तमिलनाडु उपचुनाव: मदुरांतकम और धारापुरम में पाँच दलों के बीच सीधा मुकाबला
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों में पाँच कोणीय मुकाबले की रूपरेखा स्पष्ट हो गई है। गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को नामांकन पत्रों की जाँच के दौरान तमिलागा वेट्री कषगम (TVK), द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK), नाम तमिलर कच्ची और वाम दलों के उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए। दोनों ही अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित सीटों पर प्रमुख दलों के स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरने से चुनावी लड़ाई व्यापक और रोचक हो गई है।
दोनों सीटों की भौगोलिक पृष्ठभूमि
मदुरांतकम (SC) विधानसभा क्षेत्र चेंगलपट्टू जिले में स्थित है, जबकि धारापुरम (SC) सीट तिरुप्पुर जिले में आती है। दोनों सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, जिससे इन क्षेत्रों में दलित मतदाताओं की भूमिका निर्णायक होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा बुधवार दोपहर 3 बजे समाप्त हुई थी।
मदुरांतकम में नामांकन की स्थिति
मदुरांतकम सीट पर कुल 48 नामांकन पत्र दाखिल किए गए, जिनमें से 32 स्वीकार किए गए और 16 खारिज कर दिए गए। अधिकारियों के अनुसार, खारिज नामांकनों में एक या अधिक अनिवार्य कानूनी शर्तें पूरी नहीं की गई थीं। इस सीट पर मुख्य मुकाबला TVK उम्मीदवार मरगाथम कुमारवेल, DMK उम्मीदवार परंथमन, AIADMK उम्मीदवार कनिथा संपत, नाम तमिलर कच्ची की उम्मीदवार जानकीरमन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की उम्मीदवार सुगंती के बीच होगा।
धारापुरम में उम्मीदवारों की स्थिति
धारापुरम सीट पर 51 नामांकन पत्रों की जाँच हुई, जिनमें से 22 स्वीकार किए गए और 29 खारिज हुए। यहाँ TVK की सत्यबामा, DMK की सुगन्या, AIADMK की भानुमति, नाम तमिलर कच्ची की कार्तिका और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के लक्ष्मणन के नामांकन वैध पाए गए। गौरतलब है कि दोनों सीटों पर कुल मिलाकर 99 नामांकन पत्र दाखिल हुए थे।
आगे की प्रक्रिया और राजनीतिक महत्व
दोनों सीटों पर अंतिम उम्मीदवारों की सूची नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद तय होगी। वैध नामांकन वाले उम्मीदवार चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर अपना नाम वापस ले सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में TVK और DMK के बीच सत्ता-साझेदारी की परीक्षा होगी, क्योंकि दोनों दल अलग-अलग उम्मीदवार उतार रहे हैं। इन उपचुनावों के नतीजे भविष्य के विधानसभा चुनाव से पहले दलों की संगठनात्मक ताकत और जमीनी पकड़ का संकेत देंगे।