प्रदीप रावत की शांति सभा में उमड़े बॉलीवुड सितारे, बेटे विक्रमादित्य बोले — 'पिता ने अहंकार न रखने की सीख दी'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत, जिन्हें 'लगान' और 'गजनी' में उनकी यादगार भूमिकाओं के लिए जाना जाता है, का 4 अगस्त 2026 को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने के बाद 7 अगस्त, शुक्रवार को मुंबई में एक शांति सभा का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म जगत के कई जाने-माने चेहरे उपस्थित हुए। प्रदीप रावत अपने पीछे पत्नी और बेटे विक्रमादित्य को छोड़ गए हैं।
बेटे विक्रमादित्य का भावुक बयान
शांति सभा में विक्रमादित्य भावुक हो उठे। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि प्रदीप रावत लंबे समय से बीमार थे। विक्रमादित्य के अनुसार, उनके पिता की तबीयत दो से ढाई महीने पहले ही बिगड़ी थी, जब जाँच में एक अत्यंत आक्रामक प्रकार के कैंसर का पता चला — जो सामान्यतः युवाओं में देखा जाता है। इस बीमारी के सामने वह अंततः हार गए।
विक्रमादित्य ने अपने पिता को याद करते हुए कहा, 'मेरे पिता काफी खुद्दार इंसान थे। उन्होंने मुझे मेहनत करना सिखाया है। वह चाहते थे कि मैं स्टार बनूं और मैंने भी यही ठाना है। देखते हैं किस्मत मुझे कहां लेकर जाती है।' उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता मूलतः फौजी बनना चाहते थे — उनके दादा जी स्वयं सेना में थे — लेकिन वह सपना पूरा न हो सका और वे अभिनय की दुनिया में आ गए। विक्रमादित्य ने पिता की वह सीख साझा की जो उन्हें जीवन भर याद रहेगी — 'कभी अहंकार मत लाना, हमेशा सिर झुकाकर काम करना।'
साथी कलाकारों की श्रद्धांजलि
अभिनेता अमीन हाजी ने शांति सभा में कहा कि व्यस्त जिंदगी में दोस्तों के साथ बिताया वक्त कितना अनमोल होता है, यह एहसास प्रदीप रावत के जाने के बाद और गहरा हो गया है। उन्होंने बताया कि प्रदीप रावत ने कहा था कि वह जल्द ठीक होकर लौटेंगे और सब मिलकर खुशियाँ मनाएंगे — लेकिन वह वापस नहीं आए।
अभिनेता मुकेश ऋषि ने भी अपनी भावनाएँ साझा कीं। उन्होंने कहा कि प्रदीप रावत अभी भी सक्रिय रूप से काम कर रहे थे और उनका स्वास्थ्य भी उनका साथ दे रहा था। 'हम लोग अगर लंबे समय बाद भी मिलते थे, तो बहुत अपनापन महसूस होता था' — यह कहते हुए मुकेश ऋषि ने ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और परिवार को इस दुख से उबरने की शक्ति देने की कामना की।
प्रदीप रावत का सिनेमाई सफर
प्रदीप रावत ने हिंदी सिनेमा में दशकों तक अपनी छाप छोड़ी। 'लगान' में उनका किरदार दर्शकों के जेहन में आज भी ताज़ा है, जबकि 'गजनी' में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली। उनका व्यक्तित्व फिल्म जगत में उनकी पहचान थी — साथी कलाकारों के अनुसार वह स्क्रीन पर जितने प्रभावशाली थे, व्यक्तिगत जीवन में उतने ही सहज और अपनापन से भरे।
परिवार और आगे की राह
प्रदीप रावत के निधन के बाद उनके बेटे विक्रमादित्य ने स्पष्ट किया है कि वह अपने पिता के सपनों को आगे ले जाने के लिए दृढ़ हैं। विक्रमादित्य ने कहा कि पिता की सीख उनके साथ हमेशा रहेगी और वह उसी मेहनत और विनम्रता के साथ अपना करियर बनाने की कोशिश करेंगे। शांति सभा में उपस्थित सितारों ने परिवार के प्रति एकजुटता दिखाई और इस कठिन घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।