प्रदीप रावत के बेटे विक्रमादित्य का खुलासा: 'पिता सेना में जाना चाहते थे, अभिनेता बनना नहीं था सपना'
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत, जिन्होंने बी.आर. चोपड़ा की 'महाभारत' में अश्वत्थामा और आमिर खान की फिल्म 'गजनी' में अपने खलनायक किरदार से करोड़ों दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी, 5 अगस्त 2026 को 74 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह गए। उनके निधन के बाद उनके पुत्र विक्रमादित्य रावत ने पिता की जिंदगी के कई अनजाने पहलुओं से पर्दा उठाया है, जो अब तक आम जनता से छिपे हुए थे।
सेना का सपना, किस्मत ने मोड़ा रास्ता
विक्रमादित्य ने खुलासा किया कि उनके पिता का पहला सपना अभिनय नहीं, बल्कि भारतीय सेना में भर्ती होना था। उन्होंने कहा, 'मेरे पिता का पहला सपना अभिनेता बनना नहीं था। वह असल में सेना में जाना चाहते थे। दादाजी भी सैनिक थे। इसी वजह से उनके मन में बचपन से सेना में जाने की इच्छा थी। हालांकि, वह अपना यह सपना पूरा नहीं कर सके और बाद में किस्मत उन्हें अभिनय की दुनिया में ले आई।' यह जानकारी प्रदीप रावत की उस छवि से बिल्कुल अलग है, जो उनके प्रशंसकों ने वर्षों से बनाई थी।
आत्मनिर्भरता थी उनकी पहचान
विक्रमादित्य के अनुसार, उनके पिता स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की जीती-जागती मिसाल थे। उन्होंने बताया, 'मेरे पिता बेहद आत्मनिर्भर स्वभाव के इंसान थे। वह किसी के सामने मदद के लिए हाथ फैलाने में विश्वास नहीं रखते थे। अगर उनके पास जेब में सिर्फ 10 रुपए होते और खाने के लिए 20 रुपए की जरूरत होती, तब भी वह किसी से 10 रुपए मांगना पसंद नहीं करते थे।' यह स्वभाव उनके संघर्ष के दिनों में भी उनकी पहचान बना रहा।
पिता से मिली जीवन की सबसे बड़ी सीख
विक्रमादित्य ने बताया कि प्रदीप रावत का जीवन-दर्शन बेहद सरल लेकिन गहरा था। उनके शब्दों में, 'पिता से मुझे जिंदगी की सबसे बड़ी सीख यही मिली कि इंसान को मेहनत करते रहना चाहिए, भगवान पर भरोसा रखना चाहिए और बाकी चीजों को किस्मत पर छोड़ देना चाहिए। उनका मानना था कि हर चीज इंसान के हाथ में नहीं होती। व्यक्ति अपना काम ईमानदारी और पूरी मेहनत से करे, उसके बाद जो नतीजा मिले, उसे स्वीकार करना चाहिए।' यह सोच उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी।
पिता का अधूरा सपना पूरा करने का संकल्प
विक्रमादित्य ने यह भी बताया कि प्रदीप रावत की एक गहरी इच्छा थी कि उनका बेटा फिल्मी दुनिया में बड़ा नाम बनाए। उन्होंने कहा, 'पिता की एक बड़ी इच्छा थी कि वह मुझे एक स्टार के रूप में देखें। अब मैं उनके इस सपने को पूरा करूंगा।' यह संकल्प उन्होंने पिता को श्रद्धांजलि के रूप में व्यक्त किया।
प्रदीप रावत का फिल्मी सफर और निधन
प्रदीप रावत ने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों और टेलीविजन में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। बी.आर. चोपड़ा की महाकाव्य धारावाहिक 'महाभारत' में उनके द्वारा निभाया गया अश्वत्थामा का किरदार उन्हें घर-घर में पहचान दिलाने वाला बना। आमिर खान अभिनीत फिल्म 'गजनी' में उनके खलनायक किरदार ने उन्हें बॉलीवुड में एक अलग मुकाम दिलाया। वह कैंसर से जूझ रहे थे और बताया जा रहा है कि निधन से कुछ सप्ताह पूर्व उनकी बीमारी फिर से बढ़ गई थी। उनके जाने की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। विक्रमादित्य के इस खुलासे ने प्रशंसकों को उनके प्रिय अभिनेता की एक नई, मानवीय तस्वीर से रू-ब-रू कराया है।