सेंसेक्स 43 अंक ऊपर, 78,542 पर बंद; होर्मुज अनिश्चितता से बाजार सपाट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार सोमवार, 10 अगस्त 2026 को उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद मामूली बढ़त के साथ लगभग सपाट बंद हुआ। होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क रखा, जिससे बाजार में कोई निर्णायक दिशा नहीं बन सकी।
मुख्य सूचकांकों का प्रदर्शन
BSE सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,542.44 पर बंद हुआ। निफ्टी50 ने भी 13.15 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली तेजी दर्ज करते हुए 24,583.80 पर कारोबार समाप्त किया। यह बढ़त नाममात्र की रही, लेकिन दिनभर के उतार-चढ़ाव को देखते हुए बाजार का सकारात्मक दायरे में बंद होना उल्लेखनीय है।
व्यापक बाजार का हाल
निफ्टी मिडकैप में 0.62 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। गौरतलब है कि दोनों सूचकांक अभी भी अपने-अपने रिकॉर्ड उच्च स्तरों के करीब कारोबार कर रहे हैं, जो व्यापक बाजार में बनी हुई अंतर्निहित मजबूती को दर्शाता है।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी पीएसयू बैंक में लगभग 2 प्रतिशत की तेज गिरावट आई और यह दिन का सबसे कमजोर सेक्टर रहा। निफ्टी फार्मा और निफ्टी एफएमसीजी का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। दूसरी ओर, निफ्टी रियल्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार में सकारात्मक योगदान दिया।
निफ्टी50 में सर्वाधिक बढ़त पाने वाले शेयरों में टाइटन, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम और टाटा स्टील शामिल रहे। वहीं, एसबीआई, इटरनल, आईटीसी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टीसीएस, विप्रो और कोल इंडिया के शेयर दबाव में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सत्रों में निफ्टी के लिए 24,750 से 24,800 का दायरा अहम रेजिस्टेंस जोन रहेगा। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो 24,950 और उसके बाद 25,100 के स्तर तक तेजी संभव है।
गिरावट की स्थिति में 24,450 से 24,420 का क्षेत्र निफ्टी के लिए निकटतम मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सूचकांक इस सपोर्ट के ऊपर बना रहेगा, बाजार की समग्र संरचना सकारात्मक रहने की संभावना है।
आगे क्या
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर इसके असर को लेकर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल है। आगामी सत्रों में इन संकेतकों के आधार पर बाजार की दिशा तय होगी।