ईरान युद्धविराम पर अमेरिकी सीनेटर थॉम टिलिस का संदेह, तेहरान के मुल्लाओं पर भरोसा नहीं
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने 28 जून 2026 को स्पष्ट कहा कि उन्हें ईरान द्वारा अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते के पालन पर कोई भरोसा नहीं है। उनके अनुसार, तेहरान के नेतृत्व का इतिहास प्रतिबद्धताओं से मुकरने का रहा है और हालिया सैन्य घटनाक्रमों ने उनकी इस आशंका को और पुख्ता किया है।
टिलिस ने क्या कहा
सीएनएन के कार्यक्रम 'स्टेट ऑफ द यूनियन' में टिलिस ने कहा, "मुझे ईरानी नेतृत्व और वहाँ के मुल्लाओं पर भरोसा नहीं है कि वे अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेंगे। हम पहले से ही इसके संकेत देख रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता 60 दिनों के ढाँचे पर आधारित था, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि ईरान इसे ईमानदारी से निभाएगा।
ट्रंप की चेतावनी और ताज़ा तनाव
टिलिस की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि युद्धविराम उल्लंघन जारी रहा तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच पुनः गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई हुई, जिससे इस महीने हुए समझौते की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं।
पिछले युद्धविरामों का इतिहास
टिलिस ने रेखांकित किया कि पिछले कई महीनों में अनेक युद्धविराम हुए, किंतु कोई भी दीर्घकालिक नहीं रहा। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते — जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) — का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना कड़े क्रियान्वयन तंत्र के किसी भी नए समझौते को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि अमेरिका 2018 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में इस समझौते से बाहर निकल गया था।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता तनाव
तनाव विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ा है, जिसे दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में गिना जाता है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत संवेदनशील है और यहाँ किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों पर तत्काल पड़ सकता है।
आगे की राह
रिपोर्टों के अनुसार, हालिया घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अमेरिका-ईरान वार्ता के भविष्य को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। दोनों देशों ने कथित तौर पर बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है, लेकिन बार-बार हो रही सैन्य झड़पों से किसी व्यापक और टिकाऊ समझौते की संभावना पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।