25 सितंबर 2026
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नेतन्याहू ने UNGA में ईरान बमबारी को ठहराया जायज़, गाजा 'नरसंहार' आरोप को बताया सदी का सबसे बड़ा झूठ

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नेतन्याहू ने UNGA में ईरान बमबारी को ठहराया जायज़, गाजा 'नरसंहार' आरोप को बताया सदी का सबसे बड़ा झूठ

सारांश

संयुक्त राष्ट्र के मंच से नेतन्याहू ने ईरान पर बमबारी को 'सभ्यता बचाने की लड़ाई' बताया, गाजा नरसंहार के आरोप को 'सदी का सबसे बड़ा झूठ' कहा और एर्दोगान को 'तानाशाह' करार दिया। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का 20% संकट में है।

मुख्य बातें

बेंजामिन नेतन्याहू ने 25 सितंबर 2026 को UNGA में ईरान पर इजरायल-अमेरिका की संयुक्त बमबारी को 'सभ्यता बचाने' के लिए ज़रूरी बताया।
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेता इस हमले में मारे गए; इजरायली जवाबी कार्रवाई में 70 हजार लोगों के मारे जाने की बात रिपोर्टों में है।
ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट बंद किया, जिससे दुनिया की 20% पेट्रोलियम व गैस आपूर्ति प्रभावित हुई।
नेतन्याहू ने गाजा 'नरसंहार' के आरोप को 'इस सदी का सबसे बड़ा झूठ' कहा; फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने पहले इजरायल पर यही आरोप लगाया था।
तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगान को 'तानाशाह' बताया; पश्चिमी देशों पर 'यहूदी-विरोधी भीड़ के सामने झुकने' का आरोप लगाया।
नेतन्याहू के मंच पर आते ही कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर निकल गए; उन्होंने इन्हें 'कायर' कहा।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दिए अपने संबोधन में ईरान पर की गई संयुक्त सैन्य बमबारी का खुलकर बचाव किया और गाजा में 'नरसंहार' के आरोपों को 'इस सदी का सबसे बड़ा झूठ' करार दिया। न्यूयॉर्क में दिए इस भाषण में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना सबसे बड़ा सहयोगी बताया और कहा कि ईरान पर की गई कार्रवाई 'सिर्फ खुद को बचाने के लिए नहीं, बल्कि सभ्यता को बचाने के लिए' थी।

ईरान पर हमले का बचाव

नेतन्याहू ने महासभा में कहा, 'अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो हम सभी मारे गए होते।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान में कई ठिकानों पर बमबारी की, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई अन्य शीर्ष नेता मारे गए। उन्होंने कहा, 'इस लड़ाई में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बड़ा हमारा कोई साझेदार नहीं रहा।'

इस कार्रवाई के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया — एक ऐसा समुद्री मार्ग जिससे दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति गुज़रती है। इसके बंद होने से अनेक देशों को प्रभावित करने वाला आर्थिक संकट खड़ा हो गया और यह संघर्ष अभी भी जारी है।

गाजा 'नरसंहार' आरोपों पर पलटवार

नेतन्याहू से पहले महासभा को संबोधित करने वाले फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इजरायल पर गाजा में 'नरसंहार वाला युद्ध' चलाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में नेतन्याहू ने इस आरोप को सिरे से नकारते हुए तर्क दिया कि अगर इजरायल वास्तव में नरसंहार करने वाला शासन होता, तो वह फिलिस्तीनी आबादी को 10 लाख पोलियो वैक्सीन नहीं देता और गाजा में 20 लाख टन खाना बांटने की अनुमति नहीं देता।

गौरतलब है कि इजरायल की जवाबी सैन्य कार्रवाई में 70 हजार लोगों के मारे जाने की बात रिपोर्टों में कही गई है। अक्टूबर 2023 में गाजा से हमास के हमले का हवाला देते हुए नेतन्याहू ने कहा, 'हम टूटे नहीं — इसके बजाय हम उठ खड़े हुए और शेरों की तरह लड़े।'

