4 अक्टूबर 2026
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सपा के 34 साल: पंकज चौधरी का आरोप — विकास नहीं, कांड-कारनामे ही रहे चर्चा में

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सपा के 34 साल: पंकज चौधरी का आरोप — विकास नहीं, कांड-कारनामे ही रहे चर्चा में

सारांश

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर सपा के 34 साल के सफर को विवादों की फेहरिस्त बताया — रामपुर तिराहा से मुजफ्फरनगर दंगों तक, लैपटॉप घोटाले से भर्ती विवादों तक। यह हमला यूपी में चुनावी जंग की शुरुआती तैयारी का संकेत है।

मुख्य बातें

पंकज चौधरी ने 4 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में प्रेस वार्ता कर सपा के 34 वर्षों के राजनीतिक सफर पर व्यापक हमला बोला।
1994 रामपुर तिराहा कांड , 1995 लखनऊ गेस्ट हाउस कांड और 2013 मुजफ्फरनगर दंगों (60+ मौतें, 50,000+ विस्थापित) का आरोप लगाया।
सपा की मुफ्त लैपटॉप योजना पर दावा — 15 लाख खरीदे, केवल 6 लाख वितरित; प्रचार पर ₹15.06 करोड़ खर्च।
जेपीएनआईसी परियोजना की लागत ₹265 करोड़ से बढ़कर ₹865 करोड़ होने और ₹821 करोड़ खर्च के बाद भी अधूरी रहने का आरोप।
गन्ना किसानों का 2013-2016 में मूल्य ₹280 प्रति क्विंटल पर स्थिर रहने और न्यायालय हस्तक्षेप के बाद राहत का दावा।
चौधरी ने प्रतीकात्मक रूप से 'सपा के पाप का घड़ा' फोड़ा, परिवारवाद और अवसरवादी गठबंधन नीति पर भी निशाना साधा।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी (सपा) के 34 वर्षों के राजनीतिक सफर पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया के आदर्शों के नाम पर शुरू हुई सपा की तीनों सरकारों का कार्यकाल विकास और सुशासन की बजाय विवादों, भ्रष्टाचार और परिवारवाद के कारण अधिक चर्चा में रहा।

मुख्य आरोप और ऐतिहासिक संदर्भ

चौधरी ने सपा की राजनीतिक यात्रा के शुरुआती दौर से ही विवाद जुड़े होने का आरोप लगाया। उन्होंने 1994 के रामपुर तिराहा कांड और 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख किया। उनके अनुसार, उत्तराखंड राज्य की माँग कर रहे आंदोलनकारियों पर कार्रवाई और महिलाओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार की घटनाओं ने सपा की राजनीतिक कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाए।

2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए चौधरी ने कहा कि उस हिंसा में कथित तौर पर 60 से अधिक लोगों की मौत और 50 हजार से अधिक लोगों का विस्थापन हुआ था, जो तत्कालीन सरकार की कानून-व्यवस्था विफलता को दर्शाता है।

अखिलेश यादव सरकार पर निशाना

2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद की सरकार पर भी भाजपा नेता ने हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का केंद्र परिवार के भीतर सिमटा रहा। डिंपल यादव के निर्विरोध निर्वाचन, मुख्यमंत्री के पास बड़ी संख्या में विभागों के रहने और बिजली आपूर्ति में कथित वीआईपी संस्कृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में सपा कार्यकर्ताओं के थानों और प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप के आरोप भी सामने आते रहे।

यादव सिंह प्रकरण का जिक्र करते हुए चौधरी ने कहा कि इस मामले में सीबीआई जाँच और संपत्तियों की जाँच हुई। 2012 से 2017 के बीच यश भारती पुरस्कारों के वितरण पर भी उन्होंने पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठाए।

भर्ती घोटाले और योजनाओं पर सवाल

चौधरी ने सपा सरकार की मुफ्त लैपटॉप योजना पर आरोप लगाया कि करीब 15 लाख लैपटॉप की खरीद के बावजूद लगभग 6 लाख ही वितरित किए गए। उन्होंने दावा किया कि बेरोजगारी भत्ते के नाम पर ₹20.58 करोड़ बांटे गए, जबकि इसके प्रचार पर ₹15.06 करोड़ खर्च किए गए।

