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क्या विधायक राकेश प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद अपनी बात खुलकर कहने की योजना बनाई है?

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क्या विधायक राकेश प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद अपनी बात खुलकर कहने की योजना बनाई है?

सारांश

समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद विधायक राकेश प्रताप सिंह ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में पार्टी की नीतियों पर कटाक्ष किया है। वे अब खुलकर अपनी बात रखने का इरादा रखते हैं। क्या यह उनके लिए नई शुरुआत होगी?

मुख्य बातें

राकेश प्रताप सिंह ने सपा के निष्कासन का स्वागत किया।
उन्होंने स्वतंत्रता से अपनी बात कहने की इच्छा व्यक्त की।
सपा की नीतियों पर सवाल उठाए गए।
मनोज कुमार पांडेय ने भी अपने निष्कासन पर हैरानी जताई।
सपा को परिवार केंद्रित राजनीति पर कटाक्ष किया गया।

लखनऊ, 23 जून (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी से सोमवार को निकाले जाने के बाद विधायक राकेश प्रताप सिंह और मनोज कुमार पांडेय की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी में काम करने वाले लोगों की कोई आवश्यकता नहीं है।

विधायक राकेश प्रताप सिंह ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा, "मैं इस निर्णय का स्वागत करता हूं और अब स्वतंत्रता के साथ अपनी बातें कह सकूंगा। पहले भी मैंने अपनी राय रखी थी, लेकिन मुझे बागी कहा जाता था। अब मैं पूरी स्वतंत्रता से बात कर सकूंगा। कोई मुझे बागी कहने की हिम्मत नहीं करेगा।" उन्होंने यह भी कहा कि सपा केवल अपने परिवार को आगे बढ़ाने में लगी है।

उन्होंने सपा के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन्हें निर्णय लेना था, उन्हें तुरंत निर्णय लेना चाहिए था। पार्टी से निष्कासन के इस निर्णय में इतनी देरी क्यों हुई? उन्होंने सपा के 'पीडीए' का मजाक उड़ाते हुए कहा कि इसका मतलब 'परिवार विकास प्राधिकरण' है।

गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अक्सर पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) की चर्चा करते हैं और इसे पार्टी की राजनीति का मूल आधार मानते हैं।

विधायक मनोज कुमार पांडेय ने कहा, "मैं सपा के शीर्ष नेतृत्व से पूछना चाहता हूं कि मैं तो एक वर्ष से इस दल में नहीं था। मैंने तो एक वर्ष पहले भाजपा ज्वाइन कर ली थी। ऐसे में सपा का यह कैसा निष्कासन है?"

उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की जनता जानती है कि जब श्री राम का सवाल आया तो मैंने जनता की बात सुनी और जनता भगवान श्री राम के साथ थी। एक वर्ष पहले 18 मई 2024 को लाखों लोगों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में सपा को छोड़कर भाजपा ज्वाइन की। मैं हैरान हूं कि एक साल से दल में नहीं हूं तो निष्कासन किसका हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का कहना है कि अंतरात्मा मर चुकी है, उन्हें यह समझना चाहिए कि अंतरात्मा तो उनकी मर जाती है, जिनकी जिंदा नहीं होती है।

उन्होंने कहा, "मैं किसी के सहयोग से विधायक नहीं हूं। मेरी विधानसभा की देवतुल्य जनता ने मुझे अपना असीम प्रेम दिया है। इसलिए, मैं उनकी सेवा में हमेशा तत्पर हूं। मेरी जनता मेरे साथ चट्टान की तरह खड़ी है। मैंने अत्याचार के खिलाफ अपनी बातों को रखा है और आगे भी रखूंगा।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपने भीतर की असंतोष को नियंत्रित करने में असफल रही है। राकेश प्रताप सिंह जैसे नेता पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाकर सच में कई लोगों का ध्यान खींच सकते हैं। यह मुद्दा जनता के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें अपने प्रतिनिधियों से सही दिशा और समर्थन की उम्मीद होती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राकेश प्रताप सिंह ने सपा से बाहर जाने के बाद क्या कहा?
राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि अब वे स्वतंत्रता से अपनी बात कह सकेंगे और सपा की नीतियों पर सवाल उठाएंगे।
मनोज कुमार पांडेय ने अपने निष्कासन पर क्या टिप्पणी की?
मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि वे एक वर्ष से सपा में नहीं थे और इस निष्कासन को समझ नहीं पा रहे हैं।
क्या राकेश प्रताप सिंह अब भाजपा में शामिल होंगे?
राकेश प्रताप सिंह ने पहले ही भाजपा ज्वाइन कर ली थी और अब अपनी बात स्वतंत्रता से कहने का इरादा रखते हैं।
सपा का 'पीडीए' क्या है?
सपा का 'पीडीए' का मतलब 'पारिवारिक विकास प्राधिकरण' बताया गया है।
राकेश प्रताप सिंह के अनुसार सपा की असली राजनीति क्या है?
राकेश प्रताप सिंह का मानना है कि सपा केवल अपने परिवार को आगे बढ़ाने में लगी है।
राष्ट्र प्रेस
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