अभिनेता प्रदीप रावत का 74 साल में निधन, 'लगान' के गजनी देवा को बॉलीवुड की श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के अनुभवी अभिनेता प्रदीप रावत का 4 अगस्त 2026 को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 'लगान' (2001) में गजनी देवा और 'गजनी' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाओं से पहचाने जाने वाले रावत तीन दशकों से अधिक समय तक हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं के सिनेमा का हिस्सा रहे। कथित तौर पर वे कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे और निधन से पहले अस्पताल में भर्ती थे।
निधन की सूचना कैसे मिली
प्रदीप रावत के निधन की दुखद जानकारी उनके पुराने साथी और अभिनेता यशपाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के ज़रिये दी। यशपाल शर्मा स्वयं 'लगान' फिल्म का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने लिखा, 'प्रदीप रावत, 'लगान' के हमारे गजनी देवा, भगवान आपकी आत्मा को शांति दे।' रावत अपने पीछे पत्नी और बेटे विक्रमादित्य को छोड़ गए हैं।
करियर का सफर: तीन दशक, अनेक भाषाएँ
प्रदीप रावत ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1985 में बॉलीवुड फिल्म 'मेरी जंग' से की थी, जिसमें वे एक पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका में नज़र आए। इसके बाद 'समुंदर' (1986) में उन्होंने एक नेवल ऑफिसर का किरदार निभाया।
असली पहचान उन्हें बीआर चोपड़ा के चर्चित टीवी धारावाहिक 'महाभारत' में अश्वत्थामा की भूमिका से मिली — एक ऐसा किरदार जो दर्शकों के मन में आज भी जीवित है। 1990 में वे 'अग्निपथ' में अमिताभ बच्चन के साथ परदे पर आए।
1999 में आमिर खान की फिल्म 'सरफरोश' में उन्होंने 'सुल्तान' का अहम किरदार निभाया। 'लगान' (2001) में उनका 'देवा सिंह सोढ़ी' — वह ग्रामीण जो ब्रिटिश अधिकारी के विरुद्ध भुवन (आमिर खान) की क्रिकेट टीम में शामिल होता है — उनके करियर का सबसे यादगार किरदार बना।
बहुभाषी सिनेमा में योगदान
प्रदीप रावत ने हिंदी के अलावा तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी काम किया। उनकी उल्लेखनीय परियोजनाओं में 'द हीरो: लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई', 'स्टालिन', 'वीरम', '1: नेनोक्कडिने', 'लौक्यम', 'नेनु शैलजा', 'सर्राइनोडु', 'नेने राजू नेने मंत्री', 'आयिरथिल इरुवर', 'मार्केट राजा एमबीबीएस' और 'मिस मैच' शामिल हैं। यह विविधता उन्हें केवल बॉलीवुड का नहीं, बल्कि सही अर्थों में भारतीय सिनेमा का अभिनेता बनाती है।
फिल्म जगत की प्रतिक्रिया
यशपाल शर्मा की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और फिल्मी हस्तियों की ओर से श्रद्धांजलियों का तांता लग गया। 'लगान' की टीम के साथ उनका जुड़ाव और उस फिल्म की सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए उनके निधन को एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि प्रदीप रावत उस दौर के उन विरल अभिनेताओं में से थे जिन्होंने खलनायक और सहायक भूमिकाओं को भी उतनी ही गहराई और प्रतिबद्धता से निभाया जितनी मुख्य भूमिकाओं को। उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने एक बहुआयामी और परिश्रमी कलाकार खो दिया है।