यूपी विधानसभा में सपा विधायक सचिन यादव निलंबित, भाजपा बोली — विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा में 4 अगस्त 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने जोरदार हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदन को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान सपा विधायक सचिन यादव ने सीएम योगी के विरुद्ध तख्ती प्रदर्शित की। इसके तत्काल बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सचिन यादव को सदन से निलंबित कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
सदन में हंगामे का सिलसिला तब और तेज हो गया जब सपा विधायकों ने मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान नारेबाजी शुरू कर दी। सचिन यादव द्वारा तख्ती दिखाने की घटना को सत्तापक्ष ने सदन की मर्यादा का उल्लंघन बताया। विधानसभा अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई की। यह ऐसे समय में आया है जब विधानसभा का सत्र जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया गया था।
सरकार की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि विपक्ष के पास जनता से जुड़ा कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा, 'विपक्ष के पास एक अवसर था कि वे जनता के मुद्दों पर चर्चा करें, लेकिन वे जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं और इस मौके को भी खो रहे हैं।' मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने सपा के आचरण को 'गैरजिम्मेदाराना' करार देते हुए कहा कि सदन चर्चा के लिए होता है, न कि भागने के लिए। उन्होंने जोड़ा कि सदन चलाने में जनता का पैसा खर्च होता है और इसका अपमान स्वीकार्य नहीं है।
भाजपा विधायकों का आरोप
भाजपा विधायक राकेश चौधरी ने सपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी का इतिहास 'गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार' का रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मुख्यमंत्री बोलने खड़े हुए, तब सपा विधायकों ने 'अपराधियों जैसा व्यवहार' किया। मंत्री दयाशंकर सिंह ने राम मंदिर के संदर्भ में भी सपा और कांग्रेस पर निशाना साधा, यह कहते हुए कि 'सपा ने राम मंदिर निर्माण में कोई सहयोग नहीं किया।'
विपक्ष का पक्ष
सपा की ओर से इस निलंबन पर तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। गौरतलब है कि विपक्षी दल प्रायः विधानसभा सत्रों में प्रतीकात्मक विरोध के जरिये सरकार का ध्यान खींचने की रणनीति अपनाते हैं। आलोचकों का कहना है कि सत्तापक्ष भी कई बार विपक्ष की वैध माँगों को 'हंगामा' कहकर खारिज करता है।
आगे क्या
सचिन यादव के निलंबन की अवधि और शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं। विधानसभा सत्र जारी है और आने वाले दिनों में सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच तनाव बने रहने की संभावना है। सपा नेतृत्व इस निलंबन को राजनीतिक मुद्दा बना सकता है।