तमिलनाडु में AI और क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए पेरियार इंस्टीट्यूट, पाँच महीने में पहला सत्र शुरू होने की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु उच्च शिक्षा विभाग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, जलवायु प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को समर्पित एक विशेष उच्च शिक्षा संस्थान स्थापित करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। 15 सितंबर 2026 को सामने आई इस योजना के तहत प्रस्तावित पेरियार इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्जिंग टेक्नोलॉजी का पहला शैक्षणिक सत्र पाँच महीने के भीतर आरंभ होने की उम्मीद है। यह कदम तमिलनाडु को देश के उभरती-प्रौद्योगिकी शिक्षा परिदृश्य में एक नई पहचान दिलाने के इरादे से उठाया जा रहा है।
संस्थान का ढाँचा और संचालन
प्रारंभिक चरण में पेरियार इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्जिंग टेक्नोलॉजी अन्ना विश्वविद्यालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान के रूप में कार्य करेगा। विश्वविद्यालय को एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है, जिसमें शैक्षणिक संरचना, अवसंरचना, अनुसंधान प्राथमिकताएँ, वित्तपोषण आवश्यकताएँ और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल होंगे।
सरकार की दीर्घकालिक योजना इसे एक स्वतंत्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने की है, जिसे डिग्री प्रदान करने तथा उन्नत, अनुप्रयोग-उन्मुख अनुसंधान करने की पूर्ण शक्तियाँ प्राप्त होंगी। संस्थान की स्थापना के लिए आवश्यक कानून चालू शैक्षणिक वर्ष में विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है।
शैक्षणिक कार्यक्रम और अनुसंधान प्राथमिकताएँ
संस्थान का शैक्षणिक मॉडल बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की तर्ज पर बनाया जाएगा। इसमें स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टोरल कार्यक्रम संचालित होंगे। अन्ना विश्वविद्यालय प्रारंभिक साझेदारियों का समन्वय करते हुए उन्नत प्रौद्योगिकी की ज़रूरतों के अनुसार विशेष डिग्री कार्यक्रम तैयार करेगा।
कार्यक्रमों में कक्षा शिक्षण के साथ-साथ उत्पाद विकास, उद्योग-आधारित अनुप्रयोग और अनुसंधान का समन्वय होने की उम्मीद है। संस्थान का मूल उद्देश्य उच्च कुशल स्नातकों और शोधकर्ताओं का एक ऐसा समूह तैयार करना है जो उभरते औद्योगिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में सीधे योगदान दे सकें।
मूलभूत विज्ञान उत्कृष्टता संस्थान की भी योजना
उच्च शिक्षा विभाग समानांतर रूप से मूलभूत विज्ञानों — भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और कम्प्यूटेशनल जीवविज्ञान — को समर्पित एक पृथक उत्कृष्टता संस्थान स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। यह संस्थान भी डिग्री प्रदान करने में सक्षम होगा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग करेगा।
गौरतलब है कि वर्तमान में भारत भर में लगभग 30 प्रमुख संस्थान मौलिक विज्ञान अनुसंधान में सक्रिय हैं। केरल और ओडिशा के बाद तमिलनाडु तीसरा राज्य बनने की राह पर है जो बुनियादी विज्ञान के लिए विशेष रूप से राज्य स्तरीय अनुसंधान संस्थान स्थापित करेगा।
निजी विश्वविद्यालयों के लिए नियमों में ढील
इन पहलों के साथ-साथ सरकार ने निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की शर्तों में उल्लेखनीय छूट दी है। चेन्नई में न्यूनतम भूमि की आवश्यकता 100 एकड़ से घटाकर 12 एकड़ कर दी गई है, जबकि अन्य नगर निगम क्षेत्रों में यह सीमा 18 एकड़ निर्धारित की गई है। अनिवार्य बंदोबस्ती निधि भी ₹50 करोड़ से घटाकर ₹25 करोड़ की गई है।
इन बदलावों का स्पष्ट लक्ष्य विश्वसनीय शैक्षणिक संस्थानों को राज्य में आकर्षित करना, निवेश को प्रोत्साहन देना और विशेषीकृत उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान सुविधाओं की पहुँच राज्यभर में विस्तारित करना है।
क्या होगा आगे
संस्थान की स्थापना के लिए आवश्यक विधायी प्रक्रिया चालू शैक्षणिक वर्ष में पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद पेरियार इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्जिंग टेक्नोलॉजी अन्ना विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में अपना स्वतंत्र स्वरूप ग्रहण करते हुए देश और विदेश के शीर्ष संस्थानों के साथ साझेदारी का विस्तार करेगा। तमिलनाडु के इस कदम पर अन्य राज्यों और केंद्र सरकार की नज़र रहेगी, क्योंकि यह भारत में प्रौद्योगिकी-केंद्रित उच्च शिक्षा के एक नए मॉडल की नींव रख सकता है।