15 सितंबर 2026
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मदुरंतकम-धारापुरम उपचुनाव: पलानीस्वामी का जीत का दावा, 6 अक्टूबर को मतदान

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मदुरंतकम-धारापुरम उपचुनाव: पलानीस्वामी का जीत का दावा, 6 अक्टूबर को मतदान

सारांश

मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव एआईएडीएमके के लिए महज दो सीटों की लड़ाई नहीं — यह पलानीस्वामी के नेतृत्व की असली अग्निपरीक्षा है। छह विधायकों के दलबदल और टीवीके की बढ़ती ताकत के बीच, 9 अक्टूबर के नतीजे तय करेंगे कि विपक्ष का किला टिका है या दरक रहा है।

मुख्य बातें

एआईएडीएमके महासचिव के.
पलानीस्वामी ने मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनावों में जीत का भरोसा जताया।
दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी।
सीटें तब खाली हुईं जब एआईएडीएमके विधायक के.
मरगथम कुमारवेल और पी.
सत्यभामा ने इस्तीफा देकर टीवीके जॉइन की।
2026 विधानसभा चुनाव के बाद से एआईएडीएमके के छह विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं।
एआईएडीएमके ने मदुरंतकम से कनिथा संपत और धारापुरम से भानुमति को उम्मीदवार बनाया है।
डीएमके ने मदुरंतकम से एडवोकेट आई.
परंथामेन और धारापुरम से एडवोकेट एस.
सुगन्य को मैदान में उतारा है।

एआईएडीएमके के महासचिव के. पलानीस्वामी ने मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों में अपनी पार्टी की जीत का पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों सीटें एआईएडीएमके का परंपरागत गढ़ हैं और मतदाता एक बार फिर पार्टी के साथ खड़े होंगे। तमिलनाडु की इन दो अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है।

उपचुनाव की पृष्ठभूमि

ये सीटें तब रिक्त हुईं जब एआईएडीएमके के दो विधायकों — के. मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम) और पी. सत्यभामा (धारापुरम) — ने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) की सदस्यता ग्रहण कर ली। पलानीस्वामी ने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके ने दोनों सीटें जीती थीं और जमीनी स्तर पर पार्टी का समर्थन अभी भी मजबूत बना हुआ है।

मुख्य घटनाक्रम और प्रत्याशी

टीवीके ने एआईएडीएमके के इन्हीं दो पूर्व विधायकों को उनके संबंधित क्षेत्रों से मैदान में उतारा है। सत्ताधारी पार्टी को अपने स्थानीय नेटवर्क, मुख्यमंत्री विजय की लोकप्रियता और अपने 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस' की ताकत पर भरोसा है।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने मदुरंतकम से अपने कानूनी प्रकोष्ठ के संयुक्त सचिव एडवोकेट आई. परंथामेन और धारापुरम से एडवोकेट एस. सुगन्य को उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं एआईएडीएमके ने मदुरंतकम के लिए पूर्व विधायक कनिथा संपत और धारापुरम के लिए भानुमति को अपना प्रत्याशी बनाया है।

एआईएडीएमके के लिए राजनीतिक दांव

ये दोनों उपचुनाव पलानीस्वामी के नेतृत्व के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होंगे। 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से अब तक एआईएडीएमके के छह विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं या इस्तीफा दे चुके हैं, जिससे सत्ताधारी टीवीके की ताकत बढ़ी है और विपक्षी नेतृत्व पर दबाव भी। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी दलबदल, आंतरिक मतभेदों और विधायी दल पर नियंत्रण को लेकर उठते सवालों से जूझ रही है।

गौरतलब है कि इन दोनों सीटों पर जीत एआईएडीएमके को यह साबित करने का अवसर देगी कि उसका संगठनात्मक आधार दलबदल के बावजूद टिका हुआ है और पार्टी अभी भी मतदाताओं के बीच प्रासंगिक है।

बिजली कटौती पर पलानीस्वामी का हमला

पलानीस्वामी ने उपचुनाव प्रचार के क्रम में राज्य में बिजली कटौती को भी बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि बिजली कटौती से आम परिवारों को रात में मच्छरों के काटने का सामना करना पड़ रहा है और छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार विदेशों में निवेश के रिकॉर्ड का प्रचार करने के बावजूद निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में नाकाम रही है और प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की माँग की।

आगे क्या होगा

इन दो सीटों के परिणाम तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे — खासकर इसलिए कि यह टीवीके के लिए अपने नए राजनीतिक बैनर तले पहली बड़ी चुनावी परीक्षा होगी, जबकि एआईएडीएमके के लिए अपनी विश्वसनीयता बहाल करने का मौका। 9 अक्टूबर 2026 को आने वाले नतीजे पलानीस्वामी के नेतृत्व और टीवीके की बढ़ती ताकत — दोनों की असली जाँच करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक मजबूरी लगता है — जब पार्टी के अपने छह विधायक घर छोड़ चुके हों, तो बयानबाजी ही एकमात्र हथियार बचती है। असली सवाल यह है कि टीवीके ने एआईएडीएमके के उन्हीं पूर्व विधायकों को वापस उनके क्षेत्र से उतारकर एक चतुर दांव खेला है — मतदाता अपने पुराने चेहरे को नए बैनर तले कितना स्वीकार करते हैं, यह तमिलनाडु की नई राजनीति का असली पैमाना होगा। इसके साथ ही, बिजली कटौती पर पलानीस्वामी की आक्रामकता दर्शाती है कि एआईएडीएमके शासन-विरोधी लहर बनाने की कोशिश में है, लेकिन संगठनात्मक क्षरण के बीच यह रणनीति कितनी कारगर होगी, यह देखना बाकी है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव क्यों हो रहे हैं?
एआईएडीएमके के दो विधायकों — के. मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम) और पी. सत्यभामा (धारापुरम) — के इस्तीफे के बाद ये सीटें रिक्त हो गईं। दोनों विधायकों ने पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) जॉइन की।
इन उपचुनावों में मतदान और नतीजे कब आएंगे?
दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मतदान 6 अक्टूबर 2026 को होगा और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर 2026 को होगी। दोनों सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।
एआईएडीएमके ने इन सीटों से किसे उम्मीदवार बनाया है?
एआईएडीएमके ने मदुरंतकम से पूर्व विधायक कनिथा संपत और धारापुरम से भानुमति को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं डीएमके ने मदुरंतकम से एडवोकेट आई. परंथामेन और धारापुरम से एडवोकेट एस. सुगन्य को उतारा है।
ये उपचुनाव एआईएडीएमके के लिए इतने अहम क्यों हैं?
2026 विधानसभा चुनाव में हार के बाद से एआईएडीएमके के छह विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं, जिससे पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। इन दो सीटों पर जीत पार्टी को यह दिखाने का मौका देगी कि दलबदल के बावजूद उसका जनाधार मजबूत बना हुआ है।
टीवीके की रणनीति इन उपचुनावों में क्या है?
टीवीके ने एआईएडीएमके के उन्हीं दो पूर्व विधायकों को उनके संबंधित क्षेत्रों से प्रत्याशी बनाया है जिन्होंने हाल ही में पार्टी जॉइन की है। सत्ताधारी पार्टी अपने स्थानीय नेटवर्क, मुख्यमंत्री विजय की लोकप्रियता और 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस' की ताकत के भरोसे दोनों सीटें बरकरार रखने की उम्मीद कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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