ईरान की बहरीन को UN में कड़ी चेतावनी: 'अपनी जमीन हमले के लिए मत दो, अंजाम भुगतने को तैयार रहो'
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन के द्वितीय सचिव अली करीमी मघम ने 6 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र की तीसरी समिति के मंच से बहरीन और खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों को स्पष्ट चेतावनी दी कि वे ईरान पर किसी भी हमले के लिए अपनी जमीन, सैन्य अड्डे या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल न होने दें। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ऐसा दोबारा हुआ, तो तेहरान जवाबी कार्रवाई से नहीं चूकेगा।
मुख्य घटनाक्रम
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, करीमी मघम का यह बयान बहरीन के प्रतिनिधि के उस वक्तव्य के जवाब में आया, जिसमें बहरीन ने मानवाधिकारों के संदर्भ में ईरान की आलोचना की थी। ईरानी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि बहरीन हालात के असली संदर्भ को नजरअंदाज कर एकतरफा बयान दे रहा था।
करीमी मघम ने कहा कि बहरीन कभी भी ईरानी हमलों का प्रत्यक्ष निशाना नहीं रहा, बल्कि उसने अमेरिका को ईरान के विरुद्ध अपनी जमीन, सैन्य ठिकाने और हवाई क्षेत्र उपलब्ध कराए थे — जिसके बाद ईरान ने आत्मरक्षा के अपने अधिकार का उपयोग करते हुए जवाबी कदम उठाया।
ईरान का तर्क: 'हम पर हमला हुआ, हमने नहीं किया'
ईरानी प्रतिनिधि ने जोर देकर कहा कि तेहरान ने पहले कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं की थी। उनके अनुसार, ईरान की जवाबी कार्रवाई उसका 'जायज़ और स्वाभाविक अधिकार' था। उन्होंने कहा, 'जो देश अपने पड़ोसी के विरुद्ध युद्ध के लिए अपनी जमीन देता है, उसे उसके नतीजों के लिए तैयार रहना चाहिए।'
उन्होंने अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को ईरान की नजर में 'गैर-कानूनी' करार देते हुए कहा कि जो देश ऐसे अभियानों में सहभागी बनता है, वह स्वयं को पीड़ित नहीं कह सकता।
बहरीन पर ईरानी हमलों का पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जून और जुलाई 2026 में ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और बहरीन की सैन्य रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में मनामा और वहाँ तैनात अमेरिकी नौसेना के पाँचवें बेड़े के मुख्यालय को निशाना बनाया गया था।
बहरीन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को लेकर तेहरान लंबे समय से असहज रहा है। यह खाड़ी क्षेत्र में ईरान-अमेरिका तनाव का एक पुराना और संवेदनशील बिंदु है।
दो विकल्पों की चुनौती
करीमी मघम ने बहरीन के प्रतिनिधि को संबोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के सामने दो स्पष्ट विकल्प हैं — या तो मिलकर पूरे इलाके को सुरक्षित बनाया जाए, या असुरक्षित बने रहा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बहरीन ने दोबारा वही राह चुनी जो उसने पहले चुनी थी, तो इस बार नतीजे पिछले जैसे नहीं होंगे।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही चरम पर है और ईरान तथा अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्ते बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं।
क्या होगा आगे
ईरान के इस कड़े बयान के बाद खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र के भीतर इस मामले पर आगे की कूटनीतिक हलचल पर दुनिया की नजर रहेगी। क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह चेतावनी खाड़ी देशों पर अमेरिकी-ईरान तनाव के बीच 'पक्ष चुनने' का दबाव और बढ़ा सकती है।