ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव की दादरी रैली को बताया असफल
सारांश
Key Takeaways
- ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव की रैली को असफल बताया।
- जनता सपा के कार्यकाल को नहीं भूली है।
- भाजपा सरकार में सुशासन का राज है।
- सपा की तुष्टिकरण की राजनीति का विरोध हो रहा है।
- उत्तर प्रदेश तीसरी बार भाजपा सरकार बनाने की ओर अग्रसर है।
लखनऊ, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव की दादरी में आयोजित जनसभा को असफल करार दिया।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा प्रमुख चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन जनता उनके कार्यकाल को नहीं भूली है। इसलिए, उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की दाल नहीं गलेगी। उन्होंने दावा किया कि सपा का दादरी दौरा पूरी तरह से असफल रहा है। जनसभा में खाली कुर्सियों ने यह साबित कर दिया कि उनकी रैली सफल नहीं रही। सौ विधानसभा के कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करने के बावजूद जनसभा में कुर्सियां खाली रहीं।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का एकमात्र विजन गुंडाराज, भ्रष्टाचार और जातिवाद के पुराने हथकंडों से सत्ता प्राप्त करना है। सपा का पीडीए केवल परिवार विकास प्राधिकरण है। अखिलेश यादव कितनी भी रैलियां करें, लेकिन गुंडाराज, भ्रष्टाचार और परिवारवाद का युग समाप्त हो चुका है। इनकी रैलियों का जनता से कोई सरोकार नहीं है और न ही जनता का इनसे कोई सरोकार है। लोग सपा के पिछले कार्यों को भूले नहीं हैं। दंगों के दौरान कितने बच्चे अनाथ हो गए और कितनी माताओं की गोद सूनी हो गई। बेटियां असुरक्षित थीं और बेटों का अधिकार छिना जाता था। लूट और अपहरण के उस अंधकार के युग को जनता कभी नहीं भूल सकती और न ही इन्हें माफ करने वाली है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार में सुशासन है, जहां सेवा, समर्पण, सम्मान और गरीब कल्याण की नीतियों के कारण जनता खुशहाल है। उत्तर प्रदेश अभूतपूर्व उपलब्धियों के साथ तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। जिस नोएडा का उल्लेख किया गया, उस नोएडा को हमारी सरकार ने अंधविश्वास के अंधकार से बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। जनता का आशीर्वाद और विश्वास सिर्फ भाजपा के साथ है।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा की दादरी रैली ‘सद्भावना’ नहीं, बल्कि ‘दुर्भावना’ रैली साबित हुई। यह रैली उस अराजक दौर की याद दिलाने का प्रयास थी, जब कानून-व्यवस्था पर सवाल उठते थे और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। सपा मुखिया अखिलेश यादव की तुष्टिकरण की राजनीति फिर से सामने आई है, जिसने प्रदेश को ‘अराजकता और असुरक्षा’ के दौर में धकेला था। यह रैली 2012 से 2017 के सपा शासनकाल के उस अंधेरे अध्याय को फिर से जीवित करने की कोशिश थी, जिसे प्रदेश की जनता नकार चुकी है।