26 सितंबर 2026
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राम गोविंद चौधरी के निधन पर अखिलेश यादव भावुक, सपा ने बताया समाजवादी आंदोलन की अपूरणीय क्षति

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राम गोविंद चौधरी के निधन पर अखिलेश यादव भावुक, सपा ने बताया समाजवादी आंदोलन की अपूरणीय क्षति

सारांश

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक युग का अंत — सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी के निधन पर अखिलेश यादव भावुक हुए, तो BJP विधायक ने भी उन्हें 'अभिभावक' बताया। यह सर्वदलीय शोक उनके कद की गवाही देता है।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और यूपी विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का 26 सितंबर 2026 को निधन हो गया।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लखनऊ के निशातगंज स्थित मेट्रो सिटी अपार्टमेंट पहुँचे और पार्थिव शरीर पर पार्टी का झंडा रखकर श्रद्धांजलि दी।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह , मंत्री ओम प्रकाश राजभर और BJP विधायक केतकी सिंह समेत सर्वदलीय नेताओं ने शोक व्यक्त किया।
चौधरी ने वर्ष 1977 में चिलकहर सीट से पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया था।
2017 से 2022 तक वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष रहे और सपा के राष्ट्रीय सचिव भी थे।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी के निधन से 26 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में गहरे शोक की लहर फैल गई। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लखनऊ के निशातगंज स्थित मेट्रो सिटी अपार्टमेंट पहुँचे और चौधरी के पार्थिव शरीर पर समाजवादी पार्टी का झंडा रखकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

अखिलेश यादव की श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि के दौरान अखिलेश यादव स्पष्ट रूप से भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, 'राम गोविंद चौधरी जी समाजवादी आंदोलन के नेता रहे और शुरुआती दौर में जिस समय समाजवाद की पहचान बनानी थी, उस पीढ़ी के वो लोग हैं।' सपा अध्यक्ष ने आगे कहा, 'वह बहुत प्रभावी ढंग से अपनी बात को रखते थे। उनके न रहने पर समाजवादी आंदोलन को क्षति हुई है। समाजवादी पार्टी को बहुत बड़ी क्षति हुई है। इस दुख की घड़ी में हम सब समाजवादी लोग उनके परिवार के साथ हैं।'

सर्वदलीय शोक का माहौल

उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी चौधरी के आवास पहुँचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। बलिया के बांसडीह से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक केतकी सिंह ने भी शोक व्यक्त किया। केतकी सिंह ने कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद राम गोविंद चौधरी राजनीति में उनके लिए अभिभावक के समान थे और जनसेवा तथा जमीनी संघर्ष के प्रति उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी शोक संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा, 'यह बहुत दुखद घटना है। वे एक लोकप्रिय नेता थे जिन्होंने संसद से लेकर सड़कों तक गरीबों, कमजोर वर्गों, पिछड़े वर्गों, दलितों और वंचितों के लिए लड़ाई लड़ी।' चौधरी के आवास पर विभिन्न दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं और परिचितों के पहुँचने का सिलसिला जारी रहा और पूरे परिसर में शोक का वातावरण छाया रहा।

राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर

राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति से आरंभ हुआ। बलिया जिले से आने वाले चौधरी ने वर्ष 1977 के विधानसभा चुनाव में चिलकहर विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। वर्ष 1990 से 1991 के बीच मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री की जिम्मेदारी निभाई।

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बांसडीह से जीत के बाद अखिलेश यादव सरकार में उन्हें बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2017 में पुनः बांसडीह से विजयी होने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया गया और उन्होंने 2017 से 2022 तक यह दायित्व संभाला। वे सपा के राष्ट्रीय सचिव भी रहे और पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।

पूर्वांचल की राजनीति में स्थान

लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान राम गोविंद चौधरी पूर्वांचल की राजनीति में समाजवादी पार्टी के प्रमुख स्तंभों में से एक रहे। गौरतलब है कि वे उस पीढ़ी के नेता थे जिसने जमीनी स्तर पर समाजवादी विचारधारा की नींव रखी। उनके जाने से पार्टी ने एक अनुभवी और मुखर आवाज खो दी है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस पीढ़ी के अंतिम स्तंभों में से एक का जाना है जिसने पूर्वांचल में जमीनी समाजवाद को जीवित रखा। उल्लेखनीय यह है कि BJP के नेताओं ने भी खुलकर शोक जताया, जो दर्शाता है कि उनकी स्वीकार्यता विचारधारा की सीमाओं से परे थी। यह पल सपा के लिए यह सोचने का भी अवसर है कि क्या पार्टी के पास अब वैसे नेता हैं जो बिना पद के भी जनता के बीच उतनी ही प्रतिष्ठा रखते हों। ऐसे अनुभवी स्तंभों का रिक्त स्थान संगठन में रणनीतिक शून्य छोड़ता है जिसे भरना आसान नहीं।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम गोविंद चौधरी कौन थे?
राम गोविंद चौधरी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष थे। बलिया जिले से आने वाले चौधरी ने 1977 से शुरू कर दशकों तक यूपी की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और पूर्वांचल में सपा के प्रमुख नेताओं में शुमार रहे।
अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी को किस तरह श्रद्धांजलि दी?
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 26 सितंबर 2026 को लखनऊ के निशातगंज स्थित मेट्रो सिटी अपार्टमेंट पहुँचे और चौधरी के पार्थिव शरीर पर समाजवादी पार्टी का झंडा रखकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। इस दौरान अखिलेश यादव भावुक नजर आए।
राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक करियर कैसा रहा?
उन्होंने 1977 में चिलकहर विधानसभा सीट से पहली जीत दर्ज की। 1990-91 में मुलायम सिंह यादव सरकार में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री रहे, 2012 में अखिलेश सरकार में बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण मंत्री बने और 2017 से 2022 तक यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
क्या अन्य दलों के नेताओं ने भी शोक जताया?
हाँ, BJP विधायक केतकी सिंह ने चौधरी को 'अभिभावक' बताते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति कहा। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी उनके आवास पहुँचे और विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से शोक संवेदनाओं का सिलसिला जारी रहा।
राम गोविंद चौधरी का सपा संगठन में क्या स्थान था?
वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी रहे और पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्वांचल की राजनीति में वे सपा के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और जमीनी समाजवादी आंदोलन को मजबूत करने में उनकी केंद्रीय भूमिका रही।
राष्ट्र प्रेस
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