एक दशक में भारत में लड़कियों की शिक्षा में काफी सुधार हुआ है, जो परिवारों में लड़कियों के महत्व को बढ़ती मान्यता को दर्शाता है।' उन्होंने इस बदलाव को निरंतर निवेश, व्यापक सामुदायिक भागीदारी और ठोस नीतिगत कार्रवाई का परिणाम बताया। भारत ने साबित किया है कि सुसंगत प्रयासों से वास्तविक और सार्थक बदलाव संभव है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि का उदाहरण
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का उदाहरण देते हुए बताया कि जब वे वहाँ मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र थे, तो उनकी पूरी क्लास में एक भी लड़की नहीं थी। उन्होंने कहा, 'आज मेरी यूनिवर्सिटी में लगभग 70 प्रतिशत क्लास में लड़कियाँ हैं। इसलिए यह हमारे ही जीवनकाल में वास्तविक प्रगति है।' यह उदाहरण इस बात का प्रमाण है कि भारत में लैंगिक समता की दिशा में ठोस बदलाव आया है।
एआई क्षेत्र में लैंगिक असंतुलन की चुनौती
हरीश ने हालाँकि चेतावनी भी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में अभी भी पुरुषों का दबदबा है। उनके अनुसार, 'हम सिर्फ टेक ब्रदर्स के बारे में सुनते हैं, टेक सिस्टर्स के बारे में नहीं।' उन्होंने सभी सदस्य देशों से आग्रह किया कि एआई का क्षेत्र लड़कियों और महिलाओं के लिए अनुकूल बनाया जाए। भारत में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए एआई को लड़कियों की शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिसमें खास ट्यूटोरियल और पाठ्य सामग्री तैयार करना शामिल है।
वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रिया
सिएरा लियोन की उप विदेश मंत्री जेनेबा बंगुरा ने कहा कि लड़कियों के सशक्तीकरण में किया गया निवेश परिवारों, समुदायों और राष्ट्रों को मजबूत करता है और एक अधिक शांतिपूर्ण व समृद्ध दुनिया का निर्माण करता है। उन्होंने कहा, 'अफ्रीका और दुनिया भर में लड़कियाँ सिर्फ कमजोर नहीं हैं — वे बदलाव की वाहक, इनोवेटर, लीडर और विकास की प्रेरणा हैं।' लाइबेरिया के स्थायी प्रतिनिधि लुईस ब्राउन ने 1989 से 2003 के बीच गृह युद्ध समाप्त कराने में महिलाओं की भूमिका को याद किया। अल्जीरिया के स्थायी प्रतिनिधि अमर बेंदजामा ने कहा कि आज लड़कियों के लिए बनाया गया माहौल उनके कल के योगदान को निर्धारित करता है।
आगे की राह
यह कार्यक्रम भारत और सिएरा लियोन ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया। वैश्विक नेताओं के इन बयानों से यह स्पष्ट है कि लड़कियों के सशक्तीकरण का एजेंडा अब केवल सामाजिक कल्याण तक सीमित नहीं रहा — यह वैश्विक शांति, आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। आने वाले वर्षों में एआई समावेश और डिजिटल साक्षरता इस एजेंडे के केंद्र में होंगे।