प्रदीप रावत को याद कर भावुक हुईं स्मृति खन्ना: 'वह मुझे बेटी और छोटी बहन दोनों मानते थे'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री स्मृति खन्ना ने दिवंगत अभिनेता प्रदीप रावत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है और उनके साथ बिताए अनमोल पलों को साझा किया है। स्मृति के अनुसार, फिल्म जगत से शुरू हुई यह जान-पहचान समय के साथ एक गहरे पारिवारिक रिश्ते में तब्दील हो गई थी, जिसमें स्नेह, सम्मान और अपनापन भरा था।
पहली मुलाकात से पारिवारिक रिश्ते तक
स्मृति खन्ना ने बताया कि उनकी और प्रदीप रावत की पहली मुलाकात एक पार्टी में एक साझा मित्र के ज़रिए हुई थी। उन्होंने कहा, 'पहली मुलाकात में ही हमारे बीच अच्छा जुड़ाव बन गया। इसके बाद हमारी दोस्ती लगातार मज़बूत होती गई और धीरे-धीरे यह एक खूबसूरत पारिवारिक रिश्ते में बदल गई।' स्मृति ने आगे बताया कि प्रदीप दादा, उनकी पत्नी कल्याणी और दोनों परिवार अक्सर एक साथ समय बिताते थे।
यादों में बसे साझा पल
स्मृति ने बताया कि दोनों परिवारों के बीच इतना अपनापन था कि एक-दूसरे के घर आना-जाना, साथ बैठकर खाना खाना, जन्मदिन मनाना और छुट्टियाँ बिताना आम बात थी। उन्होंने कहा, 'मेरे जन्मदिन पर प्रदीप दादा हमेशा मौजूद रहते थे। हम घंटों तक अंताक्षरी खेलते थे, हँसते थे और खूब बातें करते थे। उनके साथ बिताया गया हर पल आज भी मेरी यादों में ताज़ा है।'
बेटी और छोटी बहन — दोनों का दर्जा
स्मृति ने भावुक होते हुए कहा, 'प्रदीप रावत केवल अच्छे अभिनेता ही नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों से भरपूर इंसान भी थे। वह कभी मुझे अपनी छोटी बहन की तरह मानते थे तो कभी बेटी की तरह। उन्होंने हमेशा प्यार, सम्मान और अपनापन दिया।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रदीप रावत की हाज़िरजवाबी और ऊर्जा ऐसी थी कि उनके आते ही पूरा माहौल बदल जाता था।
करियर में मार्गदर्शन और प्रेरणा
स्मृति ने बताया कि प्रदीप रावत ने उनके अभिनय करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह हमेशा सही सलाह देते थे, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे और कुछ लोगों को उनका नाम भी सुझाया। स्मृति के अनुसार, यह उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी थी कि वह हमेशा चाहते थे कि उनके आसपास के लोग सफल हों।
कैंसर से जूझते हुए भी काम के प्रति समर्पण
स्मृति ने प्रदीप रावत के साहस को नमन करते हुए कहा, 'कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद प्रदीप दादा ने काम के प्रति कभी लापरवाही नहीं दिखाई। उन्होंने शूटिंग जारी रखी और अपने काम को पूरी ईमानदारी से निभाया। वह वास्तव में बेहद साहसी इंसान थे।' स्मृति ने यह भी कहा कि पर्दे पर उनकी मौजूदगी इतनी प्रभावशाली होती थी कि उनका हर किरदार — चाहे खलनायक का हो या किसी गंभीर भूमिका का — यादगार बन जाता था। उनका जीवन और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।