72,825 शिक्षक भर्ती, 2016 के जल निगम भर्ती प्रकरण और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में भर्ती से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सपा शासन में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठते रहे। जेपीएनआईसी परियोजना पर उन्होंने आरोप लगाया कि ₹265 करोड़ की परियोजना की लागत बढ़कर ₹865 करोड़ हो गई और ₹821 करोड़ खर्च होने के बाद भी यह अधूरी रही।

महिला सुरक्षा, किसान और गठबंधन नीति पर आरोप

भाजपा नेता ने बदायूं कांड, कैराना पलायन और पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड का उल्लेख करते हुए महिला सुरक्षा और पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर सपा सरकार को घेरा। किसानों के सवाल पर उन्होंने दावा किया कि 2013 से 2016 के बीच गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य ₹280 प्रति क्विंटल पर स्थिर रहा और न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही किसानों को राहत मिली।

सपा की गठबंधन नीति पर हमला बोलते हुए चौधरी ने 2016 में मुख्तार अंसारी से जुड़ी पार्टी के साथ गठबंधन की कथित कोशिश, 2014 में यादव परिवार के सदस्यों का सपा की पाँचों लोकसभा सीटों से निर्वाचित होना और 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन को परिवारवाद और अवसरवादी राजनीति का उदाहरण बताया।

भाजपा का संदेश और आगे की राजनीति

प्रेस वार्ता के दौरान चौधरी ने प्रतीकात्मक रूप से 'सपा के पाप का घड़ा' फोड़ा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अब विकास, सुशासन और कानून के राज को प्राथमिकता दे रही है और सपा को अपने 34 वर्षों के राजनीतिक सफर का हिसाब जनता के सामने देना होगा। यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों द्वारा अभी से तेज की जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आलोचनात्मक पाठक के लिए अलग करना ज़रूरी है। मुजफ्फरनगर दंगों जैसे गंभीर दस्तावेज़ीकृत तथ्यों को लैपटॉप वितरण के आँकड़ों के साथ रखना, राजनीतिक प्रेस वार्ता की सुनियोजित रणनीति है। असली सवाल यह है कि क्या भाजपा इन मुद्दों को चुनावी एजेंडे में तब्दील कर पाएगी या सपा इन आरोपों का प्रभावी खंडन करेगी। उत्तर प्रदेश की जनता को यह तय करना होगा कि 'हिसाब का घड़ा' किस पार्टी के लिए फूटता है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंकज चौधरी ने सपा पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा के 34 वर्षों के राजनीतिक सफर पर आरोप लगाया कि इस दौरान विकास से ज्यादा विवाद, भ्रष्टाचार, भर्ती घोटाले, कानून-व्यवस्था की विफलता और परिवारवाद हावी रहा। उन्होंने रामपुर तिराहा कांड, मुजफ्फरनगर दंगे, लैपटॉप योजना और जेपीएनआईसी परियोजना सहित कई विवादों का उल्लेख किया।
मुजफ्फरनगर दंगों पर भाजपा ने क्या कहा?
चौधरी ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का हवाला देते हुए कहा कि उस हिंसा में 60 से अधिक लोगों की मौत और 50 हजार से अधिक लोगों का विस्थापन हुआ था, जो तत्कालीन सपा सरकार की कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
सपा की लैपटॉप योजना पर क्या आरोप लगाया गया?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि सपा सरकार में करीब 15 लाख लैपटॉप खरीदे गए लेकिन केवल लगभग 6 लाख ही वितरित किए गए। साथ ही बेरोजगारी भत्ते के नाम पर ₹20.58 करोड़ बांटे गए जबकि इसके प्रचार पर ₹15.06 करोड़ खर्च किए गए।
जेपीएनआईसी परियोजना विवाद क्या है?
चौधरी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान जेपीएनआईसी परियोजना की मूल लागत ₹265 करोड़ से बढ़कर ₹865 करोड़ हो गई और ₹821 करोड़ खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी रही। उन्होंने नियमों और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का भी आरोप लगाया।
भाजपा का यह हमला किस राजनीतिक संदर्भ में आया है?
यह प्रेस वार्ता ऐसे समय में हुई जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों द्वारा तेज की जा रही हैं। भाजपा ने सपा के 34 वर्षों के शासन को जनता के सामने रखकर चुनावी नैरेटिव स्थापित करने की कोशिश की है।
राष्ट्र प्रेस
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