18 सितंबर 2026
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तमिलनाडु उपचुनाव 2026: पीएमके ने मदुरांतकम और धारापुरम में किसी भी दल का समर्थन न करने का ऐलान किया

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तमिलनाडु उपचुनाव 2026: पीएमके ने मदुरांतकम और धारापुरम में किसी भी दल का समर्थन न करने का ऐलान किया

सारांश

तमिलनाडु उपचुनाव में पीएमके ने बड़ा राजनीतिक दांव खेला — न उम्मीदवार, न समर्थन। अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास के इस फैसले से मदुरांतकम और धारापुरम की चुनावी लड़ाई सीधे टीवीके बनाम एआईएडीएमके-DMK-BJP के बीच हो गई है।

मुख्य बातें

अंबुमणि रामदास ने 18 सितंबर 2026 को घोषणा की कि पार्टी मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनाव में किसी भी दल का समर्थन नहीं करेगी।
दोनों आरक्षित सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है।
सीटें एआईएडीएमके विधायकों मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा के इस्तीफे और टीवीके में शामिल होने के बाद रिक्त हुई थीं।
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 19 सितंबर 2026 है।
शेष पाँच रिक्त सीटों — तिरुचि ईस्ट , अंबासमुद्रम , विरालीमलाई , पेरुंदुरई और करूर — पर कानूनी मामले लंबित होने से उपचुनाव अभी घोषित नहीं।

पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) ने 18 सितंबर 2026 को स्पष्ट कर दिया कि वह तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करेगी। पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने शुक्रवार को यह घोषणा की, जो दोनों सीटों के चुनावी समीकरण को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।

पीएमके का फैसला और विचार-विमर्श प्रक्रिया

डॉ. अंबुमणि रामदास ने एक बयान में बताया कि उपचुनाव में किसी दल का समर्थन करने के सवाल पर पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों और दोनों विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े जिला पदाधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इस चर्चा के बाद सर्वसम्मति से तटस्थ रहने का निर्णय लिया गया।

पीएमके पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह इन दोनों आरक्षित सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। अब समर्थन देने से भी इनकार करने के बाद पार्टी की भूमिका इस उपचुनाव में पूरी तरह निष्क्रिय हो गई है।

चुनावी कार्यक्रम और प्रक्रिया

चुनाव आयोग (ECI) द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और 9 अक्टूबर 2026 को मतगणना की जाएगी। नामांकन प्रक्रिया 9 सितंबर से शुरू होकर 16 सितंबर तक चली, जबकि नामांकन पत्रों की जाँच 17 सितंबर को संपन्न हुई। उम्मीदवार 19 सितंबर 2026 तक अपना नाम वापस ले सकते हैं।

सीटें खाली होने की पृष्ठभूमि

ये दोनों सीटें अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के विधायकों मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा द्वारा विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई थीं। दोनों विधायकों ने इसके बाद तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) का दामन थाम लिया। यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में उस समय हुआ जब सत्तारूढ़ टीवीके सरकार बनने के बाद अपनी पहली बड़ी चुनावी परीक्षा का सामना कर रही है।

राजनीतिक महत्व और दलों की रणनीति

इन दोनों उपचुनावों को राजनीतिक विश्लेषक अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहे हैं। सत्तारूढ़ टीवीके के लिए ये चुनाव उसकी जनाधार क्षमता की प्रारंभिक कसौटी हैं। विपक्षी दलों — द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), एआईएडीएमके और भारतीय जनता पार्टी (BJP) — ने भी अपनी-अपनी चुनावी रणनीति तैयार कर ली है। एआईएडीएमके के लिए इन सीटों का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि रिक्तियाँ उसी के विधायकों के दलबदल के कारण उत्पन्न हुई थीं।

गौरतलब है कि मदुरांतकम और धारापुरम उन सात विधानसभा सीटों में से हैं जो एक साथ रिक्त हुई थीं। शेष पाँच सीटों — तिरुचि ईस्ट, अंबासमुद्रम, विरालीमलाई, पेरुंदुरई और करूर — पर संबंधित चुनावी मामले न्यायालय में लंबित होने के कारण अभी उपचुनाव की घोषणा नहीं हुई है।

आगे क्या होगा

पीएमके की तटस्थता दोनों सीटों पर वोटों के विभाजन को प्रभावित कर सकती है, विशेषकर उन मतदाताओं के बीच जो परंपरागत रूप से पार्टी के निर्देश पर मतदान करते हैं। 19 सितंबर 2026 को नामांकन वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची स्पष्ट होगी और मुकाबले की असली तस्वीर सामने आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तमिलनाडु के जातीय मतदान के संदर्भ में महत्वपूर्ण संकेत देती है — विशेषकर वन्नियार समुदाय के मतदाताओं के लिए जो पारंपरिक रूप से पीएमके का आधार रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या पार्टी का यह 'तटस्थ' रुख मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने देगा या उनका मत विभाजित कर किसी एक दल को अप्रत्यक्ष लाभ पहुँचाएगा। टीवीके के लिए ये उपचुनाव केवल दो सीटों का मामला नहीं — यह उसके राजनीतिक आधार और सरकारी प्रदर्शन की पहली सार्वजनिक परीक्षा है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमके ने मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनाव में तटस्थ रहने का फैसला क्यों किया?
पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने बताया कि प्रदेश और जिला पदाधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद किसी भी दल को समर्थन न देने का निर्णय लिया गया। पार्टी ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार भी नहीं उतारे हैं।
मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनाव की तारीख क्या है?
दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और 9 अक्टूबर 2026 को मतगणना की जाएगी। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 19 सितंबर 2026 है।
ये दोनों विधानसभा सीटें रिक्त क्यों हुईं?
एआईएडीएमके विधायकों मरगथम कुमारवेल (मदुरांतकम) और सत्यबामा (धारापुरम) ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया और बाद में तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) में शामिल हो गए, जिससे ये दोनों सीटें रिक्त हो गईं।
इन उपचुनावों में कौन-से दल मैदान में हैं?
सत्तारूढ़ टीवीके के साथ-साथ एआईएडीएमके, DMK और BJP ने अपनी चुनावी रणनीति तैयार की है। पीएमके ने न उम्मीदवार उतारे हैं और न किसी दल को समर्थन दिया है।
शेष पाँच रिक्त तमिलनाडु विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कब होगा?
तिरुचि ईस्ट, अंबासमुद्रम, विरालीमलाई, पेरुंदुरई और करूर सीटों पर संबंधित चुनावी मामले अदालत में लंबित होने के कारण चुनाव आयोग ने अभी तक उपचुनाव की घोषणा नहीं की है।
राष्ट्र प्रेस
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