महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर भारत: LG टीएस संधू ने माता सुंदरी महाविद्यालय की सराहना की

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महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर भारत: LG टीएस संधू ने माता सुंदरी महाविद्यालय की सराहना की

सारांश

दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने माता सुंदरी महिला महाविद्यालय के वार्षिक दिवस पर स्पष्ट संदेश दिया — भारत अब महिलाओं को विकास की लाभार्थी नहीं, बल्कि उसकी नेतृत्वकर्ता के रूप में देख रहा है। PM मोदी के विज़न का हवाला देते हुए उन्होंने शिक्षा को इस बदलाव का सबसे बड़ा औज़ार बताया।

Key Takeaways

दिल्ली उपराज्यपाल टीएस संधू ने 30 अप्रैल 2026 को माता सुंदरी महिला महाविद्यालय के वार्षिक दिवस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने PM नरेंद्र मोदी के 'महिला विकास से महिला-नेतृत्व वाले विकास' के विज़न का उल्लेख किया। संधू ने शिक्षा को व्यक्तिगत सशक्तिकरण के साथ-साथ परिवार, समुदाय और संस्थानों को मज़बूत करने वाली शक्ति बताया। उन्होंने ज्ञान को ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ लागू करने पर विशेष बल दिया। छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उनके चुनाव और मूल्य न केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा बल्कि समाज को भी आकार देंगे।

दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने 30 अप्रैल 2026 को माता सुंदरी महिला महाविद्यालय के वार्षिक दिवस समारोह में कहा कि भारत अब 'महिला विकास' से आगे बढ़कर 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' की दिशा में अग्रसर हो रहा है। उन्होंने इस संस्थान जैसे महाविद्यालयों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये आत्मविश्वास से भरी युवा महिलाओं को तैयार कर रहे हैं जो राष्ट्र की प्रगति का नेतृत्व करेंगी।

महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर

उपराज्यपाल संधू ने समारोह में कहा कि हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ भारत के भविष्य को आकार देने में महिलाओं की भूमिका सार्थक रूप से बढ़ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विचार का उल्लेख किया कि भारत 'महिला विकास' से 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' की ओर बढ़ रहा है — एक ऐसा बदलाव जो महिलाओं को केवल नीति की लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवर्तन की वाहक के रूप में स्थापित करता है।

शिक्षा को बताया परिवर्तन का केंद्र

संधू ने कहा कि शिक्षा इस परिवर्तन का केंद्र है — न केवल व्यक्तिगत सशक्तिकरण के साधन के रूप में, बल्कि एक ऐसी शक्ति के रूप में जो परिवारों, समुदायों और संस्थानों को मज़बूत करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे संस्थानों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि तेज़ी से जटिल और परस्पर जुड़े संसार में आत्मविश्वास, सक्रियता और नेतृत्व क्षमता विकसित करना भी है।

विवेक और मूल्यों पर बल

उपराज्यपाल ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने के बारे में नहीं है, बल्कि उसे ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ लागू करने के बारे में भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे वातावरण में जहाँ सूचना व्यापक रूप से सुलभ है, असली अंतर विवेक, मूल्यों और ज्ञान को सार्थक कार्यों में बदलने की क्षमता में निहित होता है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब डिजिटल युग में सूचना की भरमार के बीच आलोचनात्मक सोच की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

छात्राओं को संदेश

वार्षिक दिवस पर अपनी शैक्षणिक यात्रा आगे बढ़ा रही छात्राओं को संबोधित करते हुए संधू ने कहा कि यह परिवर्तन का क्षण है। उन्होंने कहा,

Point of View

रोज़गार दर और नेतृत्व पदों पर प्रतिनिधित्व के आँकड़े कितने बदले हैं। दिल्ली जैसे महानगर में भी महिला महाविद्यालयों को बुनियादी ढाँचे और फैकल्टी की कमी से जूझना पड़ता है। प्रेरणादायक भाषणों को तब असली वज़न मिलता है जब वे नीतिगत आवंटन और जवाबदेही तंत्र के साथ आते हैं।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

दिल्ली LG टीएस संधू ने माता सुंदरी महाविद्यालय में क्या कहा?
उपराज्यपाल टीएस संधू ने 30 अप्रैल 2026 को माता सुंदरी महिला महाविद्यालय के वार्षिक दिवस पर कहा कि भारत 'महिला विकास' से 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा को इस परिवर्तन का केंद्र बताया और संस्थान की प्रशंसा की।
'महिला-नेतृत्व वाला विकास' क्या है?
यह PM नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित विज़न है जिसमें महिलाओं को विकास की केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उसकी नेतृत्वकर्ता और निर्णय-निर्माता के रूप में देखा जाता है। यह अवधारणा 'महिला विकास' की परंपरागत सोच से एक कदम आगे है।
माता सुंदरी महिला महाविद्यालय कहाँ स्थित है?
माता सुंदरी महिला महाविद्यालय नई दिल्ली में स्थित एक प्रतिष्ठित महिला महाविद्यालय है जो दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध है। यह संस्थान महिला उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उपराज्यपाल ने शिक्षा के बारे में क्या संदेश दिया?
संधू ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ लागू करना भी उतना ही ज़रूरी है। उन्होंने विवेक और मूल्यों को आज के सूचना-समृद्ध युग में सबसे बड़ा अंतर बताया।
इस भाषण का छात्राओं के लिए क्या महत्व है?
उपराज्यपाल ने छात्राओं को याद दिलाया कि उनके द्वारा किए गए चुनाव, चुने गए मार्ग और अपनाए गए मूल्य न केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा को बल्कि उनके परिवेश और समाज को भी आकार देंगे। उन्होंने औपचारिक शिक्षा से परे भी सीखते रहने की सलाह दी।
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