29 जुलाई 2026
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भाजपा नेता राजेश यादव का आरोप: सपा अपने नाम से डरी, 'पीडीए' की आड़ में छिप रही है पार्टी

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भाजपा नेता राजेश यादव का आरोप: सपा अपने नाम से डरी, 'पीडीए' की आड़ में छिप रही है पार्टी

सारांश

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव ने फिरोजाबाद में आरोप लगाया कि सपा अपनी पुरानी नकारात्मक छवि से बचने के लिए 'पीडीए' की आड़ ले रही है और पार्टी अब तक इस नारे की स्पष्ट परिभाषा भी नहीं दे पाई है। 2027 चुनाव में भाजपा की जीत का दावा।

मुख्य बातें

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव ने 29 जुलाई को फिरोजाबाद में सपा पर तीखा हमला बोला।
आरोप — समाजवादी पार्टी अपनी पुरानी छवि छिपाने के लिए 'पीडीए' नारे की आड़ ले रही है।
राजेश यादव ने अखिलेश यादव से पीडीए में 'ए' का अर्थ — अगड़ा या अल्पसंख्यक — स्पष्ट करने की माँग की।
भाजपा का दावा — 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता फिर भाजपा को समर्थन देगी।
भाजपा ने विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था को अपना मुख्य चुनावी एजेंडा बताया।

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव ने 29 जुलाई को फिरोजाबाद में समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अपनी पुरानी और नकारात्मक छवि से पीछा छुड़ाने के लिए अब 'पीडीए' के नारे की आड़ लेने की कोशिश कर रही है। राजेश यादव ने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता एक बार फिर भाजपा के पक्ष में खड़ी होगी।

मुख्य आरोप: नाम से ही भागती है सपा

राजेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की पहचान ऐतिहासिक रूप से कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति, अपराध और अराजकता से जुड़ी रही है। उनके अनुसार, जनता के मन में यह छवि आज भी ताज़ी है और इसीलिए सपा अपने नाम को पीछे धकेलकर 'पीडीए' को आगे कर रही है।

उन्होंने कहा, 'समाजवादी पार्टी दरअसल अपने नाम से डर रही है। समाजवादी पार्टी का नाम आते ही लोगों को पुराने दौर की याद आ जाती है। इसलिए अब वह समाजवादी पार्टी का नाम पीछे रखकर पीडीए को आगे करने की कोशिश कर रही है।'

पीडीए की परिभाषा पर सवाल

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी अब तक पीडीए की स्पष्ट व्याख्या नहीं कर पाई है। उनके अनुसार, अखिलेश यादव को पहले यह बताना चाहिए कि पीडीए में 'पी' और 'ए' का वास्तविक अर्थ क्या है — इसमें 'ए' का मतलब अगड़ा है या अल्पसंख्यक। राजेश यादव ने आरोप लगाया कि पीडीए महज एक राजनीतिक नारा बनकर रह गया है, जिसका उद्देश्य सपा की पुरानी छवि से दूरी बनाना है।

भाजपा की रणनीति और जातीय समीकरण

जब उनसे पूछा गया कि एक ओर भाजपा जातीय समीकरण साधने में जुटी है और दूसरी ओर सपा पीडीए का नारा दे रही है, तो राजेश यादव ने कहा कि दोनों दलों की राजनीति में बुनियादी फर्क है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश की जनता विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था के आधार पर अपना फैसला करती है और भाजपा इन्हीं मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी।

2027 चुनाव पर दावा

राजेश यादव ने विश्वास जताया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता एक बार फिर भाजपा को बहुमत देगी। उन्होंने कहा कि जनता जानती है कि विकास और सुरक्षा के मामले में किस पार्टी का रिकॉर्ड बेहतर है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दल अभी से अपनी-अपनी रणनीतियाँ तेज कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि सपा ने सार्वजनिक रूप से इसकी कोई आधिकारिक व्याख्या नहीं दी है। असली सवाल यह है कि क्या भाजपा खुद विकास और सुशासन के दावों को 2027 तक ज़मीन पर साबित कर पाएगी — क्योंकि जनता का फैसला नारों से नहीं, नतीजों से होता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा नेता राजेश यादव ने सपा के 'पीडीए' नारे पर क्या कहा?
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अपनी पुरानी नकारात्मक छवि से बचने के लिए 'पीडीए' नारे की आड़ ले रही है। उनके अनुसार, पीडीए केवल एक राजनीतिक नारा है जिसकी स्पष्ट परिभाषा सपा खुद नहीं दे पाई है।
पीडीए नारे में 'ए' का अर्थ क्या है — यह विवाद क्यों है?
राजेश यादव ने सवाल उठाया कि पीडीए में 'ए' का मतलब 'अगड़ा' है या 'अल्पसंख्यक' — और अखिलेश यादव को इसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए। यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि 'ए' की परिभाषा सपा के जातीय गठबंधन की दिशा तय करती है।
2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा का क्या दावा है?
भाजपा नेता राजेश यादव ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता एक बार फिर भाजपा को समर्थन देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर जनता के बीच जाएगी।
समाजवादी पार्टी की 'पुरानी छवि' से भाजपा का क्या आशय है?
राजेश यादव के अनुसार, सपा की पहचान ऐतिहासिक रूप से कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति, अपराध और अराजकता से जुड़ी रही है। उनका कहना है कि जनता के मन में यह छवि अभी भी बनी हुई है, इसीलिए सपा अपने नाम की जगह 'पीडीए' को प्रचारित कर रही है।
भाजपा और सपा की राजनीति में राजेश यादव के अनुसार क्या अंतर है?
राजेश यादव ने कहा कि भाजपा की राजनीति विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था पर आधारित है, जबकि सपा की राजनीति नारों और जातीय समीकरणों पर टिकी है। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश की जनता नारों से नहीं, ज़मीनी नतीजों के आधार पर वोट देती है।
राष्ट्र प्रेस
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