ईरान की शर्तों और होर्मुज स्ट्रेट पर सीजफायर वार्ता में अनिश्चितता, वैश्विक ध्यान केंद्रित
सारांश
Key Takeaways
- युद्धविराम वार्ता इस्लामाबाद में हो रही है।
- ईरान ने कठोर शर्तें रखी हैं।
- अमेरिका ने धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
- पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई है।
- सीजफायर की स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है।
वॉशिंगटन, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान इस्लामाबाद में युद्धविराम को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाओं की तैयारी कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच गहरा अविश्वास, एक-दूसरे की विरोधी मांगें और संघर्ष से बाहर निकलने के लिए बढ़ता दबाव इस वार्ता की पृष्ठभूमि है।
द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच "युद्ध से निकलने का रास्ता खोजने की आवश्यकता" के अलावा कोई अन्य साझा दृष्टिकोण नहीं है। वार्ता से पहले, दोनों देशों ने एक-दूसरे पर गलत नीयत से काम करने का आरोप लगाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सार्वजनिक प्रस्ताव को धोखा बताया और कहा कि तेहरान होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाकर बेईमानी कर रहा है।
ईरान ने कठोर शर्तें रखी हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरान संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले प्रतिबंधित और ब्लॉक किए गए एसेट्स को रिलीज करने जैसे मुद्दों का समाधान करना होगा।
अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, उन्होंने मीडिया से कहा, "मुझे लगता है कि यह सकारात्मक होगा। यदि ईरान अच्छी नीयत से बातचीत करता है, तो हम निश्चित रूप से हाथ बढ़ाने को तैयार हैं।"
पाकिस्तान ने खुद को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बातचीत को 'करो या मरो' का क्षण बताया।
यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में स्थिति अस्थिर बनी हुई है। द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, तकनीकी तौर पर सीजफायर लागू है, लेकिन लेबनान में इजरायली ऑपरेशन जारी है, जिससे डिप्लोमैटिक प्रयास मुश्किल हो रहे हैं।
द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, एक बड़ी रुकावट होर्मुज स्ट्रेट है, जो एक आवश्यक ग्लोबल एनर्जी रूट है। ईरान ने ऐसे नियंत्रण लगाए हैं जिनके तहत टैंकरों को अनुमति लेनी होगी और टोल वसूलना शुरू कर दिया है। इस कदम को अमेरिकी अधिकारियों ने "गैर-कानूनी" मानते हुए स्वीकार करने से मना कर दिया।
होर्मुज संकट का असर वैश्विक बाजार पर देखा गया है। इसकी वजह से तेल की कीमतों में भी उछाल आया है। अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलना चाहता है, जबकि ईरान इस समुद्री मार्ग पर अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है।
बातचीत की स्थिति अब भी बहुत अलग है। द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, ईरान ने यूरेनियम संवर्धन रोकने और अपने मिसाइल प्रोग्राम पर रोक लगाने की अमेरिका की मांगों को ठुकरा दिया है। वहीं, अमेरिका ने संकेत दिया है कि बैन में राहत डील के बाद ही मिलेगी।
यह स्पष्ट नहीं है कि बातचीत प्रत्यक्ष होगी या मध्यस्थता होगी। द वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया कि दोनों पक्ष अलग-अलग बैठ सकते हैं। वेंस पर इस समय एक बड़ी जिम्मेदारी है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप ने उन्हें बातचीत का नेतृत्व करने के लिए भेजा है। इस प्रकार, इस बातचीत का परिणाम उपराष्ट्रपति की राजनीतिक समझ पर काफी हद तक निर्भर करेगा।
पाकिस्तान की भूमिका को लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि पाकिस्तान ने प्रारंभिक सीजफायर में मदद की है और आंतरिक आर्थिक एवं सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद वॉशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ संबंधों का लाभ उठा रहा है।
हालिया संघर्ष इस वर्ष की शुरुआत में बढ़ गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरा पैदा हो गया। इस सप्ताह कुछ समय के लिए सीजफायर हुआ, लेकिन यह कितनी देर चलेगा, यह अभी भी अनिश्चित है क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के इरादों का परीक्षण कर रहे हैं।