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बिहार में सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया नियमों में बदलाव, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

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बिहार में सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया नियमों में बदलाव, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

सारांश

बिहार सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को लेकर नए कड़े नियम बनाए हैं। उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है, जिससे सरकारी विभागों में सतर्कता बढ़ी है। जानिए इन नियमों की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

बिहार में नए सोशल मीडिया नियम लागू हुए हैं।
सरकारी कर्मचारी बिना अनुमति के राय व्यक्त नहीं कर सकते।
प्रतियोगी परीक्षा में अब केवल एक बार आवेदन किया जा सकेगा।
भड़काऊ सामग्री पोस्ट करना वर्जित है।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई होगी।

पटना, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर कड़े नियम लागू करने का निर्णय लिया है। इन नए नियमों के अनुसार, किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह नियम अब राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रभावी हो चुके हैं।

असल में, जनवरी २०२६ में सरकार ने बिहार सरकारी सेवक आचरण (संशोधन) नियमावली, २०२६ को स्वीकृति दी थी। इसके पश्चात राज्यपाल ने भारत के संविधान के अनुच्छेद ३०९ के तहत इस संशोधन को अधिसूचित किया। यह नियम शुक्रवार की शाम को राजपत्र में प्रकाशित होते ही लागू हो गए। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल युग में अनुशासन बनाए रखना और संस्थागत गरिमा की रक्षा करना आवश्यक है।

नए नियमों के अनुसार, सरकारी कर्मचारी बिना अनुमति के फेसबुक, 'एक्स' और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर सरकार की नीतियों, योजनाओं या न्यायालय के निर्णयों पर अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त नहीं कर सकते। खासकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों पर टिप्पणी करना पूरी तरह से वर्जित है। ऐसा करना कदाचार माना जाएगा।

इसके अतिरिक्त, सरकारी कर्मचारी अपने निजी सोशल मीडिया खातों को संचालित करने के लिए सरकारी ईमेल या मोबाइल नंबर का उपयोग नहीं कर सकेंगे। फर्जी प्रोफाइल, नकली पहचान या नाम से पोस्ट करना भी सख्त मना है।

कार्यालय परिसर में फोटो, वीडियो, दस्तावेज साझा करना, रील बनाना या लाइव स्ट्रीमिंग करना बिलकुल निषिद्ध है। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी कर्मचारियों को किसी राजनीतिक दल, मीडिया संस्थान या सार्वजनिक व्यक्तियों के समर्थन या विरोध में सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की अनुमति नहीं होगी। जाति, धर्म या अन्य संवेदनशील मुद्दों से संबंधित भड़काऊ या आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करना भी पूरी तरह वर्जित है।

एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर भी नए नियम बनाए गए हैं। अब सरकारी कर्मचारी अपने पूरे सेवा काल में केवल एक बार ही प्रतियोगी परीक्षा दे सकेंगे, वह भी अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र के साथ। पहले उन्हें पाँच बार परीक्षा देने की अनुमति थी।

इन नियमों के लागू होने के बाद सरकारी विभागों में सतर्कता बढ़ गई है। वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जूनियर कर्मचारियों तक सभी अब सोशल मीडिया पर अत्यधिक सावधानी से व्यवहार कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकारी कर्मचारियों के लिए अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह कदम डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक है, ताकि सरकारी अधिकारियों की गरिमा और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नए सोशल मीडिया नियमों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
नए नियमों का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के अनुशासन को बनाए रखना और सरकारी नीतियों की गरिमा को सुरक्षित करना है।
क्या सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त कर सकते हैं?
नहीं, सरकारी कर्मचारी बिना अनुमति के सरकार की नीतियों पर अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त नहीं कर सकते।
क्या सरकारी कर्मचारी प्रतियोगी परीक्षा देने के लिए पहले से ज्यादा बार आवेदन कर सकते हैं?
नहीं, अब सरकारी कर्मचारी अपने पूरे सेवा काल में केवल एक बार ही प्रतियोगी परीक्षा दे सकते हैं।
सोशल मीडिया पर किस प्रकार का कंटेंट पोस्ट करना मना है?
जाति, धर्म या अन्य संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा भड़काऊ या आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करना पूरी तरह वर्जित है।
नियमों का उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई की जाएगी?
नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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