RBI डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता: भारत का बॉन्ड बाजार विश्व में सबसे मजबूत, जल्द लौटेगी शेयर बाजार में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने 26 सितंबर 2026 को कहा कि हाल के वर्षों में भारत के बॉन्ड बाजार का प्रदर्शन न केवल अपने पिछले रिकॉर्ड की तुलना में बेहतर रहा है, बल्कि दुनिया के अधिकांश देशों की तुलना में भी कहीं अधिक मजबूत रहा है। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की ठोस बुनियाद अंततः शेयर बाजार में भी परिलक्षित होगी और भारतीय इक्विटी एक बार फिर निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनेगी।
बॉन्ड बाजार की मजबूती के प्रमुख कारण
RBI के सितंबर बुलेटिन में प्रकाशित अपने विश्लेषण में पूनम गुप्ता ने रेखांकित किया कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 22 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँचने के बावजूद भारतीय बॉन्ड बाजार ने असाधारण स्थिरता बनाए रखी। उनके अनुसार इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं — केंद्र सरकार की राजकोषीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता और आने वाले वर्षों में उच्च आर्थिक विकास दर की संभावनाएँ।
गुप्ता ने कहा कि सरकार की वित्तीय स्थिति में हुए सुधार और भविष्य में बेहतर राजकोषीय परिणामों की उम्मीदों ने बाजार को मजबूत आधार दिया है। साथ ही, मौद्रिक नीति की विश्वसनीयता और मुद्रास्फीति से जुड़े संरचनात्मक दबावों में आई कमी ने भी निवेशकों का विश्वास बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रतिष्ठित पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने टिप्पणी की थी कि भारत का अनुभव यह दर्शाता है कि सार्वजनिक वित्त को सुदृढ़ रखना और केंद्रीय बैंकरों को स्वतंत्र रूप से महँगाई नियंत्रित करने देना कितना महत्वपूर्ण है।
शेयर बाजार में अभी भी सतर्कता
गुप्ता ने स्वीकार किया कि भारतीय शेयर बाजार ने अब तक उस स्तर का आशावाद नहीं दिखाया है, जैसा बॉन्ड बाजार में देखने को मिला है। उनके अनुसार इसका एक संभावित कारण यह है कि कुछ अन्य अर्थव्यवस्थाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विकास की कहानी फिलहाल अधिक आकर्षक दिखाई दे रही है।
उन्होंने बताया कि जून 2022 से सितंबर 2024 के बीच भारतीय शेयर बाजार ने असाधारण प्रदर्शन किया था, लेकिन वर्तमान में कुछ अन्य देशों के बाजार उस तरह की तेजी का अनुभव कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक AI-संचालित अर्थव्यवस्थाओं की ओर अधिक झुक रहे हैं।
इसके बावजूद पूनम गुप्ता का दृढ़ मत है कि आखिरकार वास्तविक अर्थव्यवस्था की मजबूती अपना प्रभाव दिखाएगी और भारतीय इक्विटी पुनः अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक नज़र आएंगी।
भुगतान संतुलन और रुपए की स्थिति
डिप्टी गवर्नर ने भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments — BOP) और रुपए की दिशा पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत परंपरागत रूप से सीमित चालू खाता घाटे (Current Account Deficit — CAD) और अपेक्षाकृत बड़े पूंजी खाते के अधिशेष की स्थिति में रहा है, जिसके चलते देश का भुगतान संतुलन सकारात्मक बना रहता है।
गुप्ता ने कहा, 'भारत का चालू खाता घाटा उन स्तरों से काफी नीचे है जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित माना जाता है। शुद्ध सेवा निर्यात और प्रवासी भारतीयों से मिलने वाला रेमिटेंस भारत की सबसे बड़ी संरचनात्मक ताकतें बनी हुई हैं।'
आम जनता और निवेशकों पर असर
गुप्ता ने बताया कि सेवाओं से होने वाली आय और रेमिटेंस इतने मजबूत और स्थिर हैं कि वे वस्तुओं के व्यापार घाटे की भरपाई करने में सक्षम हैं। इसी वजह से भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी के 1% से नीचे नियंत्रित रहने में सफल रहा है — जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
गौरतलब है कि समय के साथ चालू खाता घाटा जीडीपी के अनुपात में घटा है, जिससे बाहरी क्षेत्र की मजबूती बढ़ी है। यह संरचनात्मक सुधार भारत को वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं के दौर में स्थिरता का कवच प्रदान करता है। आने वाले महीनों में बाजार की दिशा पर निवेशकों की नज़र बनी रहेगी।