जितेंद्र सिंह ने पेश किया इंटीग्रेटेड साइंस रोडमैप, ओडिशा में रेयर अर्थ कॉरिडोर और बायोटेक को जोड़ेगा
सारांश
मुख्य बातें
विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 11 अगस्त 2026 को एक व्यापक इंटीग्रेटेड रोडमैप प्रस्तुत किया, जो केंद्र सरकार के 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' प्रस्ताव को ओडिशा के समुद्री संसाधनों, बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम, अंतरिक्ष क्षमताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के नेटवर्क से एकीकृत करता है। यह पहल अलग-अलग बिखरी संस्थागत कोशिशों की जगह एक सुसंगत, बहु-क्षेत्रीय विज्ञान-आधारित विकास ढाँचा खड़ा करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
मुख्य घटनाक्रम
डॉ. सिंह ओडिशा के विज्ञान और प्रौद्योगिकी कैबिनेट मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा के साथ इस रोडमैप पर विस्तृत चर्चा कर रहे थे। बैठक में बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अंतर्गत भुवनेश्वर स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (ILS) के विस्तार को अंतिम रूप दिया गया। ओडिशा राज्य सरकार ने इस विस्तार के लिए अतिरिक्त 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है।
मंत्री पात्रा ने बैठक में राज्य की विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्राथमिकताओं से जुड़े कई प्रस्ताव प्रस्तुत किए, जिनमें समुद्री बायोटेक्नोलॉजी का विस्तार, लाइफ साइंसेज के बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना, ओडिशा के तटीय एवं खनिज संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग, स्पेस एप्लीकेशन और मैन्युफैक्चरिंग, रेयर अर्थ खनिजों की खोज तथा राष्ट्रीय समुद्री-पर्यावरण पहलों में तटीय जिलों की भागीदारी शामिल थी।
OMBRIC: संस्थाओं को जोड़ने वाला प्लेटफॉर्म
चर्चाओं में ओडिशा मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर (OMBRIC) पर विशेष ध्यान दिया गया। यह कॉरिडोर राज्य के प्रमुख शैक्षणिक और शोध संस्थानों को एक सहयोगी मंच पर लाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, OMBRIC ने पहले ही IIT भुवनेश्वर, बरहमपुर यूनिवर्सिटी, फकीर मोहन यूनिवर्सिटी, NIT राउरकेला, IISER बरहमपुर और ILS भुवनेश्वर के साथ साझेदारी स्थापित कर ली है।
बायो-E3 फ्रेमवर्क और ILS विस्तार का महत्त्व
ILS की बढ़ी हुई क्षमता लाइफ साइंसेज और बायोटेक्नोलॉजी में शोध के साथ-साथ बायो-E3 फ्रेमवर्क — अर्थात् अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए बायोटेक्नोलॉजी — से जुड़ी पहलों को एक सुदृढ़ आधार प्रदान कर सकती है। यह ढाँचा विज्ञान को सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों से सीधे जोड़ने का प्रयास करता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि पूर्वी तटीय क्षेत्र भारत के उभरते परमाणु और समुद्री रोडमैप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, और ओडिशा केंद्रीय वैज्ञानिक संस्थानों तथा राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों के माध्यम से इस दिशा में योगदान देने की मज़बूत स्थिति में है।
अंतरिक्ष और खनिज क्षेत्र में नई संभावनाएँ
बैठक में राज्य की अंतरिक्ष क्षमताओं को इसरो (ISRO) के साथ जोड़ने पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसमें PPP मोड में स्पेस रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेंटर विकसित करने की संभावना भी शामिल है। मंत्रालय के अनुसार, ऐसा इकोसिस्टम सरकारी संस्थानों, राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों, शोध संगठनों और उद्योग जगत को एकजुट कर सकता है।
समुद्री बायोटेक्नोलॉजी और अर्थ साइंसेज के बीच प्रस्तावित तालमेल का उद्देश्य ओडिशा के तटीय संसाधनों की वैज्ञानिक समझ और उनके टिकाऊ दोहन को मज़बूती देना है। यह दृष्टिकोण समुद्री विज्ञान, अर्थ साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी और खनिज-संसाधन शोध में विशेषज्ञता को एकत्र कर संयुक्त परियोजनाओं और प्रौद्योगिकी विकास के लिए व्यापक अवसर बनाएगा।
आगे क्या होगा
यह रोडमैप अभी प्रारंभिक चर्चा और सहमति के चरण में है। विभिन्न प्रस्तावों के क्रियान्वयन की समयसीमा और वित्तीय प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रेयर अर्थ खनिजों की रणनीतिक अहमियत को लेकर अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटा है।