25 सितंबर 2026
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गाजा युद्ध पर यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लूर हसन नहौम का बड़ा बयान: 'संयुक्त राष्ट्र विश्वसनीयता खो चुका है'

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गाजा युद्ध पर यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लूर हसन नहौम का बड़ा बयान: 'संयुक्त राष्ट्र विश्वसनीयता खो चुका है'

सारांश

यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लूर हसन नहौम ने नई दिल्ली में दिए बयान में संयुक्त राष्ट्र को उसकी विश्वसनीयता पर घेरा, UNRWA की कथित 2023 नरसंहार संलिप्तता का हवाला दिया, हमास को गाजा संकट की जड़ बताया और भारत को इज़रायल का अहम भविष्य-साझेदार करार दिया।

मुख्य बातें

फ्लूर हसन नहौम ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि संयुक्त राष्ट्र गाजा युद्ध में इज़रायल-विरोधी रुख अपनाकर अपनी विश्वसनीयता खो चुका है।
UNRWA के कर्मचारियों पर 7 अक्टूबर 2023 के नरसंहार में कथित तौर पर भाग लेने के आरोप को उन्होंने संस्था की साख पर सबसे बड़ा धब्बा बताया।
उन्होंने हमास के सत्ता से हटने और हथियार छोड़ने को गाजा के पुनर्निर्माण की पहली अनिवार्य शर्त बताया।
ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते पर उन्होंने संशय जताया और कहा कि इज़रायल चाहता है कि ईरान की सभी संवर्धित परमाणु सामग्री नष्ट की जाए।
भारत को उन्होंने इज़रायल का प्रमुख रणनीतिक एवं व्यापारिक साझेदार बताया और आईएमईसी तथा आई2यू2 को क्षेत्रीय सहयोग के अहम मंच करार दिया।

यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लूर हसन नहौम ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक विशेष बातचीत में कहा कि संयुक्त राष्ट्र गाजा युद्ध के संदर्भ में अपनी विश्वसनीयता काफी पहले ही खो चुका है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनआरडब्ल्यूए (UNRWA) पर 2023 के नरसंहार में कथित तौर पर संलिप्तता के आरोपों को अपनी इस राय का प्रमुख आधार बताया।

संयुक्त राष्ट्र पर गंभीर सवाल

नहौम ने कहा कि गाजा युद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र की ओर से इज़रायल पर कूटनीतिक दबाव अपने चरम पर पहुँच चुका है। उनके अनुसार, संस्था ने भुखमरी और नरसंहार को लेकर ऐसे दावे किए जिन्हें इज़रायल गलत मानता है। उन्होंने यह भी कहा कि इज़रायल के विरुद्ध कई प्रस्ताव पारित किए गए, जबकि दुनिया के दूसरे अत्यंत घातक संघर्षों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया गया।

नहौम ने यूएनआरडब्ल्यूए का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के कर्मचारियों पर 7 अक्टूबर 2023 के नरसंहार में कथित तौर पर भाग लेने के आरोप लगाए गए थे। उनके अनुसार यही वह क्षण था जब संयुक्त राष्ट्र की साख पर सबसे गहरी चोट पड़ी।

गाजा की स्थिति और हमास पर रुख

गाजा की वर्तमान चुनौतियों पर बात करते हुए नहौम ने कहा कि इस संकट से निकलने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा। उनका कहना था कि सबसे पहले हमास के इस्लामिक कट्टरपंथी नेतृत्व को सत्ता से बाहर करना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि हमास गाजा में माफिया जैसी भ्रष्ट व्यवस्था चला रहा है और लोगों का खाना चुराकर अपने लड़ाकों को धन मुहैया कराता है।

नहौम ने स्पष्ट किया कि जब तक इस स्थिति से नहीं निपटा जाता, तब तक गाजा के पुनर्निर्माण और वहाँ के लोगों के बेहतर भविष्य की दिशा में वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब गाजा में मानवीय संकट की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय बहस जारी है।

