राम गोविंद चौधरी के निधन पर सपा-आप सांसदों का शोक, बोले— 'बलिया और UP की राजनीति को अपूरणीय क्षति'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी के निधन पर 26 सितंबर 2026 को विभिन्न दलों के सांसदों ने गहरा शोक व्यक्त किया। उनके निधन को बलिया और समूचे उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया गया। दशकों तक समाजवादी आंदोलन के अग्रणी योद्धा रहे चौधरी का जाना राज्य की संसदीय विरासत में एक बड़े अध्याय का अंत माना जा रहा है।
नेताओं ने याद किया संघर्षमय जीवन
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, 'राम गोविंद चौधरी अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका जीवन संघर्षों से भरा था। वे पहली बार 1977 में चुने गए थे। जब देश में आपातकाल लगा था, तब उन्होंने लगभग 14 महीने जेल में बिताए थे। हम भी जेल में थे। वे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर आंदोलन में शामिल हुए थे।'
अवधेश प्रसाद ने आगे कहा कि चौधरी का पूरा जीवन शोषितों, अन्याय के शिकार लोगों, मज़दूरों, किसानों, छात्रों और युवाओं के संघर्ष को समर्पित था। नेता प्रतिपक्ष के रूप में हो या मंत्री पद पर — उनकी अपनी एक अलग पहचान और छवि बनी रही, जो सत्ता व विपक्ष दोनों में समान रूप से सम्मानित थी।
अखिलेश यादव का आगमन और पार्टी की प्रतिक्रिया
अवधेश प्रसाद ने बताया कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव स्वयं 26 सितंबर को निधन स्थल पर पहुँचे। उन्होंने कहा, 'राम गोविंद चौधरी पार्टी के प्रति पूर्णतः वफ़ादार थे और अखिलेश यादव उन पर बहुत भरोसा करते थे। उनके बीमार रहने के दौरान इलाज के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अथक प्रयास किए, लेकिन उनका समय पूरा हो चुका था।'
सपा सांसद राजीव राय ने भावुक होते हुए कहा, 'यह बलिया और उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मुझे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की उपस्थिति में नेताजी के मार्गदर्शन में राम गोविंद चौधरी के साथ काम करने का अवसर मिला था। वे मेरे पिता के भी बेहद करीबी मित्र थे।'
आप ने भी दी श्रद्धांजलि
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने भी चौधरी के निधन पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'राम गोविंद चौधरी 'बागी बलिया' से थे — जो समाजवादी राजनीति के गढ़ के रूप में पूरे देश में जानी जाती है और जहाँ से चंद्रशेखर जैसे महान नेता भी आए। अखिलेश यादव सरकार में मंत्री और बलिया से आठ बार विधायक के रूप में उनका योगदान सदा मिसाल बना रहेगा।'
संजय सिंह ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल और अपने समस्त साथियों की ओर से वे चौधरी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और परिवार तथा समर्थकों को इस कठिन घड़ी में सहने की शक्ति की कामना करते हैं।
राम गोविंद चौधरी: एक राजनीतिक विरासत
गौरतलब है कि राम गोविंद चौधरी 1977 में पहली बार विधायक बने और इसके बाद बलिया से आठ बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। आपातकाल के दौर में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी और 14 महीने की जेल यात्रा उनके राजनीतिक जीवन की आधारशिला रही। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस पीढ़ी के नेताओं की संख्या तेज़ी से घट रही है जिन्होंने समाजवादी आंदोलन को अपनी जड़ों से सींचा था।
उनके निधन से न केवल सपा बल्कि समूचे विपक्षी खेमे में एक गहरी रिक्तता आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बलिया जैसे सामाजिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील ज़िले में उनकी जमीनी पकड़ की भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा।