रूबल नागी: महिला-पुरुष साथ चलें तो बनेगा विकसित भारत, जेंडर इक्वालिटी को नई नज़र से देखें
सारांश
मुख्य बातें
समाजसेवी, लेखिका और शिक्षाविद रूबल नागी ने 27 जून 2026 को मुंबई में महिला सशक्तीकरण, समाज में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में उनकी भागीदारी पर अपने विचार साझा किए। उनका स्पष्ट मत है कि 'जेंडर इक्वालिटी' को महिला-पुरुष तुलना की संकीर्ण सोच से बाहर निकालकर वास्तविक सहभागिता के रूप में देखा जाए — तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा।
महिला-पुरुष प्रतिस्पर्धा नहीं, साझेदारी ज़रूरी
रूबल नागी ने स्पष्ट किया कि महिलाओं और पुरुषों के बीच प्रतिस्पर्धा की मानसिकता समाज को आगे नहीं ले जाती। उन्होंने कहा, 'अगर कोई क्षेत्र पुरुष-प्रधान कहलाता है, तो यह भी याद रखना चाहिए कि उन पुरुषों को जन्म देने वाली भी एक माँ ही होती है। इसलिए हमें तुलना की मानसिकता से बाहर निकलना होगा।' उनके अनुसार, दोनों को कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ना होगा — न कि एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में।
हर क्षेत्र में महिलाओं की मज़बूत उपस्थिति
नागी ने रेखांकित किया कि आज ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा जहाँ महिलाएँ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन न कर रही हों। सेना, राजनीति, कॉर्पोरेट सेक्टर, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर — हर जगह महिलाएँ अपनी मज़बूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरी तरह महिलाओं की अपनी पसंद और क्षमता पर निर्भर करता है कि वे किस दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं।
महिलाओं को जोड़ना और सीखने का अवसर देना ज़रूरी
नागी का मानना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं को परस्पर जोड़ना और उन्हें एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर देना बेहद ज़रूरी है। जब महिलाएँ आपस में जुड़ती हैं, अपने अनुभव साझा करती हैं और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाती हैं, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव संभव होता है। यह विचार ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिला नेतृत्व और आर्थिक स्वावलंबन की चर्चाएँ तेज़ हो रही हैं।
आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती महिलाएँ
नागी ने कहा कि आज की बेटियाँ और महिलाएँ पुरानी सोच से आगे निकल चुकी हैं। अब महिलाएँ घर की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन रही हैं और अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। उनके अनुसार, लगातार प्रयासों और बदलती सोच की वजह से महिला-पुरुष के बीच अवसरों का अंतर तेज़ी से कम हो रहा है और आने वाले समय में यह दूरी और भी घटेगी।
वैश्विक मंच पर भारतीय महिलाओं की पहचान
रूबल नागी ने कहा कि भारत की बेटियों ने न केवल देश में, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और देश का नाम रोशन किया है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में महिलाओं की भूमिका और भी सशक्त होती जाएगी तथा विकसित भारत के निर्माण में उनका योगदान निर्णायक साबित होगा।