ईरान-अमेरिका समझौते पर संशय

ईरान और अमेरिका के बीच किसी संभावित परमाणु समझौते को लेकर नहौम ने गहरी आशंका जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका और ईरान फिलहाल किसी समझौते के निकट हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी यह समझ आ गया होगा कि जिन पर हिंसा और तबाही फैलाने के आरोप हैं, उनके साथ सहमति बनाना आसान नहीं है।

नहौम ने कहा कि अगर कोई समझौता होता भी है, तो वह दीर्घकालिक नहीं होगा। इज़रायल की अपेक्षा यह है कि ईरान की समस्त संवर्धित (एनरिच्ड) परमाणु सामग्री को पूरी तरह नष्ट किया जाए, ताकि भविष्य में उसके परमाणु कार्यक्रम से कोई खतरा न बचे।

भारत-इज़रायल संबंध और क्षेत्रीय सहयोग

भारत और इज़रायल के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों को लेकर नहौम ने सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उन्होंने भारत को एक मजबूत रणनीतिक साझेदार और बड़ा व्यापारिक मित्र बताया। उनका कहना था कि भविष्य की दिशा तय करने में भारत को एक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

नहौम ने आईएमईसी (IMEC) — भारत, मध्य पूर्व, इज़रायल और यूरोप को जोड़ने वाले कॉरिडोर — का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के बहुपक्षीय ढाँचे पूरे क्षेत्र को समृद्धि की दिशा में आगे ले जा सकते हैं। उन्होंने चार देशों के समूह आई2यू2 (I2U2) — जिसमें इज़रायल, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और भारत शामिल हैं — को भी एक उम्मीद की किरण बताया।

गौरतलब है कि यह साक्षात्कार ऐसे समय में हुआ है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र न्यूयॉर्क में जारी है और गाजा युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक प्रयास एक बार फिर तेज़ हुए हैं। नहौम के बयान वैश्विक मंच पर इज़रायल की स्थिति और उसकी आलोचना के बीच की खाई को और स्पष्ट करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

कूटनीतिक तर्क कम और राजनीतिक ढाल अधिक लगता है। गाजा में जारी मानवीय संकट की पृष्ठभूमि में इस बयान की टाइमिंग — संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान — महज संयोग नहीं है। भारत-इज़रायल संबंधों पर उनका आशावाद वास्तविक है, किंतु IMEC जैसी परियोजनाओं की व्यवहार्यता स्वयं क्षेत्रीय स्थिरता पर निर्भर है — जो फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्लूर हसन नहौम कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
फ्लूर हसन नहौम यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर हैं। उन्होंने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि संयुक्त राष्ट्र गाजा युद्ध में इज़रायल-विरोधी रुख और UNRWA पर लगे 2023 नरसंहार संलिप्तता के कथित आरोपों के कारण अपनी विश्वसनीयता खो चुका है।
UNRWA पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
नहौम के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी UNRWA के कुछ कर्मचारियों पर 7 अक्टूबर 2023 के नरसंहार में कथित तौर पर भाग लेने के आरोप लगे थे। ये आरोप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादास्पद रहे हैं और कई देशों ने तब UNRWA की फंडिंग अस्थायी रूप से रोकी थी।
गाजा संकट के समाधान पर नहौम का क्या मत है?
नहौम का मानना है कि गाजा पुनर्निर्माण की पहली शर्त हमास के कट्टरपंथी नेतृत्व को सत्ता से हटाना और उसे हथियार छोड़ने पर मजबूर करना है। उन्होंने गाजा की मौजूदा स्थिति को माफिया जैसी भ्रष्ट व्यवस्था करार दिया।
ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते पर इज़रायल का क्या रुख है?
नहौम ने कहा कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता संभव नहीं दिखता और अगर होता भी है तो वह टिकाऊ नहीं होगा। इज़रायल की माँग है कि ईरान की समस्त संवर्धित परमाणु सामग्री पूरी तरह नष्ट की जाए।
भारत-इज़रायल संबंधों में आगे क्या संभावनाएँ हैं?
नहौम ने भारत को इज़रायल का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने IMEC कॉरिडोर और I2U2 समूह — जिसमें भारत, इज़रायल, अमेरिका और UAE शामिल हैं — को द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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