भाजपा अखिलेश यादव की दादरी रैली से चिंतित: रविदास मेहरोत्रा का बयान
सारांश
Key Takeaways
- अखिलेश यादव की रैली को भाजपा ने असफल बताया है।
- सपा नेता ने इसे ऐतिहासिक करार दिया।
- 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार आने का दावा।
- भाजपा की चिंताएँ बढ़ी हैं।
- राजनीतिक रणनीतियाँ तेजी से बदल रही हैं।
लखनऊ, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी काफी समय बचा है, लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने दादरी में रैली आयोजित कर चुनावी गतिविधियों की शुरुआत कर दी है। इस रैली को भाजपा ने असफल बताया है, जिसके जवाब में सपा के नेता ने प्रतिक्रियाएँ दी हैं।
सपा के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने अखिलेश यादव की दादरी रैली को ऐतिहासिक और विशाल बताते हुए कहा कि इसके परिणामस्वरूप भाजपा नेता चिंतित हो गए हैं।
लखनऊ में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में मेहरोत्रा ने कहा कि दादरी में अखिलेश यादव की रैली अत्यंत सफल रही। भाजपा के सदस्यों में इस रैली को लेकर हड़बड़ी मची हुई है। यही कारण है कि वे हमारे खिलाफ झूठे बयान दे रहे हैं, वे पीडीए समाज के विरोध में हैं।
रविदास मेहरोत्रा ने यह भी कहा कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी और अखिलेश यादव फिर से मुख्यमंत्री का पद संभालेंगे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का जनाधार निरंतर बढ़ रहा है, जिससे भाजपा में घबराहट फैल गई है।
इस पर सपा के नेता के जवाब में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखा जवाब दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि भाजपा के डर से पहले मंदिर का निर्माण और अब प्रभु श्रीरामलला की मूर्ति लगाने की चर्चा करना, यह सपा की 'अवसरवादी' राजनीति का नया रूप है। विडंबना यह है कि जिस सपा और उनके सदस्यों के खून से रामभक्तों का दामन दागदार हो चुका है, वे आज रामभक्ति का नाटक कर रहे हैं। यदि वास्तव में आस्था का सम्मान होता और नीयत सही होती तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बनी ईदगाह को हटाने का प्रयास करते और बाबरी समर्थकों के खिलाफ भी आवाज उठाते। अब सपा न तो रामभक्तों का विश्वास जीत सकेगी और न ही अपना कथित 'वोट बैंक' बचा पाएगी। 2027 में उन्हें न तो हिंदू मिलेगा और न मुसलमान, केवल सैफई में स्थान प्राप्त होगा।