सात मोर्चों पर संघर्ष का दावा

नेतन्याहू ने इजरायल को एक ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत किया जो उनके मुताबिक एक साथ सात मोर्चों पर लड़ रहा है। इनमें उन्होंने हमास, हिज्बुल्लाह, हूती, ईरान, इराक के हथियारबंद गुट, सीरिया के हथियारबंद गुट और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी लड़ाकों का नाम लिया। उन्होंने दावा किया, 'वे सभी हमें धरती से मिटाने के लिए एकजुट हुए — वे नाकाम रहे।'

एर्दोगान पर 'तानाशाह' का आरोप और राजनयिक विरोध

नेतन्याहू ने अपने भाषण में तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान को 'तानाशाह' बताया और आरोप लगाया कि वह हमास के नेताओं को अपने देश में पनाह देते हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों के नेताओं पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि उन्होंने 'यहूदी-विरोधी भीड़ के सामने झुकने का रास्ता चुना।' ब्रिटेन सहित कुछ देशों ने हाल ही में वेस्ट बैंक से आने वाले इजरायली उत्पादों पर सीमित पाबंदियां लगाई हैं।

जब नेतन्याहू मंच पर पहुंचे, तो कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर निकल गए। इस पर उन्होंने उन्हें 'कायर' कहा, जबकि उनके समर्थकों ने हिब्रू में 'एम इजरायल चाई' — अर्थात 'इजरायल की कौम जिंदा है' — के नारे लगाए।

यह संघर्ष अक्टूबर 2023 से जारी है और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के साथ वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर इसका असर अब पूरी दुनिया को महसूस हो रहा है। आने वाले दिनों में UNGA में इस मुद्दे पर कूटनीतिक सक्रियता और तेज होने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और विशेषकर भारत जैसे ऊर्जा-आयातक देशों के लिए, एक अलग किस्म की चुनौती है जो युद्धक्षेत्र से कहीं आगे जाती है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि ट्रंप-नेतन्याहू साझेदारी की सार्वजनिक स्वीकृति अमेरिकी विदेश नीति की दिशा के बारे में उतना ही बताती है जितना मध्य-पूर्व संघर्ष के बारे में।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेतन्याहू ने UNGA में ईरान पर बमबारी का बचाव क्यों किया?
नेतन्याहू ने 25 सितंबर 2026 को UNGA में कहा कि इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर कार्रवाई की और यह 'सभ्यता को बचाने' के लिए ज़रूरी था। उनके अनुसार अगर यह कार्रवाई नहीं होती तो 'हम सभी मारे गए होते।'
गाजा में नरसंहार के आरोप पर नेतन्याहू ने क्या कहा?
नेतन्याहू ने गाजा में नरसंहार के आरोप को 'इस सदी का सबसे बड़ा झूठ' बताया। उन्होंने तर्क दिया कि नरसंहार करने वाला शासन फिलिस्तीनियों को 10 लाख पोलियो वैक्सीन नहीं देता और गाजा में 20 लाख टन खाना बांटने की अनुमति नहीं देता।
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने का क्या असर पड़ा?
ईरान ने इजरायल-अमेरिका की बमबारी के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया, जिससे दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके कारण कई देशों में आर्थिक संकट पैदा हो गया और यह संघर्ष अभी भी जारी है।
नेतन्याहू ने एर्दोगान को 'तानाशाह' क्यों कहा?
नेतन्याहू ने UNGA भाषण में तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान को 'तानाशाह' बताते हुए आरोप लगाया कि वह हमास के नेताओं को अपने देश में जगह देते हैं। यह टिप्पणी इजरायल और तुर्किये के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और उजागर करती है।
UNGA में नेतन्याहू के भाषण के दौरान क्या हुआ?
जब नेतन्याहू मंच पर पहुंचे तो कई देशों के प्रतिनिधि विरोध में हॉल से बाहर निकल गए, जिन्हें नेतन्याहू ने 'कायर' कहा। उनके समर्थकों ने हिब्रू में 'एम इजरायल चाई' — अर्थात 'इजरायल की कौम जिंदा है' — के नारे लगाए।
राष्ट्र प्रेस
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